नागपुर में शनिवार को सोलर ग्रुप द्वारा ‘सोलर रोबोटिक्स और यूएवी विनिर्माण परियोजना’ (Solar Robotics and UAV Manufacturing Project) का भूमिपूजन किया गया. यह भूमिपूजन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के हाथों संपन्न हुआ. इसी परियोजना के माध्यम से अगले साल तक ऐसा पहला रोबोट तैयार होगा, जो भारत की सीमा पर माइनस 40 डिग्री की कड़ाके की ठंड में भी गश्त करने में सक्षम होगा. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शनिवार को नागपुर में सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (SDAL) द्वारा स्थापित किए जाने वाले यूएवी और रोबोट निर्माण संयंत्र के भूमिपूजन कार्यक्रम में हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री की इस बात की पुष्टि नागपुर के सोलर ग्रुप के अध्यक्ष सत्यनारायण नुवाल ने की है.

नागपुर में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस के यूएवी और रोबोट निर्माण संयंत्र का भूमिपूजन किया। उन्होंने कहा कि भविष्य में भारत की सीमाओं पर रोबोट सैनिक तैनात किए जा सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस तरह चीन अपनी सीमाओं पर रोबोट तैनात कर रहा है, उसी तरह भारत भी जल्द ही अपनी सीमाओं पर रोबोट सैनिक तैनात करेगा। इन रोबोट का निर्माण नागपुर में ही किया जाएगा। यह परियोजना नागपुर स्थित निजी रक्षा कंपनी SDAL द्वारा मिहान-SEZ क्षेत्र में स्थापित की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत के सैनिक चीन सीमा और सियाचिन ग्लेशियर जैसी जगहों पर तैनात रहते हैं। वहां तापमान माइनस 40 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है। पहले चीन की ओर भी सैनिक तैनात रहते थे, लेकिन पिछले तीन-चार महीनों से भारतीय सैनिकों को सामने चीनी सैनिकों के बजाय रोबोट दिखाई दे रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने आगे यह भी कहा कि युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। जल्द ही भारत भी अपनी सीमाओं पर ऐसे रोबोट तैनात करेगा। वहीं इस अवसर पर केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि नागपुर तेजी से एक बड़े डिफेंस हब के रूप में उभर रहा है। भारत का उद्देश्य किसी अन्य देश पर आक्रमण करना नहीं, बल्कि शांति बनाए रखने के लिए खुद को मजबूत बनाना है।

इतना ही नहीं, दुनिया का सबसे अनोखा एंटी-ड्रोन सिस्टम अगले कुछ ही महीनों में चालू होने की संभावना है. उन्होंने बताया कि अगले चार-पांच महीनों में भारत में ‘भार्गवास्त्र’ नामक एक ऐसी पहला और अनूठा एंटी-ड्रोन सिस्टम सक्रिय होने जा रहा है, जो विकसित देशों के पास मौजूद सिस्टम से भी अलग और खास होगा. दुश्मन के ड्रोन हमलों को नाकाम करने के लिए इससे एक साथ साठ छोटी लेकिन अचूक मिसाइलें दागी जा सकेंगी.

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