रूसी तेल खरीदने वाले भारत समेत 5 देशों पर ट्रंप प्रशासन 100 फीसदी टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा है. अमेरिकी सीनेट (संसद) ने रूस और उसके पेट्रोलियम उत्पादों के मुख्य खरीदारों (जैसे चीन और भारत) पर टैरिफ लगाने वाले बिल को बहुमत से मंजूरी दे दी है. यह बिल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उन देशों के सामान पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की अधिकार देता है जो रूसी तेल और गैस के शीर्ष आयातक हैं.

सांसद ने कदम को बताया आत्मघाती

हालांकि, ट्रंप के इस फैसले का अमेरिका में ही विरोध होने लगा है. एक अमेरिका सीनेटर ने तो इस कदम पर सवाल भी उठाए हैं. उन्होंने इस फैसले का विरोध करते हुए कहा, ‘ऐसे समय में जब हम चीन के साथ चल रहे कंपटीशन में मदद करने के लिए भारत का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं, भारत पर 100% टैरिफ लगाना पूरी तरह से आत्मघाती कदम है’.

पहले भी ऐसे प्रतिबन्ध लगाता रहा है अमेरिका

रूसी तेल खरीदने वाले मुल्कों पर पहले भी ट्रंप प्रशासन पाबंदी लगाता रहा है. हालांकि इस बार 100 फीसदी टैरिफ का प्रस्ताव बहुत ही सख्त माना जा रहा है. इस बिल को लाने के पीछे तर्क दिया गया कि इस तरह का व्यापार यूक्रेन युद्ध को बढ़ावा देता है. वर्तमान में चीन, भारत, अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया रूस से तेल और गैस के टॉप पांच खरीदार हैं. रूस पर प्रतिबंधों के अलावा, यह बिल ‘ईरान सैंक्शन एक्ट ऑफ 1996’ की टाइम लिमिट को 2031 तक बढ़ा देगा. यह कानून ईरान के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश करने वाली कंपनियों पर फाइन लगाएगा.

दूसरे सदन में 31 अगस्त को होगी चर्चा

वोटिंग के बाद, सीनेटर ब्लूमेंथल ने मीडिया से कहा, ‘ये कड़े प्रतिबंध और टैरिफ उन सभी को रोक देंगे जो इस जानलेवा, आपराधिक और आक्रामक जंग में शामिल हैं.’ वहीं कुछ डेमोक्रेट्स ने चेताया कि यह बिल ट्रंप को टैरिफ से जुड़े नए अधिकार देगा. अब यह बिल मंज़ूरी के लिए हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (प्रतिनिधि सभा) में जाएगा, जहां 31 अगस्त को इस पर चर्चा होने की उम्मीद है.

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