रांची में 13वें दिन भी डटे छात्र, सरकार से पहली औपचारिक बातचीत आज; सीबीआई-ईडी जांच और JPSC सुधार समेत तीन बड़ी मांगों पर अड़े आंदोलनकारी
रांची। झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का आंदोलन गुरुवार को 13वें दिन भी जारी है। तेज आंधी और बारिश के बावजूद आंदोलनकारी जयपाल सिंह स्टेडियम में डटे हुए हैं। पहली बार राज्य सरकार ने आंदोलनकारियों से बातचीत की पहल की है। आज छात्र प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात करेगा। इस बैठक को आंदोलन के भविष्य के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
सरकार की ओर से वार्ता के लिए चार सदस्यीय मंत्रिमंडलीय समिति का गठन किया गया है। समिति में सुदिव्य कुमार सोनू, दीपिका पांडेय सिंह, चमरा लिंडा और संजय प्रसाद यादव को शामिल किया गया है। माना जा रहा है कि बैठक में छात्रों की प्रमुख मांगों पर विस्तार से चर्चा होगी।
छात्रों की तीन प्रमुख मांगें
आंदोलनकारी छात्रों ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं—
- वर्तमान परीक्षा एजेंसी द्वारा आयोजित सभी परीक्षाएं रद्द की जाएं।
- कथित परीक्षा घोटाले की जांच सीबीआई और ईडी से कराई जाए, क्योंकि छात्रों ने सीआईडी जांच पर भरोसा नहीं जताया है।
- जेपीएससी में व्यापक सुधार करते हुए आयोग का पुनर्गठन किया जाए।
छात्रों का कहना है कि जब तक इन मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, आंदोलन जारी रहेगा।
राज्यभर से मिल रहा छात्रों को समर्थन
आंदोलन को अब पूरे झारखंड से समर्थन मिल रहा है। गुमला की रहने वाली नेहा भगत भी आंदोलन में शामिल होने रांची पहुंची हैं। उनका कहना है कि यह सिर्फ नौकरी पाने की लड़ाई नहीं, बल्कि झारखंड के युवाओं के सम्मान और भविष्य का सवाल है। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार परीक्षा अनियमितताओं से लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है।

भूख हड़ताल पर बैठे छात्र
रांची की रहने वाली सविता पिछले 13 दिनों से आंदोलन में शामिल हैं और पिछले तीन दिनों से आमरण अनशन पर बैठी हैं। उनके साथ तीन अन्य छात्र भी भूख हड़ताल कर रहे हैं। सविता का कहना है कि वर्ष 2019 से लगातार प्रतियोगी परीक्षाएं देने के बावजूद हर बार कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के कारण मेहनत बेकार चली गई।
वहीं, बोकारो के चास निवासी विनोद भुइया का कहना है कि सीजीएल परीक्षा में चयन की उम्मीद थी, लेकिन कथित धांधली के कारण उनका सपना अधूरा रह गया। अब उनकी आयु सीमा भी समाप्त हो चुकी है। इसके बावजूद वे आंदोलन में इसलिए शामिल हैं ताकि आने वाली पीढ़ी के साथ ऐसा अन्याय न हो।
देवेंद्र नाथ महतो की भावुक अपील
आमरण अनशन पर बैठे देवेंद्र नाथ महतो का गुरुवार को अनशन का पांचवां दिन है। बुधवार को पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से वीडियो कॉल पर बातचीत के बाद उन्होंने चार दिन बाद केवल पानी पिया, लेकिन अनशन समाप्त नहीं किया।
देवेंद्र ने बताया कि पिछले छात्र आंदोलन के दौरान उनकी मां गंभीर रूप से बीमार थीं। इसके बावजूद उन्होंने आंदोलन नहीं छोड़ा और इसी दौरान उनकी मां का निधन हो गया। उन्होंने कहा कि “मेरी मां की आत्मा को सच्ची शांति तभी मिलेगी, जब झारखंड के युवाओं को न्याय मिलेगा।”

आज की बैठक पर टिकी निगाहें
अब पूरे झारखंड की नजरें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और छात्र प्रतिनिधिमंडल के बीच होने वाली बैठक पर टिकी हैं। यह वार्ता तय करेगी कि 13 दिनों से जारी आंदोलन का समाधान निकलेगा या छात्रों का संघर्ष आगे और तेज होगा।


