Dharm Desk – सावन की शुरुआत से ही पूरा माहौल शिव भक्ति में लीन हो चुका है, मंदिरों में भीड़ है तो वहीं अधिकतर श्रद्धालु घर भर पूजा करना पसंद करते हैं। ऐसे में मिट्टी से शिवलिंग बनाकर पूजा करने की परंपरा काफी लोगों के बीच बहुत ज्यादा निभाई जाती है। पुरानी कथाओं में एक प्रसंग मिलता है कि भगवान राम ने लंका जाने से पहले समुद्र किनारे रेत से शिवलिंग बनाकर पूजा की थी। उसी से यह तरीका लोगों के बीच प्रचलित हुआ। धीरे-धीरे यह एक आसान उपाय बन गया, खाकसर उनके लिए जो बड़े अनुष्ठान नहीं कर पाते। कई लोग आज भी इसी विधि को अनापकर पूजा करते हैं।

यह पूजा लोग क्यों करते हैं

पार्थिव शिवलिंग को लेकर भक्तों के मन में अनेक तरह की प्रतिक्रिया सुनने को मिलती है। कुछ मन शांति और हल्का पन महसूस करने की बात करते हैं, कई तरह की परेशानियों से राहत मिलती है। कुछ लोग इसे स्वास्थ्य से जोड़कर भी देखते हैं, तो कुछ अपने परिवार की खुशहाली के लिए करते हैं। हर किसी की अपनी वजह होती है। सब इसे सच्चे मन से करते हैं।

मिट्टी का शिवलिंग बनाते समय क्या होना चाहिए

यहां सबसे जरूरी है कि मिट्टी साफ हो। लोग आमतौर पर नदी किनारे या किसी पेड़ के पास की मिट्टी लेते है। शिवलिंग बनाते समय दिशा का भी ध्यान रखा जाता हैअक्सर लोग उत्तर या पूर्व की ओर बैठते है। शिवलिंग काआकार बहुत बड़ा नहीं रखा चाहिए, छोटा और सरल ही ठीक माना जाता है। पूजा के बाद इसे संभालकर नहीं रखा जाता, बल्कि उसी दिन विसर्जित कर दिया जाता है।

बेलपत्र पर शिवलिंग बनाना

कई लोग बेल पत्र पर ही छोटा शिवलिंग बनाकर पूजा करते है। इसके लिए तीन पत्तों वाला साफ बेल पत्र लिया जाता है, और उसी के बीच में मिट्टी का शिवलिंग रखा जाता है। यह तरीका थोड़ा अलग जरूर है, लेकिन करने में आसान है। जो लोग समय कम होने की वहज से बड़ी पूजा नहीं कर पाते, वे अक्सर यही तरीका अपनाते है।

पूजा करते समय छोटी-छोटी बातों का रखें ध्यान

पूजा करते वक्त ज्यादा जल्द बाजी नहीं करनी चाहिए। आराम से जल चढ़ाएं, मन में मंत्र बोलते रहें। कई लोग तेज आवाज या बात-चीत से बचते हैं ताकि ध्यान बना रहे। और हां, पूजा खत्म होने के बाद शिवलिंग का विसर्जन करना जरूरी माना जाता है, इसे घर में रखकर नहीं छोड़ा जाता।