अभिषेक सेमर, तखतपुर। क्षेत्र के युवाओं को खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू किया गया मिनी स्टेडियम निर्माण कार्य अब तक पूरा नहीं हो सका है। कांग्रेस शासनकाल में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा दी गई इस सौगात का लाभ खिलाड़ियों को नहीं मिल पा रहा है। करीब दो वर्ष बीत जाने के बावजूद प्रोजेक्ट अधूरा पड़ा है, जिससे स्थानीय खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

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जानकारी के अनुसार जनपद पंचायत क्षेत्र के ग्राम पंचायत सफरी भाटा में जिला खनिज न्यास (DMF) मद से लगभग 20 लाख रुपये की लागत से मिनी स्टेडियम का निर्माण प्रस्तावित था। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं को खेल के प्रति प्रोत्साहित करना और उन्हें बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना था, लेकिन वर्तमान में यह योजना अधूरी और उपेक्षित नजर आ रही है।

आधा-अधूरा निर्माण, मैदान में उगी झाड़ियां

सूत्रों के मुताबिक, निर्माण कार्य के लिए ग्राम पंचायत को 10 लाख रुपये की अग्रिम राशि जारी की जा चुकी है। इस राशि से केवल दर्शक दीर्घा का आंशिक निर्माण किया गया है, जबकि मैदान का समतलीकरण तक नहीं हो सका है। स्थिति यह है कि मैदान में झाड़-झंखाड़ उग आए हैं, जो कार्य में लापरवाही को दर्शाते हैं।

स्थानीय लोग बोले- स्टेडियम में अक्सर लटका रहता है ताला

स्थानीय लोगों का कहना है कि मिनी स्टेडियम परिसर में अक्सर ताला लटका रहता है। इससे साफ है कि जिस सुविधा का लाभ खिलाड़ियों को मिलना था, वह अभी तक उपलब्ध नहीं हो सका है। युवाओं के लिए तैयार की जा रही यह परियोजना अब सवालों के घेरे में है।

मिलीभगत के आरोप, उठ रहे सवाल

क्षेत्र में यह भी आरोप लग रहे हैं कि अग्रिम राशि निकालने के बावजूद निर्माण कार्य अधूरा छोड़ दिया गया है। इससे संबंधित अधिकारियों, ठेकेदारों और ग्राम पंचायत एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। मामला कहीं न कहीं मिलीभगत की ओर इशारा करता नजर आ रहा है।

अब सवाल यह है कि क्या संबंधित विभाग ने निर्माण एजेंसी, इंजीनियर या ग्राम पंचायत को अब तक कोई नोटिस जारी किया है? यदि नहीं, तो अधूरे कार्य और खर्च की गई राशि की वसूली के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे?

प्रशासन की भूमिका पर नजर

लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद जब खिलाड़ियों को सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं, तो अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिला पंचायत सीईओ और बिलासपुर कलेक्टर इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं और अधूरा पड़ा मिनी स्टेडियम कब तक पूरा होता है।

इस संबंध में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) संदीप अग्रवाल ने कहा कि यदि निर्माण कार्य अधूरा पाया जाता है, तो इसकी जांच कराई जाएगी। साथ ही, कार्य में देरी या लापरवाही पाए जाने पर संबंधित एजेंसी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

वहीं, संबंधित एसडीओ और इंजीनियर से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन कॉल रिसीव नहीं होने के कारण उनका पक्ष सामने नहीं आ सका।

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