सत्या राजपूत, रायपुर। छत्तीसगढ़ में सिरपुर से प्राप्त 8वीं और 9वीं शताब्दी की पांच दुर्लभ एवं अमूल्य धातु मूर्तियों की चोरी का मामला एक बार फिर चर्चा में है। ये मूर्तियां वर्ष 1967 में संग्रहालय से चोरी हुई थी, लेकिन करीब 60 साल बाद भी न तो चोरी का रहस्य सुलझ पाया है और न ही मूर्तियां बरामद हो सकी है।

जानकारी के अनुसार चोरी हुई मूर्तियों में प्रभावली सहित बुद्ध की धातु प्रतिमा, बोधिसत्व, बोधिसत्व पद्मपाणी, तारा देवी की मूर्ति और पद्मपाणी शामिल हैं। ये सभी मूर्तियां प्राचीन बौद्ध कला और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।]

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संयुक्त संचालक जेआर भगत ने बताया कि संग्रहालय के पंजी रिकॉर्ड में इन मूर्तियों के संग्रहालय में सुरक्षित रखे जाने और वर्ष 1967 में चोरी होने का स्पष्ट उल्लेख दर्ज है। उन्होंने कहा कि इन मूर्तियों का मूल्य आंकना संभव नहीं है क्योंकि ये पूरी तरह अमूल्य धरोहर हैं। ये सभी मूर्तियां अलग-अलग समय में सिरपुर क्षेत्र से प्राप्त हुई थी। मामले में अंतरराष्ट्रीय मूर्ति तस्कर गिरोह की संलिप्तता की आशंका भी जताई जा रही है। हालांकि इतने वर्षों बाद भी इस दिशा में कोई ठोस सफलता नहीं मिल पाई है।

इधर सोशल मीडिया पर एक मूर्ति के अमेरिका से बरामद होने की खबर तेजी से वायरल हो रही है। हालांकि संग्रहालय विभाग ने इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। अधिकारियों का कहना है कि विभागीय रिकॉर्ड में इस संबंध में फिलहाल कोई उल्लेख नहीं मिला है। मामले की जांच की जा रही है।

उठते सवाल

इस पूरे मामले में एक अहम सवाल भी उठ रहा है कि यदि किसी मूर्ति का नाम पंजी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है तो उसे छत्तीसगढ़ की धरोहर बताकर संग्रहालय से चोरी होने का दावा किस आधार पर किया जा रहा है। विभाग अब इस पहलू की भी गंभीरता से जांच कर रहा है। करीब छह दशक पुरानी यह चोरी आज भी पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये मूर्तियां बरामद होती हैं तो यह छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में बड़ी उपलब्धि होगी।

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