पूर्व क्रिकेटर और बहरामपुर से TMC सांसद यूसुफ पठान ने वडोदरा स्थित सरकारी जमीन विवाद मामले में गुजरात हाईकोर्ट से अपनी अपील वापस ले ली है। चीफ जस्टिस सुनीता अग्रवाल और जस्टिस डी.एन. रे की डिवीजन बेंच के समक्ष सुनवाई के दौरान यूसुफ पठान के वकील शालीन मेहता ने अपील वापस लेने का अनुरोध किया, जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए याचिका खारिज कर दी।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद वडोदरा नगर निगम (VMC) के 978 वर्ग मीटर के एक प्लॉट से जुड़ा है, जिस पर 2012 से यूसुफ पठान का कब्जा है। वीएमसी ने बिना किसी सार्वजनिक नीलामी के इस प्लॉट को 99 साल की लीज पर यूसुफ पठान को देने का प्रस्ताव तैयार किया था। हालांकि, राज्य सरकार ने 6 जून 2024 को इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। इसके बाद बीजेपी पार्षद नितिन डोंगा द्वारा मुद्दा उठाए जाने पर निगम ने पठान को नोटिस जारी कर जमीन खाली करने का निर्देश दिया था।
सिंगल जज की सख्त टिप्पणी
निगम के नोटिस के खिलाफ यूसुफ पठान ने हाईकोर्ट की एकल पीठ का दरवाजा खटखटाया था। अगस्त 2025 में सुनवाई करते हुए सिंगल जज ने पठान को ‘अतिक्रमणकारी’ माना और वीएमसी को प्लॉट जल्द से जल्द खाली कराने के आदेश दिए। कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि सेलिब्रिटी समाज के रोल मॉडल होते हैं, इसलिए कानून का उल्लंघन करने पर उन्हें किसी भी तरह की नरमी नहीं दी जा सकती।
आगे की राह
सिंगल जज के इस फैसले को यूसुफ पठान ने डिवीजन बेंच में चुनौती दी थी, लेकिन अब अपील वापस लेने के बाद उन्हें जमीन खाली करनी होगी। दूसरी ओर, वीएमसी ने इस प्लॉट को नीलाम करने की योजना बनाई थी, लेकिन कांग्रेस के विरोध के बाद प्रस्ताव वापस लेना पड़ा। कांग्रेस की मांग है कि पहले जमीन से कब्जा हटाया जाए, फिर खुली बोली लगाई जाए ताकि निगम को सही कीमत मिल सके।
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