राजनांदगांव। राजनांदगांव जिला मुख्यालय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले शहर के सभी वार्डों में इन दिनों गंदे और मटमैले पानी की आपूर्ति होने से शहरवासी परेशान हो रहे है। निगम में फिटकरी का संकट अभी भी बना हुआ है। आज भी नलों से गंदे पानी की आपूर्ति होने पर वार्ड के रहवासियों ने नाराजगी जाहिर की है। नगर निगम द्वारा फिटकरी का संकट का समाधान करने के लिए 1.20 करोड रुपए की लागत की फिटकरी तत्काल ऑर्डर भी कर दिया गया है।

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आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक नगर निगम द्वारा प्रतिवर्ष 3 करोड रुपए के फिटकरी की खरीदी की जाती है। उसके बाद भी शहर वासियों को शुद्ध पानी के लिए तरसना पड़ रहा है। बारिश के दिनों में तो आए दिन इसी प्रकार की शिकायत मिल रही है।

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राजनांदगांव जिला मुख्यालय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सभी 51 वार्डों में भरपूर पानी की व्यवस्था सुनिश्चित कराने के लिए नगर निगम द्वारा मोहरा तट पर नगर निगम के कार्यपालन अभियंता वा जल विभाग के प्रभारी यूके रामटेके का कहना कहना है कि फिटकरी की कहीं कोई कमी नहीं है। 1.20 करोड रुपए की फिटकरी का ऑर्डर भी कर दिया गया है।

तीन फिल्टर प्लांट संचालित किये जा रहे हैं। बारिश के दिनों में तीनों फिल्टर प्लांट में पानी की शुद्धता में प्रतिदिन 6 से 7 टन फिटकरी का उपयोग भी किया जा रहा है, उसके बाद भी शहर के अधिकांश वार्डो में गंदे और मटमैले पानी की आपूर्ति हो रही है। वर्तमान में पांच दिनों से सुबह और शाम के समय गंदा और मटमैला तथा बदबूदार पानी आ रहा है। इसको लेकर नेता प्रतिपक्ष ने हल्ला बोल दिया है ।

एक दिन पहले फिल्टर प्लांट का जायजा लेने के बाद वहां पर फिटकरी नहीं पाए जाने पर नेता प्रतिपक्ष संतोष पिल्ले ने नाराजगी भी जाहिर की थी। निगम में फिटकरी का संकट होने के कारण अब लापरवाही निगम पर ही भारी पड़ रही है। आज भी राजनांदगांव जिला मुख्यालय के विभिन्न वार्डों में गंदे पानी की आपूर्ति कराई जाने के कारण रहवासियों ने काफी नाराजगी जाहिर की है। खास बात यह है कि राजनांदगांव जिला मुख्यालय में पानी की शुद्धता में नगर निगम द्वारा प्रतिमाह लाखों रुपए की राशि खर्च की जा रही है। उसके बाद भी

45000 से अधिक है नल कनेक्शन

राजनांदगांव जिला मुख्यालय के सभी 51 वार्ड में अमृत मिशन योजना के तहत 210 करोड रुपए खर्च कर घर-घर पानी पहुंचाने के लिए नल कनेक्शन कराए गए हैं। निगम के जिम्मेदार अधिकारियों की माने तो राजनांदगांव जिला मुख्यालय में 45000 से अधिक नए नल कनेक्शन दिए गए हैं। राजनांदगांव जिला मुख्यालय में प्रतिदिन ढाई करोड़ लीटर पानी की खपत होती है।

साल में 800 टन फिटकरी की होती है खपत

निगम के जिम्मेदार अधिकारियों ने बताया कि राजनांदगांव जिला मुख्यालय में शुद्ध पानी की आपूर्ति सुनिश्चित कराने के लिए साल में 800 टन फिटकरी का उपयोग किया जाता है। इस प्रकार से 3 करोड रुपए पानी की शुद्धता में प्रतिवर्ष खर्च किए जा रहे हैं, उसके बाद भी बारिश के दिनों में गंदे पानी की आपूर्त कराए जाने से निगम घिरता नजर आ रहा है।

चार माह से कार्डधारियों नहीं मिल रहा शक्कर और नमक

राजनांदगांव। पिछले चार माह से जिले के अंत्योदय परिवारों को नमक और शक्कर का वितरण नही हो रहा है। जिससे हितग्राहियों में नाराजगी सामने आ रही है। जिले में सैकड़ों की संख्या में हितग्राही परेशानी हो रहे है।

इस मामले को लेकर राजीव नगर वार्ड के पूर्व पार्षद ऋषि शास्त्री द्वारा केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री के नाम ज्ञापन प्रेषित कर छत्तीसगढ़ के अंत्योदय परिवारों को शक्कर एवं नमक की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की हैं।

अंत्योदय योजना के तहत अति गरीब की श्रेणी में आने वाले परिवारों को नमक और शक्कर नहीं मिलने से उन्हें महंगे दर पर बाजार से शक्कर, नमक खरीदना पड़ रहा है। फ्री में मिलने वाले नमक के लिए अब उन्हें बाजार में 15 में 15-20 रुपए किलो में नमक खरीदने की मजबूरी हो गई गई है।

जिले में 37 हजार हितग्राही हो रहे प्रभावित

जिले में लगभग 37000 से अधिक अंत्योदय राशन कार्डधारी है। इनमें से केंद्र शासन की खाद्यान्न सुरक्षा योजना के लगभग 8 से 10 हजार हितग्राहियों को ही नमक और और शक्कर जारी नहीं हो रहा है। हितग्राहियों ने कहा कि नमक और शक्कर काफी आवश्यक वस्तु है, ऐसे में चार महीनों से इसका आवंटन नहीं किए जाने से परेशानी हो रही है। बताया जा रहा है कि नए वित्तीय वर्ष लागू होने के बाद से ही अंत्योदय राशन कार्डधारियों को नमक और शक्कर आवंटित नहीं हो रहा है।

बारिश के पहले शिवनाथ नदी किनारे रेत डंप

राजनांदगांव। बारिश के पहले शिवनाथ नदी किनारे रेत माफियाओं द्वारा अवैध तरीके से रेत डंप किया गया है। जिसमें डोंगरगांव के दर्जनभर इलाका शामिल है। इसके आलावा राजनांदगांव से लगे हल्दी और मोहारा व नंदई इलाको में भी व्यापक पैमाने पर रेत डंप किए गए है। जिसे 25 हजार हाईवा तक बेचा जा रहा है। गर्मी में सक्रिय हुए रेत माफियाओं ने नदी से बड़े पैमाने रेत निकाली है।

डोंगरगांव के रायतायली, आसरा, सुखरी, अर्जुनी, खुज्जी, बरगांव, मटिया, सांकरदाहरा और दर्री जैसे गांव में अवैध रेत डंप करने की शिकायते मिल रही है। इसके आलावा रायतापायली, बेंदरकटा, गनेरी और मनेरी में भी अवैध रेत डंप किए गए है। इसके आलावा राजनांदगांव में नदी किनारे लगे गांव हल्दी, मोहारा, सिंगदई, बांकल, पनेका, जंगेलसर में रेत डंप किए गए है।

खनिज विभाग द्वारा ऐसे प्रकरणों पर कार्यवाही नही की जा सकी है ।शहर के नंदई चौक से लेकर शिवनाथ नदी जाने वाले मार्ग तक सड़क किनारे जगह जगह अवैध रेत डंप किए गए है। जबकि इसके लिए खनिज विभाग से स्टोरेज की अनुमति भी नही ली गई है। नंदई चौक से मोहारा तक मनमानी तरीके से रेत डंप कर महंगे दाम पर बेचने माफिया सक्रिय हो गए है।

पता चला कि शिवनाथ नदी से निकलने वाले रेत की अवैध तस्करी जमकर हो रही हैं। जिले में चार रेत खदानों की नीलामी की जा चुकी है। नीलामी के बाद उम्मीद थी कि प्रशासन द्वारा सस्ते दर रेत उपलब्ध कराया जाएगा। लेकिन नीलामी के छह माह बीतने के बाद भी पर्यावरण स्वीकृति के चक्कर में खदान से रेत का संचालन शुरू नही हो सका, यही कारण है कि जिले में अवैध रेत खनन चरम पर पहुंचा। इस संबंध में भरत बंजारे, सहायक खनिज अधिकारी, राजनांदगांव का कहना है कि रेत डंप के लिए विधिवत स्टोरेज लाइसेंस लेना जरूरी है। अवैध रेत डंप मामले में लगातार कार्यवाही हो रही है।

खैरागढ़ पालिका में 1.31 करोड़ की खरीदी पर घमासान

खैरागढ़। नगर पालिका खैरागढ़ में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन योजना के तहत लगभग 1 करोड़ 31 लाख रुपये की गई खरीदी को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस नेताओं ने खरीदी प्रक्रिया में कथित अनियमितता, घटिया गुणवत्ता और तकनीकी मानकों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है साथ ही जांच पूरी होने तक संबंधित भुगतान पर रोक लगाने की भी मांग की गई है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं विधायक प्रतिनिधि मनराखन देवांगन, नेता प्रतिपक्ष दीपक देवांगन, वरिष्ठ कांग्रेस नेता सूर्यकांत यादव, युवा नेता शेखर दास सानू सहित अन्य नेताओं ने सौंपे गए आवेदन में आरोप लगाया है कि केंद्र प्रवर्तित योजना के अंतर्गत 15 वें वित्त आयोग की राशि से जेम (ॠीट) पोर्टल के माध्यम से हाथ रिक्शा, ई-रिक्शा, डस्टबिन, मिनी टिप्पर तथा हाइड्रोलिक ट्रॉली स्काई लिफ्ट मशीन सहित अन्य सामग्री खरीदी गई लेकिन खरीदी में गुणवत्ता और तकनीकी मानकों का समुचित पालन नहीं किया गया।

कांग्रेस नेताओं के आरोप के अनुसार खरीदे गए हाथ रिक्शा और ई-रिक्शा महज दो महीने के भीतर ही खराब होने लगे, जिससे नगर पालिका के स्वच्छता कर्मचारियों को रोजमर्रा के कार्य में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नेताओं का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद उपकरणों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं और इसका सीधा असर शहर की सफाई व्यवस्था पर पड़ रहा है। ज्ञापन में हाइड्रोलिक ट्रॉली स्काई लिफ्ट मशीन की खरीदी को भी संदेह के घेरे में बताया गया है।

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