राजधानी दिल्ली के रोहिणी इलाके में एक निर्माणाधीन चार मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 4 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए हैं। पुलिस के अनुसार, मलबे में अब भी कुछ लोगों के फंसे होने की आशंका है और उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए युद्धस्तर पर राहत एवं बचाव अभियान जारी है। पुलिस ने बताया कि शाम करीब 4:30 बजे इमारत गिरने की सूचना मिली। सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस, दिल्ली अग्निशमन सेवा (DFS), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), दिल्ली नगर निगम (MCD), राजस्व विभाग, एंबुलेंस सेवा, टाटा पावर और अन्य संबंधित एजेंसियों की टीमें तत्काल मौके पर पहुंच गईं।

4 लोगों की मौत

हादसे के बाद राहत एवं बचाव दल ने मलबे से अब तक चार लोगों को बाहर निकाला है। इनमें 42 वर्षीय राम किशोर को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस के अनुसार, हादसे में जान गंवाने वाले अन्य मृतकों की पहचान की प्रक्रिया जारी है। घायलों में 35 वर्षीय रवि, जो प्लास्टर ऑफ पेरिस (pop) का काम करते हैं, और 32 वर्षीय सद्दाम शामिल हैं। पुलिस ने बताया कि सद्दाम के हाथ और पैर में फ्रैक्चर हुआ है और उनका इलाज बाबासाहेब आंबेडकर अस्पताल में चल रहा है। इसके अलावा 2 अन्य लोगों को भी सुरक्षित मलबे से बाहर निकाल लिया गया है।

स्थानीय लोगों ने विभागों पर लगाए लापरवाही के आरोप

रोहिणी सेक्टर-16 में निर्माणाधीन इमारत गिरने की घटना के बाद स्थानीय लोगों ने दिल्ली के विभिन्न सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि राजधानी में लगातार हो रहे भवन हादसों के बावजूद निर्माण गतिविधियों की प्रभावी निगरानी नहीं की जा रही है। स्थानीय निवासियों और आरडब्ल्यूए (रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन) के प्रतिनिधियों का कहना है कि डीडीए, एमसीडी, दिल्ली अग्निशमन सेवा (DFS), दिल्ली पुलिस समेत संबंधित विभाग निर्माणाधीन इमारतों का समय-समय पर जमीनी स्तर पर पर्याप्त निरीक्षण नहीं करते। उनका आरोप है कि इसी वजह से अवैध निर्माण और भवन उपनियमों के उल्लंघन के मामले समय रहते सामने नहीं आ पाते।

आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों ने कहा कि विशेष रूप से अनधिकृत कॉलोनियों, गैर-अधिसूचित क्षेत्रों और अन्य संवेदनशील इलाकों में सभी विभागों को बेहतर समन्वय के साथ निगरानी और निरीक्षण करना चाहिए। उनका मानना है कि यदि निर्माण कार्यों की नियमित जांच और नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए तो ऐसे हादसों को काफी हद तक रोका जा सकता है। स्थानीय लोगों ने यह भी कहा कि 30 मई को साकेत के सैदुलाजाब में हुए इमारत हादसे के बाद भी पर्याप्त सबक नहीं लिया गया। उनका आरोप है कि राजधानी के अलग-अलग हिस्सों में लगातार ऐसे हादसे हो रहे हैं, लेकिन संबंधित विभागों और अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं हो रही।

2016 में क्षेत्र किया गया था डी-नोटिफाई

रोहिणी सेक्टर-16 में निर्माणाधीन इमारत गिरने की घटना के बाद दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने बुधवार शाम करीब सात बजे आधिकारिक बयान जारी किया। डीडीए ने स्पष्ट किया कि जिस क्षेत्र में यह हादसा हुआ, उसे वर्ष 2016 में डी-नोटिफाई (अधिसूचना से बाहर) कर दिया गया था। इसके बाद इस इलाके का प्रशासनिक नियंत्रण और रखरखाव संबंधित स्थानीय निकाय को सौंप दिया गया था।

प्लंबिंग कार्य के दौरान ड्रिलिंग हो सकती है हादसे की वजह

रोहिणी सेक्टर-16 में निर्माणाधीन इमारत गिरने की घटना पर नगर निगम (एमसीडी) के अधिकारियों ने बताया कि संबंधित भवन का निर्माण हाल ही में सरल योजना के तहत बिल्डिंग प्लान मंजूर होने के बाद किया गया था। अधिकारियों के अनुसार, प्रत्येक यूनिट का क्षेत्रफल लगभग 26 वर्ग मीटर था और हादसे के समय इमारत में फिनिशिंग का काम चल रहा था। निगम अधिकारियों ने कहा कि प्रारंभिक स्थानीय जांच में यह जानकारी सामने आई है कि प्लंबिंग से जुड़े कुछ कार्य किए जा रहे थे। इस दौरान कथित तौर पर कॉलम और बीम में ड्रिलिंग तथा छेद किए गए थे, जो इमारत के अचानक गिरने की संभावित वजह हो सकते हैं।

28 लाख इमारतों के सर्वे में 19 भवन खतरनाक घोषित

MCD के अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली में हर वर्ष 1 अप्रैल से 30 जून के बीच संभावित रूप से खतरनाक इमारतों की पहचान के लिए विशेष सर्वे अभियान चलाया जाता है। अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष 27 जून तक करीब 28 लाख इमारतों का सर्वे किया गया, जिनमें से 19 इमारतें खतरनाक श्रेणी में पाई गईं। इन भवनों की पहचान होने के बाद संबंधित मालिकों को उन्हें खाली कराने या ध्वस्त करने के लिए नोटिस जारी किए गए हैं।

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