दुर्गेश राजपूत, नर्मदापुरम। भीषण गर्मी के इस मौसम में यदि आप प्रकृति के बीच सुकून और ठंडक की तलाश कर रहे हैं तो मध्य प्रदेश का एकमात्र हिल स्टेशन पचमढ़ी आपके लिए सबसे बेहतरीन डेस्टिनेशन है। पचमढ़ी के घने जंगलों के बीच स्थित ‘टायनम पूल’ (Tynam Pool) इन दिनों पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। पहाड़ों और जंगलों से रिसकर आने वाला इसका शीतल जल सैलानियों को न सिर्फ चिलचिलाती गर्मी से राहत दे रहा है बल्कि एक अनोखी ‘नेचुरल जल थेरेपी’ भी प्रदान कर रहा है।

दुर्लभ जड़ी-बूटियों से समृद्ध है पानी, काम करता है ‘नेचुरल थेरेपी’ का

सतपुड़ा टाइगर रिजर्व पचमढ़ी के सहायक संचालक संजीव शर्मा के मुताबिक टायनम पूल प्राकृतिक पानी का एक बेहद समृद्ध स्रोत है। सतपुड़ा के पहाड़ों और घने जंगलों से रिसकर आने वाला पानी यहां सालभर जमा रहता है जबकि अतिरिक्त पानी खुद-ब-खुद जंगल की ओर बह जाता है।

सबसे खास बात यह है कि जंगलों से बहकर आने के कारण इस पानी में पचमढ़ी की कई दुर्लभ जड़ी-बूटियों के अंश समाहित हो जाते हैं। यही वजह है कि इस पूल का पानी एक प्राकृतिक चिकित्सा यानि नेचुरल थैरेपी (Natural Therapy) की तरह काम करता है। इसमें स्नान करने और गर्मी से राहत पाने के लिए स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दूर से पर्यटक पहुंच रहे हैं।

अंग्रेजों के जमाने का है इतिहास, गवर्नर के नाम पर पड़ा नाम

इस खूबसूरत और ऐतिहासिक पूल का इतिहास करीब 81 साल पुराना है। इसका निर्माण अंग्रेजों के शासनकाल में वर्ष 1945 में हुआ था। पूल के समीप आज भी एक प्राचीन ऐतिहासिक शिलालेख मौजूद है, जिस पर तत्कालीन अंग्रेज गवर्नर आर. हेनरी जे. टायनम का नाम दर्ज है। उन्हीं के नाम पर इस प्राकृतिक स्विमिंग पूल को ‘टायनम पूल’ के रूप में पहचान मिली।

सैलानियों के लिए होंगे और बेहतर इंतजाम

प्रशासन अब इस प्राकृतिक धरोहर को सहेजने और पर्यटकों की सहूलियतें बढ़ाने पर ध्यान दे रहा है। वर्तमान में यहां पानी को स्वच्छ रखने के लिए एक छोटा कुंड और नाली की व्यवस्था है। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार आने वाले दिनों में पर्यटकों की सुविधा के लिए यहां कई और सुधार और सौंदर्यीकरण के कार्य किए जाने की योजना है।

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