पंचकूला । हरियाणा में बिजली वितरण के निजीकरण की दिशा में उठाया गया एक बड़ा कदम वापस ले लिया गया है। गुरुग्राम और नूंह में 25 साल तक बिजली वितरण करने के लिए निजी कंपनी को दिया गया लाइसेंस रद्द कर दिया गया है। हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) ने बुधवार को यह फैसला सुनाया। आयोग के कार्यकारी चेयरमैन मुकेश गर्ग और सदस्य शिव कुमार की पीठ ने इस संबंध में आदेश जारी किए।

इस फैसले के साथ ही गुरुग्राम और नूंह में समानांतर बिजली वितरण व्यवस्था शुरू करने की निजी कंपनी की योजना को झटका लगा है। इस मामले में हरियाणा सरकार ने भी हस्तक्षेप किया था। सरकार ने आयोग को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि राज्य में कहीं भी समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस न दिया जाए और न ही ऐसी व्यवस्था शुरू की जाए।

पहले 25 साल के लिए मिली थी मंजूरी

यह पूरा मामला इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड (EPPL) को दिए गए बिजली वितरण लाइसेंस से जुड़ा है। HERC ने 19 अक्टूबर 2026 को अपने आदेश में कंपनी को गुरुग्राम और नूंह में 25 साल के लिए समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने की मंजूरी दी थी। कंपनी ने 21 अक्टूबर को इसके लिए अपनी सहमति भी दे दी थी।

इसके बाद मामला नया मोड़ ले गया। हरियाणा सरकार ने विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 108 (1) के तहत आयोग को लिखित निर्देश जारी किए। 26 अक्टूबर को जारी इन निर्देशों में सरकार ने राज्य में किसी भी स्थान पर समानांतर वितरण लाइसेंस देने या उसे चालू करने पर रोक लगाने की बात कही।

सरकार ने क्यों किया विरोध?

सरकार की दलील थी कि निजी कंपनी को बिजली वितरण का लाइसेंस देने से सरकारी बिजली वितरण कंपनियों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है। सरकार ने आशंका जताई कि ज्यादा भुगतान करने वाले उपभोक्ता निजी कंपनी की ओर जा सकते हैं। इससे सरकारी बिजली कंपनियों पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है।

सरकार ने किसानों और आम उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले संभावित असर का मुद्दा भी उठाया। उसका कहना था कि निजी वितरण व्यवस्था से क्रॉस-सब्सिडी की मौजूदा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा बिजली निगमों के कर्मचारियों में असंतोष पैदा होने की आशंका भी जताई गई।

कंपनी की सुनवाई की मांग भी खारिज

इस मामले में आयोग ने EPPL की सुनवाई की मांग को भी खारिज कर दिया। इसके बाद कंपनी को दिया गया लाइसेंस रद्द करने का आदेश जारी हुआ।

गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण को लेकर आए इस फैसले से हरियाणा में बिजली के निजीकरण पर फिलहाल ब्रेक लग गया है। अब इन दोनों जिलों में निजी कंपनी को दिए गए 25 साल के लाइसेंस के आधार पर बिजली वितरण नहीं किया जा सकेगा।