कुंदन कुमार, पटना। AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने पटना एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत के दौरान प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं और नियमित रूप से रिक्तियां न निकलने पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि छात्र लंबे समय से अपनी जायज मांगों को लेकर सड़कों पर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन सरकार इन गंभीर मुद्दों को राजनीतिक चश्मे से देखने की कोशिश कर रही है। सरकार को छात्रों की समस्याओं से किनारा करने के बजाय उनके सवालों के ठोस जवाब देने चाहिए।

​कानून-व्यवस्था और सत्ता के दोहरे मापदंड पर सवाल

​स्वतंत्र भारद्वाज और निशु आजाद से जुड़े विवादित मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए नेहा बोरा ने राज्य की कानून-व्यवस्था और पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर कड़े सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा समय में आम नागरिकों और सत्ता के करीबियों के लिए कानून के मानक अलग-अलग तय कर दिए गए हैं। यदि कोई व्यक्ति खुलेआम हिंसा की भाषा बोलता है और खुद को कानूनी कार्रवाई से सुरक्षित होने का दावा करता है, तो यह केवल एक व्यक्ति विशेष का मामला नहीं रह जाता, बल्कि यह आम जनता की सुरक्षा पर एक बड़ा संकट बन जाता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि स्वतंत्र भारद्वाज ने जिन राजनीतिक दिग्गजों का नाम लेकर खुद को उनका बड़ा भाई बताया है, अब उन नेताओं की नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वे इस संवेदनशील मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट करें।

​वित्त रहित शिक्षा और प्रदर्शनकारियों की दमनकारी नीति

​बिहार में वित्त रहित शिक्षा के मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों और छात्रों के आंदोलन पर भी नेहा बोरा ने सरकार को आड़े हाथों लिया। शिक्षा मंत्री द्वारा आंदोलनकारियों को कांग्रेस पार्टी से जुड़ा हुआ बताने के बयान पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शन करने वाला व्यक्ति किसी राजनीतिक दल से ताल्लुक रखता है या नहीं, यह इस बात से कहीं अधिक गौण है कि उसकी मांगें कितनी जायज हैं। यदि छात्र और शिक्षक अपनी बुनियादी और वैध मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं, तो सरकार का काम उनकी आवाज को प्रशासनिक या राजनीतिक दमन से दबाना नहीं, बल्कि उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान निकालना होना चाहिए।