कुंडली (सोनीपत). पेपर मिलों की ओर से कागज की कीमतों में अचानक और एक साथ की जा रही बढ़ोतरी के विरोध में उत्तर भारत के Corrugated Box Manufacturers ने संयुक्त मोर्चा खोल दिया है। हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान और दिल्ली की सात क्षेत्रीय एसोसिएशनों ने 12 से 16 अक्टूबर 2026 तक पांच दिनों के लिए पेपर की खरीद का बहिष्कार करने की अपील की है। इस पहल के जरिए पेपर की कीमतों में पारदर्शिता, मूल्य वृद्धि से पहले उचित सूचना और निष्पक्ष व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने की मांग उठाई गई है।

यह निर्णय 9 अक्टूबर को हरियाणा Corrugated Box Manufacturers Association (HCBMA) की ओर से कुंडली, सोनीपत स्थित Kia Auditorium में आयोजित उत्तर भारत की क्षेत्रीय एसोसिएशनों की संयुक्त बैठक में लिया गया। बैठक में Federation of Corrugated Box Manufacturers of India (FCBM) के अध्यक्ष राजेंद्र भाटी समेत विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने पेपर मिलों की मूल्य निर्धारण प्रक्रिया पर चिंता जताई और सरकार से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की।

अचानक बढ़ती कीमतों से Corrugators के मुनाफे पर दबाव : सनी जैन

हरियाणा Corrugated Box Manufacturers Association के अध्यक्ष सनी जैन ने कहा कि बाजार की परिस्थितियों के अनुसार पेपर की कीमतों में बढ़ोतरी होना अपने आप में गलत नहीं है। समस्या तब पैदा होती है, जब बिना किसी पूर्व सूचना के रातोंरात कीमतें बढ़ा दी जाती हैं और कई मिलें एक साथ मूल्य वृद्धि की घोषणा करती हैं।

उन्होंने कहा कि पेपर डीलरों, कॉरुगेटर्स और संबंधित एसोसिएशनों को न तो समय रहते कीमतों में बदलाव की जानकारी मिलती है और न ही भविष्य की संभावित कीमतों को लेकर कोई स्पष्ट अनुमान दिया जाता है। ऐसे में पैकेजिंग उद्योग के लिए उत्पादन और आपूर्ति की योजना बनाना मुश्किल हो जाता है।

सनी जैन के मुताबिक, Corrugated Box Manufacturers पहले से मिले ऑर्डर और ग्राहकों के साथ किए गए व्यावसायिक समझौतों के तहत माल की आपूर्ति करने के लिए प्रतिबद्ध होते हैं। कच्चे माल की कीमत अचानक बढ़ने पर वे न तो तुरंत उत्पादन रोक सकते हैं और न ही हर ग्राहक से तत्काल बढ़ी हुई कीमत वसूल कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि इस स्थिति में कई बार कारोबारियों को बहुत कम मुनाफे या नुकसान पर भी ऑर्डर पूरे करने पड़ते हैं। इससे उद्योग की कार्यशील पूंजी पर दबाव बढ़ता है और कारोबार की आर्थिक स्थिरता प्रभावित होती है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि कॉरुगेटर्स की मांग पेपर मिलों के खिलाफ टकराव की नहीं, बल्कि ऐसी पारदर्शी और पूर्वानुमान योग्य मूल्य निर्धारण व्यवस्था की है, जिससे सभी पक्ष अपने कारोबार की बेहतर योजना बना सकें।

पैकेजिंग उद्योग की अनदेखी नहीं की जा सकती : राजेंद्र भाटी

FCBM के अध्यक्ष राजेंद्र भाटी ने कहा कि उत्तर भारत की सात क्षेत्रीय एसोसिएशनों का एक मंच पर आना उद्योग की साझा समस्याओं के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने देशभर के कॉरुगेटर्स से इस मुद्दे पर एकजुट रहने और संयुक्त अपील का समर्थन करने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा कि Corrugated Packaging Industry देश के विनिर्माण क्षेत्र की महत्वपूर्ण कड़ी है। विभिन्न उद्योगों में तैयार उत्पादों की सुरक्षित पैकेजिंग, भंडारण और परिवहन के लिए कॉरुगेटेड बॉक्स की अहम भूमिका होती है। ऐसे में इस उद्योग की लागत और व्यावसायिक चुनौतियों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

भाटी ने जोर दिया कि जब कच्चे माल की कीमतों में अचानक होने वाले बदलाव से पूरा उद्योग प्रभावित हो रहा है, तो क्षेत्रीय संगठनों और कारोबारियों को साझा मंच से अपनी मांगें उठानी होंगी। सामूहिक प्रयासों के जरिए ही मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता और कारोबार के लिए उचित परिस्थितियों की मांग को प्रभावी ढंग से सामने रखा जा सकता है।

संभावित Cartelisation पर चिंता, सरकार से हस्तक्षेप की मांग

बैठक में पेपर मिलों की ओर से एक साथ कीमतें बढ़ाए जाने की प्रवृत्ति पर भी चिंता व्यक्त की गई। FCBM ने ऐसी मूल्य निर्धारण प्रक्रियाओं पर सवाल उठाए, जिनसे बाजार में प्रतिस्पर्धा की निष्पक्षता और संभावित Cartelisation को लेकर चिंताएं पैदा होती हैं।

कॉरुगेटर्स की प्रमुख मांग है कि पेपर मिलें मूल्य वृद्धि से पहले उचित अग्रिम सूचना दें, अपनी प्राइसिंग पॉलिसी में पारदर्शिता रखें और पेपर डीलरों तथा बॉक्स निर्माताओं को बाजार की संभावित दिशा के बारे में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराएं।

उद्योग का कहना है कि समय पर जानकारी मिलने से कारोबारी कच्चे माल की खरीद, उत्पादन लागत, ऑर्डर की आपूर्ति और ग्राहकों के साथ किए गए समझौतों की बेहतर योजना बना सकेंगे।

FCBM ने कहा कि यदि समन्वित मूल्य वृद्धि और संभावित कार्टेलाइजेशन को लेकर चिंताएं बनी रहती हैं, तो सरकार को प्रभावी कदम उठाने चाहिए। संगठन के अनुसार, वह पहले भी कथित कार्टेलाइजेशन से संबंधित शिकायतें Competition Commission of India (CCI) के समक्ष उठा चुका है।

12 से 16 अक्टूबर तक पेपर खरीद के बहिष्कार की अपील

बैठक में शामिल सभी क्षेत्रीय एसोसिएशनों ने कॉरुगेटर्स से 12 से 16 अक्टूबर 2026 तक पेपर की खरीद का बहिष्कार करने की संयुक्त अपील का समर्थन करने का आह्वान किया। इस पांच दिवसीय पहल का उद्देश्य पेपर की कीमतों में अचानक होने वाली बढ़ोतरी के खिलाफ उद्योग की सामूहिक चिंता को सामने लाना है।

एसोसिएशनों ने स्पष्ट किया कि यह कदम पेपर उद्योग के साथ टकराव बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता, निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा और टिकाऊ व्यावसायिक परिस्थितियों की मांग को मजबूती से उठाने के लिए है।

सात क्षेत्रीय एसोसिएशन एक मंच पर

HCBMA की मेजबानी में आयोजित इस बैठक में उत्तर भारत की सात क्षेत्रीय एसोसिएशनों ने साझा रुख अपनाया। संयुक्त पहल में शामिल संगठनों के नाम हैं:

  • HCBMA — Haryana Corrugated Box Manufacturers Association
  • UPCBMA
  • RCBMA
  • PCBMA
  • UKCBMA
  • HPCBMA
  • NICMA

बैठक का मुख्य संदेश रहा कि उद्योग की समस्याओं का समाधान अलग-अलग प्रयासों के बजाय सामूहिक संवाद, एकजुटता और साझा प्रतिनिधित्व से ही संभव है।