कुंदन कुमार, पटना। ​बिहार की राजनीति में इन दिनों विकास के दावों और घोटालों के आरोपों को लेकर बयानबाजी का दौर लगातार जारी है। इसी कड़ी में जनसुनवाई कार्यक्रमों में घटती भीड़ और स्वास्थ्य विभाग में कथित डस्टबिन खरीद घोटाले को लेकर मंत्री अशोक चौधरी का बड़ा बयान सामने आया है। एक तरफ जहां विपक्ष सरकार को घेरने में जुटा है, वहीं सत्ता पक्ष की ओर से इन आरोपों पर अपनी दलीलें रखी जा रही हैं।

​जनसुनवाई में कम होती भीड़ पर मंत्री अशोक चौधरी का दावा

​बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी ने जनसुनवाई कार्यक्रम को लेकर एक अहम दावा किया है। उन्होंने कहा है कि आजकल जनसुनवाई कार्यक्रमों में लोगों की संख्या में कमी आ रही है। इस पर उनका तर्क है कि इसका सीधा मतलब यह है कि अब आम जनता की समस्याओं का समाधान सीधे प्रखंड (ब्लॉक) स्तर पर ही हो रहा है। लोगों को अपनी छोटी-छोटी शिकायतों और समस्याओं के समाधान के लिए पटना या मंत्रियों के दरबार तक आने की जरूरत नहीं पड़ रही है, क्योंकि जमीनी स्तर पर प्रशासनिक मशीनरी मुस्तैदी से काम कर रही है।

​रोहिणी आचार्य के गंभीर आरोप और डस्टबिन घोटाला

​दूसरी ओर, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव की पुत्री और राजनीतिक रूप से सक्रिय रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) के माध्यम से वर्तमान सरकार (सम्राट चौधरी और एनडीए सरकार के संदर्भ में) पर तीखा हमला बोला है। रोहिणी आचार्य ने अपने ट्वीट में स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। उन्होंने सवाल उठाया है कि आखिर कैसे स्वास्थ्य विभाग द्वारा 1500 रुपये की कीमत वाले डस्टबिन को 15,000 रुपये की भारी-भरकम कीमत पर खरीदा गया? इस कथित अनियमितता को उन्होंने जनता के गाड़े पसीने की कमाई की लूट बताया है।

​मंत्री अशोक चौधरी की सफाई और अधिकारियों को निर्देश

​रोहिणी आचार्य द्वारा लगाए गए डस्टबिन घोटाले के इन गंभीर आरोपों पर जब मंत्री अशोक चौधरी से प्रतिक्रिया मांगी गई, तो उन्होंने अपनी सफाई में कहा कि आम तौर पर प्लास्टिक से बनी वस्तुओं की बाजार कीमत 100 रुपये से लेकर 1000 रुपये तक होती है। हालांकि, इस पूरे मामले पर उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस भी विभाग से यह मामला या आरोप जुड़ा हुआ है, उस संबंधित विभाग के जिम्मेदार अधिकारी ही इस पर समुचित और आधिकारिक जवाब दे सकते हैं। विभाग अपने स्तर पर इन सभी तथ्यों की जांच कर स्थिति स्पष्ट करेगा।