दिल्ली में स्लीपर बस में नाबालिग लड़की से कथित गैंगरेप के मामले में गिरफ्तार बस चालक कुलदीप की मां ने अपने बेटे को निर्दोष बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके बेटे को झूठे मामले में फंसाया जा रहा है और वह पूरी तरह निर्दोष है। कुलदीप की मां ने कहा, “मेरा बच्चा पूरी तरह निर्दोष है। उसे झूठा फंसाया जा रहा है।” उन्होंने दावा किया कि उनके पति की करीब दो महीने पहले हत्या कर दी गई थी। महिला को आशंका है कि जिन लोगों ने उनके पति की हत्या की, उन्हीं लोगों ने उनके बेटे को इस मामले में फंसाया है।
सरकार से लगाई मदद की गुहार
कुलदीप की मां ने सरकार से भावुक अपील करते हुए अपने बेटे को निर्दोष घोषित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि उनके बेटे का परिवार है और उसके बहुत छोटे बच्चे हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे दिल्ली जाकर अपनी बात रखने में भी असमर्थ हैं। उन्होंने कहा कि अगर उनके पास पर्याप्त साधन होते तो वह दिल्ली जाकर अधिकारियों के सामने अपनी बात रखतीं।
दिल्ली की स्लीपर बस में 11वीं कक्षा की नाबालिग छात्रा से कथित गैंगरेप के मामले में पुलिस ने बस चालक कुलदीप और कंडक्टर संदीप को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने बस को भी जब्त कर लिया है और उसे फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। वहीं, आरोपी चालक कुलदीप की मां ने अपने बेटे को निर्दोष बताते हुए उसे झूठे मामले में फंसाए जाने का आरोप लगाया है। पुलिस के मुताबिक, घटना 4 अगस्त की रात उस समय हुई, जब स्लीपर बस ग्रेटर नोएडा के परी चौक से पुरानी दिल्ली के कश्मीरी गेट की ओर जा रही थी। करीब 47 किलोमीटर की यात्रा के दौरान नाबालिग छात्रा के साथ कथित तौर पर घटना हुई। DCP नॉर्थ निहारिका भट्ट ने सोमवार को घटना की पुष्टि करते हुए दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, 29 वर्षीय आरोपी संदीप का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।
बारिश के दौरान परी चौक पहुंची थी छात्रा
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पीड़िता 11वीं कक्षा की छात्रा है और मैनपुरी जिले की रहने वाली है। बताया जा रहा है कि वह परिवार को बताए बिना नोएडा में अपने कजिन से मिलने निकली थी। भारी बारिश और अंधेरे के बीच वह गलती से ग्रेटर नोएडा के परी चौक पहुंच गई। इसी दौरान वहां से गुजर रही एक खाली स्लीपर बस उसके इशारा करने पर रुकी। छात्रा के मुताबिक, ड्राइवर और कंडक्टर ने उसे बताया कि वे नोएडा सेक्टर-63 की ओर जा रहे हैं और उसे वहां छोड़ने की बात कही।
छात्रा ने दोनों पर लगाए गंभीर आरोप
पुलिस के मुताबिक, छात्रा का आरोप है कि बस चलने के कुछ देर बाद कंडक्टर ने उसके साथ अश्लील इशारे करने शुरू कर दिए। इसके बाद ड्राइवर और कंडक्टर ने कथित तौर पर उसके साथ दुष्कर्म किया। छात्रा ने यह भी आरोप लगाया कि विरोध करने पर उसे जान से मारने की धमकी दी गई। मामले की जांच के तहत पुलिस ने बस को जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। पुलिस घटनाक्रम से जुड़े साक्ष्यों और दोनों आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है।
8 ट्रैफिक चालान; 54 हजार रुपये जुर्माना बकाया
दिल्ली की कश्मीरी गेट थाना पुलिस ने किशोरी से कथित गैंगरेप के मामले में जिस स्लीपर बस को जब्त किया है, उसके ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन का रिकॉर्ड भी सामने आया है। जानकारी के मुताबिक, जुलाई महीने में उत्तर प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में इस बस के 8 चालान किए गए थे। इनमें ज्यादातर चालान तेज रफ्तार से वाहन चलाने से जुड़े हैं। बताया जा रहा है कि यह बस अप्रैल 2026 में खरीदी गई थी। इसके बावजूद कुछ ही महीनों में बस के खिलाफ ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के 8 मामले दर्ज हो गए। इन चालानों पर कुल करीब 54 हजार रुपये का जुर्माना बकाया बताया जा रहा है।
तेज रफ्तार से जुड़े ज्यादातर चालान
ट्रैफिक रिकॉर्ड के मुताबिक, जुलाई में यूपी के अलग-अलग स्थानों पर बस के खिलाफ की गई कार्रवाई में अधिकांश मामले ओवरस्पीडिंग से जुड़े हैं। इन चालानों से संकेत मिलता है कि बस को तेज गति से चलाने के मामले सामने आते रहे हैं। पुलिस ने किशोरी से कथित गैंगरेप के मामले की जांच के दौरान बस को जब्त कर लिया है और उसे फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। पुलिस घटना से जुड़े सभी साक्ष्यों को जुटाने में लगी है।
यह बस उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद निवासी अनिल जादौन के नाम पर पंजीकृत है। बस का पंजीकरण 28 अप्रैल को उत्तर प्रदेश में कराया गया था। ट्रैफिक पुलिस के सूत्रों के मुताबिक, इस बस के मथुरा में पांच चालान हुए हैं। ये सभी चालान तेज गति से बस चलाने के आरोप में किए गए। प्रत्येक चालान पर 4 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया था। इसके अलावा बस के खिलाफ उत्तर प्रदेश के अन्य इलाकों में भी ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के मामले दर्ज हुए हैं। जुलाई महीने में ही बस के कई चालान किए गए थे। ट्रैफिक पुलिसकर्मी सुधीर कुमार यादव ने 23 जुलाई को हमीरपुर में इस बस का 26 हजार रुपये का चालान किया था। चालान में दर्ज किया गया कि वाहन के पास वैध परमिट नहीं था या वह परमिट की शर्तों का उल्लंघन कर रहा था।
एक भी चालान नहीं भरा गया
ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक, बस के खिलाफ किए गए चालानों में से किसी भी चालान का भुगतान अब तक नहीं किया गया है। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, बस पर कुल 8 ट्रैफिक नियम उल्लंघनों के करीब 54 हजार रुपये का जुर्माना बकाया है। इन रिकॉर्ड से बस के सड़क पर संचालन को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन का रिकॉर्ड अपने आप में गैंगरेप के आरोपों को साबित नहीं करता। इस मामले में पुलिस की जांच और अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्य ही महत्वपूर्ण होंगे।
सड़कों पर बेरोकटोक दौड़ रहीं पर्दे लगी बसें
इस घटना के बाद दिल्ली में निजी बसों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। राजधानी की सड़कों पर पर्दे और काले शीशे लगी बसें लगातार चलती दिखाई देती हैं, जबकि राज्य परिवहन प्राधिकरण (STA) के नियमों के मुताबिक बसों की खिड़कियों पर पर्दे नहीं लगाए जाने चाहिए। इस नियम का उद्देश्य बस के अंदर की गतिविधियों को बाहर से स्पष्ट रूप से दिखाई देना सुनिश्चित करना है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में समय रहते हस्तक्षेप किया जा सके।
बसों में पर्दे लगाने पर रोक
केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के तहत वाहन के शीशों से बाहर से अंदर का दृश्य स्पष्ट दिखाई देना चाहिए। नियमों के मुताबिक आगे और पीछे की विंडशील्ड में कम से कम 70 प्रतिशत विजुअल लाइट ट्रांसमिशन (VLT) और साइड की खिड़कियों में कम से कम 50 प्रतिशत VLT होना जरूरी है। इसी आधार पर मार्च 2013 में STA की ओर से बसों के परमिट संबंधी नियमों में स्पष्ट किया गया था कि बसों में पर्दे या फिल्म लगे शीशे नहीं होने चाहिए। यह प्रावधान खासतौर पर महिला यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए किया गया था।
कई प्रमुख इलाकों में नियमों की अनदेखी
इसके बावजूद पांडव नगर, आनंद विहार, कश्मीरी गेट, सीलमपुर, मयूर विहार, लाल किला और धौला कुआं समेत कई इलाकों से चलने वाली निजी बसों में पर्दे या डार्क फिल्म लगे शीशे देखे जा सकते हैं। आरोप है कि परिवहन विभाग और दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की ओर से ऐसे वाहनों के खिलाफ नियमित और प्रभावी कार्रवाई नहीं होती। कई बसों में बीच रास्ते से सवारियां बैठाने की भी शिकायतें सामने आती रही हैं। बसों की नियमित जांच नहीं होने से सुरक्षा नियमों के पालन पर भी सवाल खड़े होते हैं।
शीशों की विजुअल लाइट ट्रांसमिशन सीमा तय
केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के मुताबिक वाहन के शीशों से बाहर से अंदर का दृश्य स्पष्ट दिखाई देना चाहिए। आगे और पीछे की विंडशील्ड में कम से कम 70 प्रतिशत विजुअल लाइट ट्रांसमिशन (VLT) और साइड की खिड़कियों में कम से कम 50 प्रतिशत VLT होना जरूरी है।मार्च 2013 में STA की ओर से बसों के परमिट संबंधी नियमों में स्पष्ट किया गया था कि बसों में पर्दे या फिल्म लगे शीशे नहीं होने चाहिए। यह प्रावधान खासतौर पर महिला यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए किया गया था।
जांच को लेकर भी सख्ती नहीं
बसों के लिए बनाए गए नियमों का सख्ती से पालन नहीं होने के पीछे समय-समय पर औचक जांच नहीं होना भी एक बड़ी वजह बताई जा रही है। नियमित निगरानी और जांच के अभाव में बस ऑपरेटर नियमों की अनदेखी करते रहते हैं। किसी बड़ी घटना के बाद पुलिस और प्रशासन की टीमें सक्रिय होकर बसों की जांच करती हैं, लेकिन कुछ समय बीतने के बाद यह अभियान भी ठंडा पड़ जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि यात्रियों, खासकर महिला यात्रियों की सुरक्षा के लिए बनाए गए नियमों को जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू क्यों नहीं किया जा रहा।
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