दिल्ली के जंतर-मंतर प्रदर्शन मामले में जेल में बंद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास की जमानत याचिका पर मंदिर मार्ग थाने में सुनवाई टलने को लेकर विवाद गहरा गया है. सौरव दास और आशुतोष रांका को 14 अक्टूबर को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था. CJP ने उनकी रिहाई में देरी को लेकर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है.

सौरव दास और आशुतोष रांका की जमानत पर रविवार को सुनवाई तय समय पर SEM के नहीं पहुंचने से टल गई. पार्टी की लीगल हेड रत्ना सिंह ने विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रक्रिया में हुई अत्यधिक देरी पर कड़ी नाराजगी जतायी.

सौरव दास और आशुतोष रांका की जमानत पर रविवार को सुनवाई तय समय पर SEM के नहीं पहुंचने से टल गई. एक्टिविस्ट रत्ना सिंह ने चार जमानतदारों को अस्पष्ट कारणों से खारिज करने का आरोप लगाया. रत्ना सिंह ने विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) के समक्ष प्रक्रिया में हुई अत्यधिक देरी पर कड़ी नाराजगी जताते हुए आरोप लगाया है कि दोनों कार्यकर्ताओं की रिहाई में रोड़े अटकाने के लिए प्रशासनिक हीलाहवाली का सहारा लिया जा रहा है.

सौरव दास और आशुतोष रांका को 14 अक्टूबर को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था. दोनों पर आरोप है कि उन्होंने जंतर-मंतर के बंद गेट को पार कर वहां प्रवेश किया था. रविवार को दोनों की जमानत याचिका पर मंदिर मार्ग थाने में सुनवाई होनी थी.

एक्टिविस्ट रत्ना सिंह ने आरोप लगाया कि अब तक चार जमानतदारों को अस्पष्ट कारणों से खारिज किया गया है. उन्होंने कहा कि प्रदर्शन में शामिल होने के कारण जिन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज है, उन्हें भी आपराधिक पृष्ठभूमि वाला बताया जा रहा है. उन्होंने दिल्ली में SEM अदालतों के कामकाज पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि यह अधिकारों का गलत इस्तेमाल है.

रत्ना सिंह ने बताया कि आशुतोष रांका और सौरव दास की रिहाई के लिए उनके वकील सुबह से मंदिर मार्ग थाने में मौजूद थे. सुनवाई दोपहर 12 बजे होनी थी, लेकिन प्रक्रिया में लगातार देरी हुई. उन्होंने कहा कि वकीलों को यह स्पष्ट जानकारी भी नहीं दी गई कि सुनवाई आखिर कितने बजे होगी.

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