रोहित कश्यप, मुंगेली l मुंगेली में कलेक्टर कार्यालय से जुड़ा एक मामला सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है, जिसने प्रशासन और आम लोगों के बीच बहस छेड़ दी है। वायरल पोस्ट्स और दावों में कहा जा रहा है कि कलेक्टर कुंदन कुमार ने छत्तीसगढ़ी भाषा में लिखे गए आवेदन को सार्वजनिक रूप से फेंक दिया। इस घटना को स्थानीय भाषा और पहचान के अपमान के रूप में पेश किया जा रहा है, जिसके चलते कई यूजर्स और संगठनों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

सोशल मीडिया पर बवाल
सोशल मीडिया पर चल रहे दावों के मुताबिक, यह आवेदन जनगणना में छत्तीसगढ़ी भाषा को शामिल करने की मांग को लेकर दिया गया था। आरोप है कि आवेदन देने पहुंचे लोगों के साथ न सिर्फ असम्मानजनक व्यवहार हुआ, बल्कि उनकी बात भी नहीं सुनी गई। इन दावों ने देखते ही देखते व्यापक नाराजगी को जन्म दिया और मामला स्थानीय बनाम बाहरी अधिकारी की बहस तक पहुंच गया।

प्रशासन ने आरोपों को किया खारिज
हालांकि, जिला प्रशासन ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। प्रशासन के अनुसार, आवेदन देने पहुंचे कुछ लोग, जो स्वयं को जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के कार्यकर्ता बता रहे थे, कलेक्टर कार्यालय में अनुचित व्यवहार करते हुए बिना पूर्व अनुमति के वेटिंग एरिया में बैठ गए और नारेबाजी शुरू कर दी। आरोप है कि इस दौरान स्टाफ के साथ बहस हुई और कलेक्टोरेट परिसर में भीड़ इकट्ठा करने की कोशिश की गई, जिससे शासकीय कार्य प्रभावित हुए।

मामले में की गई पुलिस से शिकायत
इसी घटनाक्रम को लेकर कलेक्टर कार्यालय के कर्मचारियों द्वारा सिटी कोतवाली में लिखित शिकायत भी दी गई है। शिकायत में उल्लेख किया गया है कि 24 अप्रैल 2026 को दोपहर लगभग 12:15 से 1:00 बजे के बीच कुछ अज्ञात असामाजिक तत्वों ने कलेक्टर कक्ष के बाहर हो-हल्ला और नारेबाजी की। इससे कार्यालय में कार्यरत कर्मचारियों और आम नागरिकों को असहजता और असुरक्षा का अनुभव हुआ। शिकायत में यह भी कहा गया है कि यह गतिविधि सुनियोजित तरीके से भीड़ इकट्ठा कर कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने के उद्देश्य से की गई, जिसकी सीसीटीवी फुटेज भी मौजूद है।

प्रशासन का कहना है कि कलेक्टर ने आवेदन को विधिवत स्वीकार करने और उस पर नियमानुसार विचार करने की बात कही थी, न कि उसे फेंका गया। अधिकारियों के मुताबिक, मौके पर मौजूद राजस्व और पुलिस अधिकारियों ने स्थिति को संभाला, ज्ञापन लिया गया और संबंधित लोगों को समझाकर वापस भेजा गया। साथ ही, पूरे मामले की सूचना पुलिस को भी दे दी गई है और आगे की कार्रवाई की बात कही गई है।
प्रशासन ने तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने का लगाया आरोप
प्रशासन ने यह भी आरोप लगाया है कि घटना के बाद कुछ लोगों ने तथ्यों को तोड़-मरोड़कर सोशल मीडिया पर फैलाया, जिससे भ्रम की स्थिति बनी। वहीं, दूसरी ओर सोशल मीडिया पर अब भी कलेक्टर के व्यवहार को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
अब यह मामला दो अलग-अलग दावों के बीच खड़ा है—एक तरफ सोशल मीडिया का आरोप, दूसरी ओर प्रशासन की आधिकारिक सफाई। ऐसे में सच्चाई क्या है, यह जांच या स्पष्ट प्रमाणों के बाद ही पूरी तरह सामने आ पाएगा। फिलहाल, यह घटनाक्रम इस बात का उदाहरण बन गया है कि किस तरह एक प्रशासनिक घटना, डिजिटल दौर में जनभावनाओं का बड़ा मुद्दा बन सकती है।
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