लखनऊ. पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य एक बार फिर अपने विवादित बयान को लेकर चर्चा में हैं. इस बार उन्होंने राम मंंदिर को लेकर बयान दिया है. स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा, ‘करोड़ों-करोड़ों रुपये लुटेरे लूट ले गए. राम के मंदिर से लूट ले गए, राम के दरबार से लूट ले गए, सोना-चांदी भी ले गए. लेकिन भगवान राम उन लुटेरों को सजा नहीं दे पाए. जो अपने मंदिर की रक्षा नहीं कर पाए, दूसरों की क्या करेंगे.’ हालांकि, इससे पहले भी वे अपने विवादित बयानों को लेकर चर्चा में रह चुके हैं.
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पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने इससे पहले भी ऐसा बयान चुके हैं. साल 2023 में स्वामी प्रसाद मौर्य ने रामचरितमानस पर टिप्पणी की थी, उन्होंने रामचरितमानस की कुछ चौपाइयों पर आपत्ति जताते हुए उन्हें दलितों, महिलाओं और पिछड़ों के खिलाफ बताया था. उनके इस बयान के बाद प्रदेश भर में विरोध प्रदर्शन हुए और कई एफआईआर भी दर्ज हुईं.
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इसके साथ ही एक बार स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा था कि हिंदू कोई धर्म नहीं, बल्कि एक धोखा है. वहीं उन्होंने हिंदू राष्ट्र की मांग करने वालों को देशद्रोही बताया था. इसके अलावा उन्होंने कहा था कि यदि हिंदू राष्ट्र की मांग हो सकती है तो अन्य अलगाववादी मांगें भी उठ सकती हैं.
जांच के घेरे में ट्रस्ट की भूमिका
जांच के दौरान जो बातें सामने आई उसमें मंदिर में चढ़ावे की गिनती और उससे जुड़े कर्मचारियों की तैनाती में बैंक, आउटसोर्सिंग कंपनी और ट्रस्ट की भूमिका जांच के घेरे में है. बड़ा खुलासा ये है कि बैंक ने कर्मचारियों को कंपनी के जरिए आउटसोर्सिंग पर रखा था, लेकिन कर्मचारी ट्रस्ट की ओर से तय किए गए थे. यानी जिन लोगों को चढ़ावे की गिनती जैसे संवेदनशील काम में लगाया गया, वे या तो किसी पदाधिकारी के परिचित बताए जा रहे हैं या उनसे जुड़ा नेटवर्क रखते थे.
सबसे गंभीर सवाल यह है कि चढ़ावा गिनने वाले कर्मचारियों का न तो उचित सत्यापन हुआ, न नियमित तलाशी, न प्रभावी निगरानी. ट्रस्ट के कर्मचारी आईकार्ड लगाकर परिसर में आसानी से घूमते थे. सुरक्षा में पुलिस और अर्द्धसैनिक बल तैनात होने के बावजूद ट्रस्ट कर्मियों की आवाजाही पर वैसी सख्ती नहीं दिखी.

