नई दिल्ली। 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों (Delhi riots conspiracy case) की कथित साजिश से जुड़े मामले में आरोपी पूर्व आम आदमी पार्टी (AAP) पार्षद ताहिर हुसैन (Tahir Hussain) को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) में सुनवाई के दौरान अहम घटनाक्रम सामने आया है। दिल्ली हाई कोर्ट के जज जस्टिस अमित शर्मा (Amit Sharma) ने ताहिर हुसैन की जमानत याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। ताहिर हुसैन ने निचली अदालत के उस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें उनकी दूसरी जमानत याचिका (bail plea) खारिज कर दी गई थी। दिल्ली की एक अदालत ने 29 जनवरी को उनकी जमानत अर्जी को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि मामले की गंभीरता और आरोपों की प्रकृति को देखते हुए उन्हें राहत नहीं दी जा सकती।

मामले की सुनवाई सोमवार को जस्टिस सौरभ बनर्जी और जस्टिस अमित शर्मा की वेकेशन बेंच के समक्ष निर्धारित थी। हालांकि, जस्टिस अमित शर्मा के खुद को मामले से अलग कर लेने के कारण सुनवाई आगे नहीं बढ़ सकी। ताहिर हुसैन ने दिल्ली की एक निचली अदालत के उस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें उनकी दूसरी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। निचली अदालत ने 29 जनवरी को उनकी जमानत अर्जी को अस्वीकार करते हुए मामले की गंभीरता और आरोपों की प्रकृति को आधार बनाया था।

प्रदर्शनों के दौरान भड़की थी हिंसा

गौरतलब है कि फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 700 से अधिक लोग घायल हुए थे। ये हिंसा 2020 उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगे के दौरान भड़की थी, जब नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के विरोध में दिल्ली के कई इलाकों में प्रदर्शन चल रहे थे। दंगों को लेकर दर्ज विभिन्न मामलों में कई आरोपियों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) समेत अन्य गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई की गई थी।

दंगों को भड़काने की साजिश के आरोप

हुसैन पर फरवरी 2020 में हुए उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान हिंसा भड़काने और कथित साजिश में शामिल होने का आरोप है। ताहिर हुसैन ने निचली अदालत के उस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें उनकी दूसरी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। हुसैन 6 अप्रैल 2020 से न्यायिक हिरासत में हैं और 5 वर्ष से अधिक समय से जेल में बंद हैं। इस मामले में उनके अलावा शरजील इमाम, खालिद सैफी और उमर खालिद समेत कुल 20 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इनमें से कुछ आरोपियों को अदालतों से जमानत मिल चुकी है, जबकि कुछ अभी भी न्यायिक हिरासत में हैं।

मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मिली थी नियमित जमानत

ताहिर हुसैन को पिछले वर्ष मार्च में दिल्ली दंगा 2020 से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में नियमित जमानत मिल चुकी है। अदालत ने उन्हें यह राहत इस आधार पर दी थी कि वह उस मामले में संभावित सजा की आधी अवधि पहले ही जेल में बिता चुके हैं। हालांकि, दिल्ली दंगों की कथित साजिश से जुड़े मुख्य मामले में उन्हें अब तक कोई राहत नहीं मिली है और वे उसी मामले में हिरासत में बने हुए हैं।

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