अजय कुमार शास्त्री, बेगूसराय। जिले के तेघड़ा से सामने आई एक तस्वीर ने अब सियासी और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी है। तस्वीर में केंद्रीय मंत्री एवं बेगूसराय सांसद गिरिराज सिंह के साथ तेघड़ा विधायक रजनीश कुमार नजर आ रहे हैं, जबकि तस्वीर को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा उस कुर्सी की हो रही है, जिस पर विधायक बैठे दिखाई दे रहे हैं।
जानें क्या है पूरा मामला?
दरअसल, कल रविवार 6 सितंबर को तेघड़ा अनुमंडल कार्यालय में बाढ़ की स्थिति को लेकर समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने अधिकारियों से बाढ़ प्रभावित इलाकों की स्थिति की जानकारी ली और राहत-बचाव व्यवस्था को लेकर कई निर्देश दिए। बैठक में तेघड़ा विधायक रजनीश कुमार, बछवाड़ा विधायक सुरेंद्र मेहता, एसडीएम नीरज कुमार सिन्हा, एसडीपीओ कृष्ण कुमार समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद थे।
बैठक में बाढ़ प्रभावित इलाकों में निगरानी बढ़ाने, जरूरत के अनुसार कम्युनिटी किचेन शुरू करने, लोगों को शुद्ध पेयजल और शौचालय की सुविधा उपलब्ध कराने तथा मेडिकल कैंप की व्यवस्था की समीक्षा की गई। किसानों को खाद की किल्लत नहीं हो, इसके लिए भी अधिकारियों को निर्देश दिए गए।
सोशल मीडिया चर्चा का विषय बनी तस्वीर
अब इसी बैठक की तस्वीर सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। तस्वीर को लेकर कुछ लोग प्रशासनिक प्रोटोकॉल और जनप्रतिनिधियों के बैठने की व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में ऐसा कोई आधिकारिक बयान नहीं है कि विधायक के एसडीएम की कुर्सी पर बैठने को लेकर कोई विवाद या कार्रवाई हुई है। यानी तस्वीर वायरल है, चर्चा तेज है, हालांकि कुर्सी को लेकर विवाद की आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
रोहिणी ने सम्राट सरकार पर साधा निशाना
मामले को लेकर अब सियासी बयानबाजी भी देखने को मिलने लगी है। लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने इस घटनाक्रम को लेकर बिहार की सम्राट सरकार पर जमकर निशाना साधा है। रोहिणी ने सोशल मीडिया एक्स पर वायरल इस तस्वीर को साझा करते हुए लिखा कि, सम्राट शासन में सत्ताधारी दल के लोगों को हर नियम-कायदे के उल्लंघन की खुली छूट प्राप्त है।
बिहार में प्रशासन पर राजनीतिक दबाव हावी- रोहिणी
रोहिणी आचार्य ने कहा कि, यह तस्वीर लोकशाही और प्रशासनिक मर्यादा के खुलेआम उल्लंघन को दर्शाती है। सरकारी अधिकारी (SDM) की कुर्सी पर भाजपा विधायक का बैठना प्रशासनिक प्रोटोकॉल और नियमों का सीधा उल्लंघन है और ये शासन – प्रशासन और सार्वजनिक मर्यादा के मद्देनजर बेहद चिंता का विषय है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में नौकरशाही और राजनीति के बीच स्पष्ट सीमाएं निर्धारित हैं।
उन्होंने कहा कि, भाजपा विधायक की ऐसी मनमानी से यह स्पष्ट है कि सम्राट सरकार के शासनकाल में बिहार में प्रशासनिक तंत्र पर राजनीतिक दबाव हावी है और सत्ताधारी दल के लोगों को हर नियम- कायदे-प्रोटोकॉल के उल्लंघन की खुली छूट प्राप्त है।
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