मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग के कारण देश की एयरलाइंस कंपनियां मुश्किल में हैं। एअर इंडिया, इंडिगो और स्पाइसजेट जैसी बड़ी एयरलाइन कंपनियों के संगठन फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (FIA) ने कहा- एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) महंगा होने से उनका ऑपरेशन कॉस्ट 20% तक बढ़ गया है। इसलिए FIA ने इस बारे में नागरिक उड्डयन मंत्रालय को रिपोर्ट भेजकर एक्साइज ड्यूटी और वैट घटाने की मांग की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि, महंगा फ्यूल होने के कारण घरेलू एयरलाइंस का कामकाज जारी रखना मुश्किल हो गया है। हालात इतने खराब हैं कि कंपनियां ऑपरेशंस रोकने या अपने विमानों को खड़ा करने की कगार पर पहुंच गई हैं। FIA ने सरकार से एक्साइज ड्यूटी और वैट घटाने की मांग की है, ताकि एविएशन सेक्टर को हो रहे घाटे की भरपाई की जा सके।
जंग की वजह से 45.5% तक महंगा हुआ कच्चा तेल
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतें 28 फरवरी से अब तक 45.5% बढ़ गई हैं। हालांकि, सरकार ने घरेलू उड़ानों के लिए ATF की कीमतों में बढ़ोतरी को 25% पर कैप कर दिया था। इसके चलते अप्रैल में तेल कंपनियों (OMCs) ने घरेलू ATF के दाम सिर्फ 9.2% ही बढ़ाए, लेकिन इंटरनेशनल ऑपरेशंस के लिए यह बढ़ोतरी बहुत ज्यादा रही। वहीं FIA के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय और घरेलू सेक्टर में फ्यूल की कीमतों के भारी अंतर ने एयरलाइंस के नेटवर्क को वित्तीय रूप से अस्थिर बना दिया है। पहले एयरलाइंस के कुल ऑपरेशनल खर्च में फ्यूल का हिस्सा 40% होता था, जो बढ़कर 60% तक पहुंच गया है।
इंटरनेशनल फ्लाइट्स के लिए फ्यूल ₹73 लीटर महंगा हुआ
डेटा के मुताबिक, घरेलू ATF की कीमतों में बढ़ोतरी को ₹15 प्रति लीटर पर सीमित रखा गया, जबकि इंटरनेशनल ATF के दाम ₹73 प्रति लीटर तक बढ़ गए। ग्लोबल मार्केट में ATF की कीमतें 87.24 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर अब 235 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। रेटिंग एजेंसी इकरा (ICRA) ने भी अनुमान जताया है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भविष्य में ATF के दाम और बढ़ा सकती हैं।
फेडरेशन ने सरकार के सामने तीन मुख्य मांगें रखी हैं
- एटीएफ पर लागू 11% एक्साइज ड्यूटी को फिलहाल सस्पेंड किया जाए।
- प्रमुख राज्यों में एविएशन फ्यूल पर लगने वाला वैट (VAT) कम किया जाए।
- कोविड-19 के बाद 2022 में शुरू किया गया ‘क्रूड ब्रेंट प्राइसिंग मैकेनिज्म’ दोबारा लागू हो।
मंत्रालय दे सकता है 5,000 करोड़ का राहत पैकेज
रेपोर्ट्स के मुताबिक, हालात को देखते हुए नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने कुछ कदम उठाए हैं। अप्रैल 2026 से 3 महीने के लिए घरेलू एयरलाइंस के लैंडिंग और पार्किंग शुल्क में 25% की कटौती की गई है। इसके अलावा, केंद्र सरकार एयरलाइन सेक्टर के लिए 5,000 करोड़ रुपए की ‘इमरजेंसी एयरलाइन क्रेडिट स्कीम’ लाने पर भी विचार कर रही है, जिससे कंपनियों को कैश फ्लो की समस्या से राहत मिल सके।
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