प्रदीप मालवीय, उज्जैन। महाकालेश्वर मंदिर के पास शुक्रवार सुबह चार बजे टनल खुदाई के दौरान एक शिवलिंग मिलने से क्षेत्र में आस्था का माहौल बन गया। सूचना मिलते ही मंदिर के पुजारियों और श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से शिवलिंग का पूजन किया। वहीं बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचने लगे। पुरातत्व विभाग इसे 1000 से 2000 वर्ष पुराना मान रहा है।
राजाभोज के परमार काल का शिवलिंग
विभाग के अनुसार सिक्स सेंचुरी के उत्खनन में भी इस तरह के शिवलिंग और अवशेष मिले हैं। केमिकल ट्रीटमेंट के बाद ही इस शिवलिंग की सदी का पता चल सकेगा। हालांकि अभी जो दिखाई दे रहा है यह राजाभोज के परमार काल का शिवलिंग है और जो लिपि अभी दिखाई दे रही हे वो ईसा पूर्व की है।
शिवलिंग मिलने पर रुका खुदाई का काम
दरअसल, महाकाल मंदिर के सामने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए गेट नंबर-4 के पास टनल और वेटिंग हॉल का निर्माण कार्य चल रहा है। शुक्रवार सुबह करीब 4 बजे खुदाई के दौरान पोकलेन मशीन ऑपरेटर को मिट्टी के बीच एक शिवलिंग दिखाई दिया। इसके बाद तुरंत साइड इंजीनियर और मंदिर प्रशासन को सूचना दी गई। घटना के बाद एहतियातन खुदाई का काम रोक दिया गया।
शुरू हुआ दर्शन का सिलसिला
मंदिर के पुजारियों ओर क्षेत्रवासियों ने मौके पर पहुंचकर शिवलिंग का पूजन-अर्चन किया और फिलहाल उसे उसी स्थान पर सुरक्षित रखवाया गया है। खबर फैलते ही श्रद्धालुओं की भीड़ मौके पर जुटने लगी और दर्शन का सिलसिला शुरू हो गया। संभवत इसे परमार कालीन शिवलिंग बताया जा रहा है। साइट इंजीनियर दीपक पटेल के मुताबिक, खुदाई के दौरान शिवलिंग के साथ अन्य प्राचीन अवशेष मिलने के संकेत भी हैं।
2020 में भी मिले थे शिवलिंग
उन्होंने बताया कि नंदी की प्रतिमा जैसे अवशेष भी हो सकते हैं, जिसकी जांच की जा रही है। गौरतलब है कि मई 2020 में भी महाकाल मंदिर विस्तार कार्य के दौरान खुदाई में एक प्राचीन मंदिर के अवशेष मिले थे। उस समय 25-30 फीट नीचे खुदाई में शिवलिंग, नंदी, गणेश, मां चामुंडा और अन्य मूर्तियां मिली थीं। पुरातत्व विशेषज्ञों ने इन्हें करीब एक हजार वर्ष पुराना, परमारकालीन बताया था।
पुरातत्व विभाग करेगा जांच
7 मीटर गहराई से निकले शिवलिंग की जांच अब पुरातत्व विभाग करेगा। पुरातत्व विभाग के डॉ. रमन सोलंकी ने प्रथम दृष्टया इस शिवलिंग को राजा भोज के काल का परमारकालीन बताया है। शिवलिंग की धुलाई के बाद ही इसके काल और ईसा का पता चल सकेगा। यह एक महत्वपूर्ण और दुनिया का विरले शिवलिंग है।
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