Bastar News Update : दंतेवाड़ा. जिले में अपराध नियंत्रण के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर तैयार की गई सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था अब खुद सवालों के घेरे में है. शहर से लेकर बारसूर, गीदम, कटेकल्याण, कुआकोंडा, बचेली और किरंदुल तक कई कैमरे या तो बंद पड़े हैं या धुंधली तस्वीरें रिकॉर्ड कर रहे हैं. ऐसे में घटनाओं के बाद पुलिस को सबसे अहम तकनीकी साक्ष्य ही नहीं मिल पा रहे. नकुलनार साप्ताहिक बाजार में दिनदहाड़े 65 हजार रुपये से भरा बैग चोरी होना इसी कमजोरी की बड़ी मिसाल बन गया. घटना स्थल के पास कैमरा लगा था, लेकिन खराब होने के कारण पूरी वारदात रिकॉर्ड नहीं हो सकी. अस्पष्ट फुटेज के कारण पुलिस को निजी कैमरों और प्रत्यक्षदर्शियों के भरोसे जांच करनी पड़ रही है. रात के समय कैमरों की रिकॉर्डिंग और भी कमजोर हो जाती है, जिससे वाहन नंबर और चेहरे पहचानना मुश्किल होता है. विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कैमरे लगाना पर्याप्त नहीं, उनका नियमित तकनीकी ऑडिट और रखरखाव भी जरूरी है. करोड़ों की यह परियोजना तभी सफल होगी जब रिकॉर्डिंग गुणवत्ता और मॉनिटरिंग सिस्टम मजबूत बनाया जाए. व्यापारियों और आम नागरिकों ने खराब कैमरों को तत्काल दुरुस्त करने की मांग उठाई है. अब सवाल यह है कि सुरक्षा के लिए लगाए गए कैमरे आखिर अपराध रोकेंगे या सिर्फ शोपीस बनकर रह जाएंगे?  

बस्तर के 298 प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की कमी

जगदलपुर. बस्तर संभाग के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी अब शिक्षा की गुणवत्ता पर सीधा असर डाल रही है. 42 हजार से अधिक स्वीकृत पदों में करीब 11 हजार पद वर्षों से खाली पड़े हैं. सबसे अधिक परेशानी प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में दिखाई दे रही है. अकेले बस्तर जिले के 298 प्राथमिक विद्यालय आज भी एक शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहे हैं. एक शिक्षक को पढ़ाई के साथ प्रशासनिक कार्य, पोर्टल अपडेट, मध्यान्ह भोजन और सरकारी योजनाओं की जिम्मेदारी भी निभानी पड़ रही है. विज्ञान, गणित और अंग्रेजी जैसे विषयों के विशेषज्ञ नहीं होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है. नए शिक्षा सत्र के डेढ़ महीने बाद भी रिक्त पद नहीं भरने से अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है. सेवानिवृत्त शिक्षकों के स्थान पर नियमित भर्ती नहीं होने से यह संकट लगातार गहराता गया. शिक्षा विभाग का कहना है कि भर्ती का निर्णय शासन स्तर पर होना है और नई भर्ती प्रक्रिया जारी है. हालांकि दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों के स्कूल अब भी सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. शिक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि समय पर नियुक्तियां नहीं हुईं तो सीखने का स्तर और परीक्षा परिणाम दोनों प्रभावित होंगे. अब उम्मीद नई भर्ती से है, लेकिन छात्रों का भविष्य और इंतजार नहीं कर सकता.

मौसम के बदलते मिजाज से बचाएगी फसल बीमा योजना, 31 जुलाई तक मौका

जगदलपुर. बस्तर जिले में बदलते मौसम और प्राकृतिक आपदाओं से किसानों को सुरक्षा देने के लिए उद्यानिकी विभाग ने विशेष अभियान शुरू किया है. खरीफ सत्र 2026-27 के तहत 450 हेक्टेयर क्षेत्र को मौसम आधारित फसल बीमा योजना से जोड़ने का लक्ष्य तय किया गया है. सभी विकासखंडों में मैदानी अमले को गांव-गांव पहुंचकर किसानों का पंजीयन कराने के निर्देश दिए गए हैं. 31 जुलाई तक किसान योजना से जुड़कर अपनी नगदी फसलों का बीमा करा सकेंगे. टमाटर, मिर्च, बैंगन, अदरक, केला, पपीता और अमरूद जैसी फसलें योजना में शामिल हैं. अनियमित बारिश और तेज हवाओं से होने वाले नुकसान की भरपाई इस योजना के जरिए संभव होगी. सबसे अधिक लक्ष्य बस्तर, बकावंड और जगदलपुर ब्लॉक को दिया गया है. प्रतिदिन प्रगति रिपोर्ट जिला कार्यालय भेजकर अभियान की निगरानी की जा रही है. उद्यानिकी विभाग का उद्देश्य अधिक से अधिक किसानों को समय रहते योजना का लाभ दिलाना है. विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम की अनिश्चितता के दौर में बीमा किसानों के लिए आर्थिक सुरक्षा कवच बन सकता है. अब चुनौती लक्ष्य पूरा करने के साथ किसानों तक सही जानकारी पहुंचाने की भी है. समय पर पंजीयन ही भविष्य के नुकसान से राहत दिला सकता है.  

Bastar News Update : नेटवर्क पहुंचा जंगलों तक, अब विकास की नई रफ्तार

बीजापुर. जिले के उसूर ब्लॉक के पुसबाका और भैरमगढ़ ब्लॉक के मंडेम गांव अब डिजिटल दुनिया से जुड़ गए हैं. दोनों वनांचल क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क टॉवर शुरू होने से वर्षों पुरानी संचार समस्या दूर होने लगी है. ग्रामीणों को अब नेटवर्क के लिए पहाड़ियों और पेड़ों पर चढ़ने की मजबूरी नहीं रहेगी. इंटरनेट सेवा शुरू होने से विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मदद मिलेगी. किसानों को मौसम, बाजार भाव और सरकारी योजनाओं की जानकारी समय पर मिल सकेगी. युवा अब रोजगार संबंधी पोर्टलों तक आसानी से पहुंच पाएंगे. डिजिटल बैंकिंग और यूपीआई भुगतान से गांवों में लेन-देन भी आसान होगा. सरकारी ऑनलाइन सेवाओं और डिजिटल दस्तावेजों तक पहुंच पहले से बेहतर होगी. टेलीमेडिसिन के जरिए विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श लेने का रास्ता भी खुलेगा. नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में संचार सुविधा का विस्तार विकास की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि मोबाइल टॉवर ने गांव को देश-दुनिया से जोड़ने का काम किया है. अब उम्मीद है कि डिजिटल कनेक्टिविटी के साथ विकास की रफ्तार भी तेज होगी.

कोचिंग डिपो अधूरा, लंबी दूरी की ट्रेनों का इंतजार जारी

जगदलपुर. जगदलपुर रेलवे स्टेशन पर प्रस्तावित कोचिंग डिपो का निर्माण एक दशक बाद भी अधूरा है. करीब ₹227 करोड़ की इस परियोजना से बस्तर को लंबी दूरी की रेल सेवाएं मिलने की उम्मीद थी. 300 एकड़ क्षेत्र में बनने वाले इस डिपो में ट्रेनों की धुलाई, मेंटेनेंस और मरम्मत की व्यवस्था प्रस्तावित है. अब तक केवल सीमित निर्माण कार्य ही पूरा हो सका है. कोचिंग डिपो नहीं बनने से दिल्ली, हैदराबाद, बेंगलुरु, बनारस और चेन्नई जैसी सीधी रेल सेवाओं का सपना अधूरा है. रेलवे लाइन के दोहरीकरण की धीमी गति भी बड़ी बाधा बनी हुई है. जानकारों का कहना है कि डिपो बनने से स्थानीय युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार मिलेगा. रेलवे से जुड़े कई सहायक उद्योग भी विकसित हो सकते हैं. दूसरी ओर अमृत स्टेशन योजना का काम तेजी से पूरा हो गया, लेकिन कोचिंग डिपो की रफ्तार अब भी सुस्त है. यात्रियों का कहना है कि स्टेशन का विकास तभी सार्थक होगा जब लंबी दूरी की ट्रेनें भी यहां से संचालित हों. बस्तर की वर्षों पुरानी रेल मांग अब इसी परियोजना की प्रगति पर टिकी है. अब निगाहें इस बात पर हैं कि अधूरी योजना आखिर कब पूरी होगी.

Bastar News Update : बारिश की बेरुखी से खेत सूखे, किसानों की बढ़ी चिंता

नारायणपुर. जिले के छोटेडोंगर क्षेत्र में कमजोर मानसून ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. पर्याप्त बारिश नहीं होने से धान के खेतों में नमी की कमी और दरारें दिखाई देने लगी हैं. कई स्थानों पर बुवाई अधूरी है, जबकि बोई गई फसल भी संकट में है. अधिकांश खेती वर्षा पर निर्भर होने से किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं. बीज, खाद और खेती की तैयारी में लाखों रुपये खर्च करने वाले किसानों को अब लागत डूबने की चिंता सताने लगी है. कृषि विभाग के अनुसार 1.20 लाख हेक्टेयर लक्ष्य के मुकाबले अब तक केवल 50 से 55 हजार हेक्टेयर में बुवाई हुई है. विशेषज्ञों ने समय पर बारिश नहीं होने पर उत्पादन में भारी गिरावट की आशंका जताई है. किसानों ने प्रशासन से मैदानी सर्वे कर राहत और सिंचाई व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है. कम पैदावार का असर ग्रामीण रोजगार और स्थानीय बाजारों पर भी पड़ सकता है. कर्ज लेकर खेती करने वाले किसानों के सामने आर्थिक संकट गहराने का खतरा है. अब पूरे क्षेत्र की उम्मीद केवल अच्छी बारिश पर टिकी हुई है. यदि मानसून जल्द नहीं सक्रिय हुआ तो खेती के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है.

अस्पताल के सामने जाम नाली, स्वच्छता व्यवस्था पर उठे सवाल

नारायणपुर. जिले के छोटेडोंगर अस्पताल के सामने महीनों से जाम नाली मरीजों और परिजनों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है. प्लास्टिक की बोतलों और कचरे से भरी नाली के कारण गंदे पानी का निकास पूरी तरह प्रभावित हो रहा है. रुके हुए पानी से बदबू और मच्छरों की समस्या लगातार बढ़ रही है. मरीजों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद अब तक सफाई नहीं कराई गई. अस्पताल जैसे संवेदनशील परिसर के सामने ऐसी स्थिति जनस्वास्थ्य पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन और संबंधित विभागों के बीच समन्वय का अभाव दिखाई देता है. स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि लंबे समय तक पानी जमा रहने से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है. अस्पताल में इलाज कराने आने वाले लोगों को स्वच्छ वातावरण मिलना प्राथमिक जिम्मेदारी है. ग्रामीणों ने तत्काल सफाई अभियान और नियमित निगरानी की मांग की है. साथ ही प्लास्टिक कचरे के सुरक्षित निपटान की व्यवस्था करने की भी आवश्यकता बताई गई है. स्वच्छता केवल अभियान का विषय नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सुरक्षा का आधार है. अब देखना होगा कि जिम्मेदार विभाग इस समस्या का स्थायी समाधान कब तक करते हैं.

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