पटना। राजधानी में नीट छात्रा के साथ दुष्कर्म और मौत मामले में मुख्य आरोपी मनीष रंजन की किस्मत का फैसला आज होगा। राजधानी की बेऊर जेल में पिछले 43 दिनों से बंद मनीष की जमानत याचिका पर अदालत में सुनवाई होनी है। जहांगीराबाद एक ओर आरोपी पक्ष राहत की उम्मीद कर रहा है, वहीं पीड़ित परिवार जमानत का पुरजोर विरोध करने के लिए जहानाबाद से पटना पहुंच चुका है।
रसूख, चुनावी साख और पुलिस की देरी
पुलिस जांच में मनीष के रसूख और संदिग्ध गतिविधियों के चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। रिकॉर्ड के अनुसार, मनीष के पास दो अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों (मखदुमपुर और कुम्हरार) के फर्जी वोटर आईडी कार्ड मिले हैं। बताया जा रहा है कि वह अपने पैतृक गांव से मुखिया का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा था। उसके रसूख का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि छात्रा की मौत के 3 दिन बाद तक पुलिस ने उसे छुआ तक नहीं। साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका के बाद ही उसकी गिरफ्तारी संभव हो सकी।
कोर्ट में केस डायरी और पुलिस की भूमिका
आज की सुनवाई में पटना पुलिस की केस डायरी सबसे निर्णायक भूमिका निभाएगी। अदालत यह देखेगी कि पुलिस ने जांच में मनीष के खिलाफ क्या सबूत जुटाए हैं। पीड़ित परिवार के वकील जमानत को रोकने के लिए ठोस दलीलें पेश करेंगे, ताकि जांच प्रक्रिया प्रभावित न हो।
CBI की भूमिका पर सबकी नजर
मामले में CBI की एंट्री के बाद सस्पेंस और गहरा गया है। अब सवाल यह है कि क्या सीबीआई मनीष रंजन को रिमांड पर लेने के लिए कोर्ट में अर्जी दाखिल करेगी? आज की सुनवाई के दौरान इस पर भी स्थिति साफ होने की उम्मीद है।
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