रांची। झारखंड में नक्सलवाद अब अपने अंतिम दौर में पहुंचता नजर आ रहा है। राज्य पुलिस का दावा है कि सक्रिय नक्सलियों की संख्या अब बेहद कम रह गई है और उनके पास पहले जैसी क्षमता नहीं बची है कि वे सुरक्षा बलों का प्रभावी मुकाबला कर सकें। लगातार अभियान, मुठभेड़ों और हथियारों की बरामदगी ने नक्सली नेटवर्क को काफी कमजोर कर दिया है।

15 वर्षों में बड़ी सफलता
झारखंड पुलिस के अनुसार, पिछले 15 वर्षों के दौरान नक्सल विरोधी अभियानों में बड़ी सफलता मिली है। इस अवधि में पुलिस ने 1000 से अधिक ऐसे हथियार बरामद किए हैं, जो पहले नक्सलियों द्वारा पुलिस बल से लूटे गए थे। इसके अलावा नक्सलियों के पास मौजूद हजारों अन्य हथियार भी जब्त किए गए हैं, जिससे उनकी मारक क्षमता में भारी कमी आई है।

हथियारों की जब्ती बनी बड़ी वजह
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नक्सलियों के कमजोर होने की सबसे बड़ी वजह उनके हथियारों का लगातार जब्त होना है। पहले नक्सली पुलिस पर हमले के बाद हथियार लूटकर अपने नेटवर्क को मजबूत करते थे और उन्हीं हथियारों का इस्तेमाल आगे की वारदातों में करते थे। अब सुरक्षा बलों की रणनीति और लगातार कार्रवाई के चलते यह सिलसिला लगभग समाप्त हो चुका है।

सुरक्षा बलों का बढ़ा दबदबा
एक समय झारखंड के कई इलाकों में नक्सलियों का प्रभाव था, लेकिन अब सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई से स्थिति बदल चुकी है। पुलिस का कहना है कि नक्सली संगठन अब बिखर चुके हैं और उनका प्रभाव पहले की तुलना में काफी सीमित रह गया है। राज्य में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लगातार अभियान जारी है, ताकि शेष बचे उग्रवादियों के नेटवर्क को भी पूरी तरह खत्म किया जा सके।