लखनऊ. यूपी की सियासत में एक बार फिर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के मुद्दा गरमा गया है. सीएम योगी ने विधानसभा में शंकराचार्य को लेकर बयान दिया था, जिसे लेकर सियासी घमासान मच गया है. अब इस मामले सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव का बयान सामने आया है. अखिलेश यादव ने एक्स पर पोस्ट कर सीएम योगी के बयान पर करारा पलटवार किया है. उन्होंने कहा, पहन ले कोई जैसे भी ‘चोले’ पर उसकी वाणी पोल खोले.

इसे भी पढ़ें- कमीशन तले सेट है UP का सिस्टम! बड़ी गंडक नदी का सीना चीरकर रेत निकाल रहे माफिया, जीरो टॉलरेंस का ‘जीरो’ असर

आगे अखिलेश यादव ने कहा, परम पूज्य शंकराचार्य जी के बारे में घोर अपमानजनक अपशब्द बोलना, शाब्दिक हिंसा है और पाप भी. ऐसा कहने वाले के साथ-साथ उनको भी पाप पड़ेगा, जिन्होंने चापलूसी में मेजें थपथपाई हैं. जब भाजपा के विधायक सदन के बाहर जाएंगे और जनता का सामना करेंगे तो जनता सड़क पर उनका सदन लगा देगी. जो महाकुंभ की मौतों पर सच्चे आंकड़े नहीं बताते हैं, कैश में मुआवज़ा देकर उसमें भी भ्रष्टाचार का रास्ता निकाल लेते हैं, जिन तक मुआवजा नहीं पहुंचा, उनका पैसा कहां गया, ये नहीं बताते हैं. अपने ऊपर लगे मुक़दमे हटवाते हैं वो किसी और के ‘धर्म-पद’ पर सवाल उठाने का नैतिक अधिकार नहीं रखते हैं.

इसे भी पढ़ें- गलती किसी और की, भुगते कोई और…12वीं बोर्ड परीक्षा नहीं दे पाएंगे 700 छात्र, विभागीय लापरवाही से बच्चों का साल बर्बाद, जिम्मेदार कौन?

आगे अखिलेश यादव ने ये भी कहा कि अपने बयान में उन्होंने ‘क़ानून का शासन’ बोल दिया, जैसे ही इस बात पर उनका ध्यान जाएगा वो ‘विधि का शासन’ बोलने के लिए क्या दुबारा सदन बुलाएंगे या इसके लिए एक टांग पर खड़े होकर ‘लड़खड़ाता प्रायश्चित’ करेंगे. जब इंसान नहीं, अहंकार बोलता है तो यही होता है. अहंकार संस्कार को विकार में बदल देता है. वो व्यक्ति समाज में मान-सम्मान खो देता है, जिसके बारे में ये कहावत प्रचलित हो जाती है कि ’जब मुंह खोला, तब बुरा बोला!’

इसे भी पढ़ें- नई पार्टी बनाएंगे अलंकार अग्निहोत्री, कहा- सवर्णों के हितों की अनदेखी की गई, तो वे अपनी राजनीतिक शक्ति के माध्यम से जवाब देंगे

आगे उन्होंने कहा, ‘हाता नहीं भाता’ का ये विस्तारित रूप है, यही सच्ची सच्चाई है. जिस समाज के खिलाफ रहकर उन्होंने हमेशा अपनी नफ़रत की राजनीति की है, उसे धर्म के मामले में भी अपमानित-पराजित करने का ये उनका अंहकार है. इनका बस चले तो जो विवादित फ़िल्म आई है, उसका नाम बदले बिना ही रिलीज भी कर दें और टैक्स फ्री भी कर दें. अगले चुनाव में वो समाज एक-एक वोट उनके ख़िलाफ़ डालकर अपने अपमान और उनके प्रदेश अध्यक्ष के नोटिस का सही जवाब देगा, उनकी सरकार हटाकर नई सरकार बनाएगा फिर इत्मीनान-आराम से मिलजुलकर बेधड़क दाल-बाटी खाएगा. शंकराचार्य जी पर दिया गया अभद्र बयान सदन में हमेशा के लिए दर्ज़ हो गया है. उनके इस बयान को हम निंदनीय कहें तो निंदनीय शब्द को भी निंदनीय महसूस होगा.