भुवनेश्वर। ओडिशा में रविवार को जारी की गई स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की ड्राफ्ट मतदाता सूची को लेकर सियासी घमासान शुरू हो गया है। मुख्य विपक्षी दल बीजू जनता दल (बीजेडी) ने इस पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि नई ड्राफ्ट सूची से बड़े पैमाने पर योग्य मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं, जो नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है।

शंख भवन में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए बीजेडी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और पूर्व मंत्री देवी प्रसाद मिश्रा ने कहा कि मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय द्वारा अलग-अलग चरणों में दिए गए आंकड़ों में कोई निरंतरता नहीं है।

वोटरों की संख्या में बड़ी गिरावट

2025 की अंतिम मतदाता सूची के अनुसार राज्य में कुल 3,40,72,744 पंजीकृत मतदाता थे। चुनाव आयोग की मई की बैठक में यह संख्या करीब 3.34 करोड़ और जून में 3,33,99,591 दिखाई गई। लेकिन रविवार को जारी ड्राफ्ट में अचानक यह संख्या घटकर केवल 3,13,87,034 रह गई।

20 लाख नहीं, बल्कि 27 लाख वोटर बाहर

देवी प्रसाद मिश्रा ने दावा किया कि जहां चुनाव आयोग केवल 20.14 लाख नामों को हटाने की बात कह रहा है, वहीं वास्तव में करीब 27 लाख मतदाता सूची से बाहर हो गए हैं। बीजेडी के विश्लेषण के अनुसार, राज्य के 147 विधानसभा क्षेत्रों में से 75 निर्वाचन क्षेत्रों में 10,000 से अधिक और 49 क्षेत्रों में 15,000 से अधिक वोटरों के नाम हटाए गए हैं।

बीजेडी ने आरोप लगाया कि बूथ स्तर के अधिकारियों (BLOs) की अपर्याप्त ट्रेनिंग और जटिल प्रक्रिया के कारण ओडिशा के कई स्थायी निवासी इस लिस्ट से वंचित रह गए हैं। पार्टी ने चुनाव आयोग से मांग की है कि इस प्रक्रिया को सरल बनाया जाए, नए सिरे से सत्यापन किया जाए और सभी योग्य नागरिकों के नाम सूची में तुरंत बहाल किए जाएं।

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