संजीव शर्मा, कोंडागांव। जिले के मुलमुला धान खरीदी केंद्र से भारी अनियमितता का मामला सामने आया है। यहां से करीब 2852.80 क्विंटल धान गायब बताया जा रहा है, जिसकी समर्थन मूल्य के हिसाब से कीमत लगभग 90 लाख रुपये आंकी जा रही है। मामले के सामने आने के बाद जिले की धान खरीदी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

ऑनलाइन एंट्री हुई, लेकिन केंद्र में नहीं मिला धान

जानकारी के अनुसार, धान खरीदी केंद्र में किसानों से धान खरीदी की गई और उसकी ऑनलाइन एंट्री भी दर्ज की गई। इसके बाद समय पर धान उठाव के लिए डीओ (डिलीवरी ऑर्डर) भी जारी कर दिए गए। लेकिन जब मिलरों की गाड़ियां धान उठाने केंद्र पहुंचीं तो वहां धान के बोरे ही मौजूद नहीं थे। बताया जा रहा है कि केंद्र से 7132 बोरे धान गायब हैं।

खाद्य विभाग ने जारी किया नोटिस

जबकि खाद्य विभाग से धान बोरे उठाव करने के लिए डीओ जारी हो गए। अब यहां धान के बोरे ढूंढे जा रहे हैं। कहीं यहां भी धान चूहे तो नहीं खा गए। पूरे मामले पर खाद्य अधिकारी नवीन चंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि मामले में हमने खरीदी प्रभारी व लेम्प्स प्रबंधक को नोटिस जारी कर धान गायब होने की जानकारी मांगी है। यह मामला फर्जी खरीदी का लग रहा है।

एंट्री में हो जाती है गलती : लेम्प्स प्रबंधक

गोविंद मंडल, लेम्प्स प्रबंधक का कहना है कि हम ऑनलाइन चेक कर रहे हैं कि आखिर धान की बोरियां कहां गईं। एंट्री में कई बार गलती हो जाती है। मगर सवाल यह है कि अगर धान की खरीदी की गई तो लाखों रुपये किस किसान को दिए जा चुके हैं, मगर धान की बोरियां यहां मौजूद नहीं हैं। इसका मतलब बिना धान खरीदी किए ही खरीदी दिखाई गई।

धान खरीदी व्यवस्था पर उठे सवाल

कोंडागांव जिले में धान खरीदी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। जिले के 67 धान उपार्जन केंद्रों में खरीफ सीजन की धान खरीदी पूरी हो चुकी है। अब तक कुल 32 लाख 36 हजार 304 क्विंटल धान खरीदा गया है, जबकि लगभग 31 लाख 11 हजार 978 क्विंटल धान का उठाव मिलरों द्वारा किया जा चुका है। जिले में धान उठाव का प्रतिशत करीब 96 फीसदी बताया जा रहा है।

गोदाम में धान ही नहीं है तो उठाव कैसे करें : मिलर्स

मिलरों का कहना है कि जब गोदाम में धान ही नहीं है तो उठाव कैसे किया जाए। वहीं धान खरीदी केंद्र प्रभारी ने गोलमोल जवाब देते हुए कहा कि बाकी बोरे कहीं और रखवाए गए हैं और जल्द वापस लाकर रख दिए जाएंगे। मामला जिला कार्यालय तक पहुंचने के बाद अब इधर-उधर से धान जुटाकर भरपाई करने की कोशिश जारी है।

प्रशासन धान खरीदी केंद्रों की सख्त मॉनिटरिंग, सीसीटीवी निगरानी और एक-एक किलो धान के हिसाब के दावे करता रहा है। बावजूद इसके 7132 बोरे गायब हो जाना पूरी व्यवस्था की पोल खोल रहा है। जिले के मुलमुला धान उपार्जन केंद्र से हजारों बोरे धान गायब होने का मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

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