अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन ने अवैध प्रवासियों के खिलाफ डिपोर्टेशन अभियान को और तेज कर दिया है। इस कार्रवाई के दायरे में करीब 18 हजार अनडॉक्युमेंटेड (बिना वैध दस्तावेज) भारतीय भी बताए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार ट्रम्प प्रशासन एक बार फिर सैन्य विमानों के जरिए डिपोर्टेशन की तैयारी कर रहा है, जो उसकी सख्त इमिग्रेशन नीति का प्रमुख हिस्सा बन चुका है।

आईसीई की लगातार छापेमारी, बढ़ी चिंता

अमेरिकी इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) की टीमें विभिन्न राज्यों में लगातार छापेमारी कर रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, न्यूयॉर्क, टेक्सास, कैलिफोर्निया और न्यू जर्सी जैसे राज्यों में बिना दस्तावेज वाले भारतीयों के बीच भय का माहौल है। कई लोगों को हिरासत में लिए जाने और डिटेंशन सेंटरों में रखे जाने की खबरें सामने आई हैं।

डिपोर्टेशन के लिए नए डिटेंशन सेंटर तैयार

ट्रम्प प्रशासन ने एल पासो और कैलिफोर्निया में नए वेयरहाउस खरीदकर उन्हें डिटेंशन सेंटर में बदल दिया है। इन केंद्रों पर लगभग 16,500 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं और यहां करीब 12 हजार प्रवासियों को रखने की व्यवस्था की गई है। इन सेंटरों का संचालन आईसीई को सौंपा गया है।

इमिग्रेशन वकीलों ने उठाए सवाल

न्यूयॉर्क के इमिग्रेशन अटॉर्नी ग्रेग सिस्किंड का कहना है कि पहले बिना दस्तावेज वाले प्रवासियों को अदालत में अपना पक्ष रखने का अवसर मिलता था, लेकिन अब कई मामलों में लोगों को सीधे डिटेंशन सेंटर भेजा जा रहा है। उनका कहना है कि संघीय व्यवस्था के बावजूद आईसीई विभिन्न राज्यों में व्यापक कार्रवाई कर रही है।

भारतीयों के डिपोर्टेशन के आंकड़े

भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, 2025 में अमेरिका से 3,567 भारतीय नागरिकों को डिपोर्ट किया गया, जबकि 2026 में जून तक 1,076 भारतीय वापस भेजे जा चुके हैं। इससे पहले 5 फरवरी 2025 को अमेरिका ने पहली बार सैन्य विमान से 104 भारतीयों को अमृतसर भेजा था। उस दौरान कुछ लोगों के हाथों में हथकड़ी और पैरों में बेड़ियां लगाए जाने की तस्वीरें सामने आई थीं, जिस पर भारत में राजनीतिक विवाद और संसद में तीखी बहस हुई थी।

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