चंडीगढ़। आने वाले मौसम को लेकर पंजाब की सरकार अभी से अलर्ट मोड में आ गई है. मानसून से पहले बाढ़ के खतरे को देखते हुए राज्य सरकार ने तैयारियां तेज कर दी है. इसके लिए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने उच्चस्तरीय बैठक में राज्य की बाढ़ प्रबंधन व्यवस्था की समीक्षा की. इस दौरान नदियों और ड्रेनों की सफाई के लिए अत्याधुनिक एम्फीबियस मशीनें खरीदने को मंजूरी दे दी. उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य समय रहते ठोस कदम उठाकर जानमाल और फसलों को नुकसान से बचाना है. रूपनगर जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. मुख्यमंत्री ने बताया कि यहां करीब 20 गांव पिछले साल बाढ़ से प्रभावित हुए थे, जिसके मद्देनजर इस बार रोकथाम के लिए व्यापक कदम उठाए गए हैं.

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बार बाढ़ से लोगों को नुकसान ना हो इसकी योजना बनाई जा रही है. इसके लिए मशीन काम आएगी. ये मल्टीपर्पज मशीनें बहते पानी में भी काम करने में सक्षम हैं और गहराई तक डीसिल्टिंग कर सकती हैं. इससे नदियों, नालों और जलाशयों की सफाई अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगी. उन्होंने संबंधित विभागों को मशीनों की खरीद के लिए विस्तृत योजना तैयार करने के निर्देश दिए. मान ने कहा कि फिनलैंड दौरे के दौरान उन्होंने इन मशीनों का सफल उपयोग देखा था, जो अब पंजाब में भी बाढ़ प्रबंधन को मजबूत बनाएंगी. जल प्रबंधन पर मुख्यमंत्री ने भाखड़ा डैम के जलस्तर का जिक्र किया. उन्होंने बताया कि 26 अप्रैल को जलस्तर 1594 फीट दर्ज किया गया, जबकि अधिकतम क्षमता 1680 फीट है. उन्होंने निर्देश दिए कि एक जून से शुरू होने वाली धान की बुआई को ध्यान में रखते हुए नहरों में सुचारू रूप से पानी छोड़ने की योजना बनाई जानी चाहिए.
सफाई कार्य हुआ तेज
मुख्यमंत्री भगवत मान ने कहा कि 31 मई तक राज्य में पुराने खालों की मुरम्मत करने का काम पूरा हो जाएगा. नए खालों का निर्माण भी किया जाएगा. बैठक में जल संसाधन विभाग के कार्यों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने संतोष जताया. राज्यभर में ड्रेनों की सफाई तेजी से जारी है और बाढ़ संभावित इलाकों में डीसिल्टिंग का काम काफी हद तक पूरा हो चुका है. इससे मानसून के दौरान संभावित खतरे को कम करने में मदद मिलेगी. बैठक में कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस, बरिंदर कुमार गोयल, सांसद मलविंदर सिंह कंग और मुख्य सचिव केएपी सिन्हा समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे.
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