दिल्लीवासियों के लिए राहत भरी खबर है। राजधानी के सार्वजनिक परिवहन को और मजबूत बनाने के लिए दिल्ली परिवहन निगम (DTC) के बेड़े में 300 नई जीरो-एमिशन इलेक्ट्रिक बसें शामिल हो गई हैं। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने इन बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। नई बसों में 195 ‘देवी’ श्रेणी की 9 मीटर लंबी इलेक्ट्रिक बसें और 105 अत्याधुनिक 12 मीटर लंबी इलेक्ट्रिक बसें शामिल हैं। इन बसों के शामिल होने से राजधानी में पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही यात्रियों को अधिक सुविधाजनक और आरामदायक यात्रा का विकल्प मिलेगा। इस अवसर पर केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव (Bhupender Yadav), केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा (Harsh Malhotra), दिल्ली के उप-राज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू (Taranjit Singh Sandhu), मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) तथा दिल्ली सरकार के कई कैबिनेट मंत्री भी मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली परिवहन निगम (DTC) के बेड़े में शामिल की गई नई लो-फ्लोर एसी इलेक्ट्रिक बसें यात्रियों को सुरक्षित, सुविधाजनक और दिव्यांगजन-अनुकूल यात्रा का अनुभव देंगी। उन्होंने बताया कि इन बसों को आधुनिक तकनीक और सुरक्षा सुविधाओं से लैस किया गया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रत्येक बस में सीसीटीवी कैमरे, पैनिक बटन, रियल-टाइम जीपीएस ट्रैकिंग, पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम सहित कई आधुनिक सुरक्षा और स्मार्ट सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिससे यात्रियों की सुरक्षा और सफर दोनों बेहतर होंगे। शून्य टेलपाइप उत्सर्जन (Zero Tailpipe Emission) वाली ये इलेक्ट्रिक बसें दिल्ली की वायु गुणवत्ता में सुधार लाने, कार्बन उत्सर्जन कम करने और नागरिकों को शांत, आरामदायक तथा पर्यावरण-अनुकूल यात्रा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य राजधानी में स्वच्छ, आधुनिक और टिकाऊ सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को लगातार मजबूत करना है।

बस बेड़ा 6,600 के करीब पहुंचा

300 नई इलेक्ट्रिक बसों के शामिल होने के साथ ही दिल्ली का सार्वजनिक परिवहन बेड़ा बढ़कर करीब 6,600 बसों तक पहुंच गया है। इनमें 4,845 इलेक्ट्रिक बसें और 1,755 सीएनजी बसें शामिल हैं। इससे राजधानी में पर्यावरण-अनुकूल सार्वजनिक परिवहन को और मजबूती मिलेगी। दिल्ली सरकार ने वर्ष 2028-29 तक लगभग 14,000 आधुनिक बसों का बेड़ा तैयार करने का लक्ष्य रखा है। सरकार का कहना है कि इस योजना के तहत इलेक्ट्रिक बसों की संख्या लगातार बढ़ाई जाएगी, जिससे प्रदूषण कम होगा, सार्वजनिक परिवहन की पहुंच बेहतर होगी और यात्रियों को अधिक सुरक्षित, आरामदायक एवं आधुनिक यात्रा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।

राजधानी को मिले 3 अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक बस डिपो

दिल्ली सरकार ने इलेक्ट्रिक बसों के सुचारु संचालन और बेहतर रखरखाव के लिए राजधानी को तीन अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक बस डिपो समर्पित किए हैं। इनमें नरेला सेक्टर ए-1 एवं ए-4, रिठाला और कोहाट एन्क्लेव में विकसित आधुनिक डिपो शामिल हैं। सरकार का कहना है कि इन डिपो के शुरू होने से दिल्ली की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को मजबूत आधारभूत ढांचा मिलेगा। नरेला सेक्टर ए-1 और ए-4 इलेक्ट्रिक बस डिपो में 250 ‘देवी’ इलेक्ट्रिक बसों की पार्किंग क्षमता विकसित की गई है। यहां आधुनिक पार्किंग बे, आंतरिक सड़कें तथा बसों के संचालन और रखरखाव के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे इलेक्ट्रिक बसों का संचालन अधिक सुचारु और प्रभावी होगा।

वहीं, कोहाट एन्क्लेव इलेक्ट्रिक बस डिपो में 30 इलेक्ट्रिक बसों की पार्किंग क्षमता के साथ प्रशासनिक भवन, सर्विस पिट, रिपेयर शॉप, वॉशिंग पिट, स्टोर, सुरक्षा कक्ष और विद्युत उपकेंद्र जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं। यह डिपो विशेष रूप से फीडर और लास्ट माइल कनेक्टिविटी को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा। इसके अलावा रिठाला इलेक्ट्रिक बस डिपो में 90 इलेक्ट्रिक बसों की पार्किंग क्षमता उपलब्ध कराई गई है। आधुनिक रखरखाव सुविधाओं से लैस यह डिपो दिल्ली में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन की दक्षता, विश्वसनीयता और सेवा गुणवत्ता को और बेहतर बनाएगा।

नंद नगरी में अत्याधुनिक ऑटोमेटेड व्हीकल टेस्टिंग स्टेशन का उद्घाटन

दिल्ली में सड़क सुरक्षा और वाहन फिटनेस जांच को अधिक वैज्ञानिक एवं पारदर्शी बनाने की दिशा में नंद नगरी डीटीसी डिपो में विकसित अत्याधुनिक चार-लेन ऑटोमेटेड व्हीकल टेस्टिंग स्टेशन का भी लोकार्पण किया गया। सरकार का कहना है कि इस केंद्र के शुरू होने से वाहन फिटनेस परीक्षण की प्रक्रिया पूरी तरह आधुनिक, तेज और पारदर्शी होगी। इस अत्याधुनिक केंद्र में भारी, हल्के और दोपहिया वाहनों की पूरी तरह स्वचालित फिटनेस जांच की जाएगी। यहां प्रतिवर्ष 52,000 भारी एवं हल्के वाहनों तथा 20,000 दोपहिया वाहनों की फिटनेस जांच करने की क्षमता विकसित की गई है। केंद्र में ब्रेक, सस्पेंशन, हेडलाइट अलाइनमेंट, साइड स्लिप, उत्सर्जन स्तर (एमिशन) और अंडरबॉडी निरीक्षण जैसी सभी आवश्यक जांचें आधुनिक तकनीक की मदद से बिना मानवीय हस्तक्षेप के की जाएंगी। इससे वाहन फिटनेस परीक्षण में पारदर्शिता बढ़ेगी, सड़क सुरक्षा को मजबूती मिलेगी और दिल्ली परिवहन निगम (DTC) को हर वर्ष नॉन-फेयर रेवेन्यू (किराये के अलावा अतिरिक्त आय) भी प्राप्त होगी।

नरेला हाई सिक्योरिटी जेल का ई-शिलान्यास

कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नरेला स्थित अत्याधुनिक हाई सिक्योरिटी जेल का ई-शिलान्यास भी किया। सरकार के अनुसार, यह परियोजना देश की सबसे आधुनिक और प्रौद्योगिकी आधारित उच्च सुरक्षा जेलों में शामिल होगी, जिससे राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूती मिलेगी। इस परियोजना के लिए 100 करोड़ रुपये का वित्तपोषण भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा किया जा रहा है, जबकि शेष राशि दिल्ली सरकार उपलब्ध कराएगी। इस हाई सिक्योरिटी जेल परिसर में 250 से अधिक कैदियों को रखने की क्षमता विकसित की जाएगी। सरकार के मुताबिक, यह जेल पारंपरिक जेल व्यवस्था से अलग अत्याधुनिक तकनीक और वैश्विक सुरक्षा मानकों पर आधारित होगी। इसका रेडियल-एक्सियल डिजाइन एक केंद्रीय नियंत्रण कक्ष (सेंट्रल कंट्रोल पॉइंट) से प्रत्येक विंग की निगरानी सुनिश्चित करेगा। साथ ही प्रत्येक कैदी के लिए अलग-अलग सेल की व्यवस्था होगी, जिससे आपसी संपर्क, गैंग नेटवर्किंग और अन्य सुरक्षा जोखिमों की संभावना को न्यूनतम किया जा सकेगा।

AI आधारित CCTV समेत अत्याधुनिक तकनीक से लैस होगी हाई सिक्योरिटी जेल

दिल्ली सरकार के अनुसार, नरेला की प्रस्तावित हाई सिक्योरिटी जेल को अत्याधुनिक सुरक्षा और निगरानी प्रणालियों से सुसज्जित किया जाएगा। जेल में AI आधारित CCTV निगरानी प्रणाली, बॉडी-वॉर्न कैमरे, बायोमेट्रिक एक्सेस कंट्रोल, ऑटोमेटेड लॉकिंग सिस्टम, फुल बॉडी स्कैनर, एक्स-रे बैगेज स्कैनर, मोबाइल सिग्नल जैमर, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा, इन-हाउस कोर्ट कॉम्प्लेक्स, एंटी-टनलिंग तकनीक तथा अत्याधुनिक कमांड एंड कंट्रोल सेंटर जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। सरकार ने बताया कि प्रत्येक कैदी के लिए अलग सेल के साथ शौचालय और स्नानघर की स्वतंत्र व्यवस्था होगी, जिससे कैदियों की अनावश्यक आवाजाही को रोका जा सकेगा और सुरक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी। दिल्ली सरकार का कहना है कि यह परियोजना सुरक्षा, निगरानी, त्वरित प्रतिक्रिया और तकनीक आधारित जेल प्रबंधन के क्षेत्र में नया मानक स्थापित करेगी तथा राजधानी की उच्च सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाएगी।

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