Yogendra Yadav React On Regime Change Controversy: मुख्य चुनाव आयुक्त यानी सीईसी ज्ञानेश कुमार (CEC Gyanesh Kumar) को हटाने और वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) रद्द करने को लेकर शुरू हुआ कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी और इंडिया ब्लॉक (विपक्षी गठबंधन) का प्रदर्शन अब ‘रिजीम चेंज’ तक पहुंच गया है। सीजेपी और राहुल गांधी समेत पूरा विपक्ष अब देश के युवाओं समेत अन्य लोगों से ‘रिजीम चेंज’ (सरकार बदलाव) की अपील कर रहा है। पिछले दिनों  ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन यानी एआईएसए (AISA) अध्यक्ष नेहा बोरा, सीजेपी फाउंडर अभिजीत दिपके और आप नेता व वकील प्रशांत भूषण ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ‘रिजीम चेंज’ करने की हुंकार भरी। प्रशांत भूषण ने तो चीखते और झल्लाते हुए कहा कि ‘रिजीम चेंज’ करके रहेंगे। हालांकि उनके इस दावे को उनके साथी योगेंद्र यादव ने ही नकार दिया है। प्रशांत भूषण के पुराने साथी योगेंद्र यादव ने कहा है कि जनता के बीच अभी ऐसी मांग नहीं है। अति उत्साह से फायदे की बजाय नुकसान होगा। सड़क पर चलने वाले की राय हम से अलग है।

पॉलिटिकल एक्टिविस्ट और स्वराज इंडिया के प्रमुख योगेंद्र यादव ने प्रशांत भूषण समेत-नेहा बोरा समेत उन तमाम लोगों को आईना दिखा दिया है जो चाहते हैं कि सड़क पर आंदोलन के जरिए देश में सत्ता परिवर्तन हो। उन्होंने कहा है कि किसी आंदोलन के नेता को जनता से बस एक कदम आगे रहकर अगुआई करनी चाहिए और मांगें वहीं होनी चाहिए जिसकी आवाज जनता से आ रही है।

दरअसल हाल ही में वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने सीजेपी की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एसआईआर और देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चलाए जा रहे आंदोलन को रेजीम चेंज की लड़ाई बताया था। इसके अलावा सीजेपी के साथ कदम ताल कर रहीं ऑल इंडिया स्टूडेंट्स असोसिएशन की प्रमुख नेहा बोरा ने भी बांग्लादेश के उस हिंसक जेन जी प्रोटेस्ट को रास्ता दिखाने वाला बताया है जिसके जरिए पड़ोसी मुल्क में तख्तापलट किया गया था। भाजपा ने इन नेताओं की बातों को लपक आंदोलन के उद्देश्यों पर सवाल खड़े किए तो सीजेपी प्रमुख अभिजीत दीपके बार-बार सफाई देकर डैमेज कंट्रोल में जुए गए। उन्होंने कहा कि गांधी के रास्ते पर चलकर उनकी मांग सिर्फ निष्पक्ष चुनाव की है, सत्ता परिवर्तन की नहीं।

सड़क पर चलने वाले की राय हम से अलग

इस बीच योगेंद्र यादव नेयूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि नेताओं को अपनी तरफ से इस तरह की मांगें उठाने से बचना चाहिए, जो जनता की आवाज नहीं है। उन्होंने कहा कि हम जैसे हार्डकोर पॉलिटिकल लोगों की राय से दुनिया में परिवर्तन होते तो दो साल पहले हो जाना चाहिए था, एक साल पहले हो जाना चाहिए था। क्यों?’ क्योंकि सड़क पर चलने वाला आम व्यक्ति हमारी राय से उस तरह सहमत नहीं था जो हम होना चाहते हैं। इसलिए मैं बार बार पॉलिटिकल जजमेंट की बात कर रहा हूं।

अति उत्साह में फायदे की बजाय नुकसान

योगेंद्र यादव ने कहा कि किसी आंदोलन का घोषित उद्देश्य क्या होना चाहिए, यह एक पॉलिटिकल जजमेंट का मामला है, जिसमें आप अपनी नहीं, जनता की राय को प्राथमिकता देते हैं। मैं आपको फिर याद दिलाऊंगा कि आंदोलन में आज जो ऊर्जा है वह इस वजह से है क्योंकि मामला पॉलिटिकल पार्टियों और हार्डकोर पॉलिटिकल संगठनों के बाहर निकल आया है। साधारण लोग जुड़ रहे हैं। मैं बार-बार अपने तमाम साथियों से हाथ जोड़कर अपील करूंगा कि उस साधारण व्यक्ति की बात सुनिए। अपने अतिउत्साह में हम करेंगे तो इससे आंदोलन को फायदे की बजाय नुकसान होता है। योगेंद्र यादव ने कहा कि हो सकता है कि आने वाले समय में जनता रेजीम चेंज की मांग करे, लेकिन आज ऐसी मांग नहीं है।

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