हेमंत शर्मा, इंदौर। मध्य प्रदेश स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी यानी MPSLSA की ओर से आयोजित वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस ऑन ‘Enhancing Access to Justice’ का शनिवार को इंदौर में भव्य आगाज हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ सहित सुप्रीम कोर्ट और पश्चिमी क्षेत्र के विभिन्न हाई कोर्ट के कई न्यायाधीश मौजूद रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत में मुख्य अतिथियों और मंचासीन न्यायाधीशों का स्वागत किया गया। इसके बाद न्याय तक आम नागरिक की पहुंच, गरिमा, संवाद और समावेशन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर कॉन्फ्रेंस की शुरुआत हुई।

एक मंच पर देश की शीर्ष न्यायपालिका के दिग्गज

कांफ्रेंस में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा, जस्टिस मनमोहन, जस्टिस विजय बिश्नोई, जस्टिस आलोक अराधे, जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजय सचदेवा समेत कई न्यायाधीश मौजूद रहे।

वहीं केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एवं MPSLSA के पैट्रन-इन-चीफ जस्टिस विवेक रूसिया, जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस विवेक अग्रवाल सहित पश्चिमी क्षेत्र के हाई कोर्ट के न्यायाधीश भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

कॉन्फ्रेंस की थीम है—
“United Voices, Stronger Tomorrow: Advancing Access to Justice through Dialogue, Dignity & Inclusion.”

यानी संवाद, गरिमा और समावेशन के जरिए न्याय तक पहुंच को मजबूत करना।

CM ने सुनाया विक्रमादित्य के कड़े न्याय का प्रसंग

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन की शुरुआत भारतीय न्याय परंपरा और सम्राट विक्रमादित्य के प्रसंग से की। उन्होंने कहा कि भारत में न्याय की परंपरा बेहद पुरानी है और राजा के लिए न्याय करते समय व्यक्तिगत रिश्तों से ऊपर उठना सर्वोच्च कर्तव्य माना गया।

मुख्यमंत्री ने बताया कि जब सम्राट विक्रमादित्य विजय पताका फहराकर सिंहासन पर बैठे, तब विदेशी आक्रांता रहे उनके पत्नी के तीनों भाइयों यानी सालों को बंदी बनाकर उनके सामने पेश किया गया।

पत्नी ने अपने भाइयों की जान बचाने के लिए विक्रमादित्य से गुहार लगाई। लेकिन मुख्यमंत्री के मुताबिक विक्रमादित्य ने व्यक्तिगत रिश्ते को न्याय के आड़े नहीं आने दिया और अपने सालों को भी मृत्युदंड की सजा सुना दी।

मुख्यमंत्री ने इस प्रसंग के जरिए संदेश दिया कि न्याय के सिंहासन पर बैठने के बाद राजा के लिए अपना-पराया नहीं होता, न्याय सर्वोपरि होता है।

पंच परमेश्वर से श्रीकृष्ण तक का दिया उदाहरण

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत में न्याय केवल कानून की किताबों तक सीमित नहीं रहा है। गांवों में ‘पंच परमेश्वर’ की अवधारणा से लेकर भारतीय इतिहास और धार्मिक परंपराओं तक न्याय और संवाद को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।

उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण का उदाहरण देते हुए कहा कि महाभारत जैसे युद्ध को रोकने के लिए भी समाधान का रास्ता खोजा गया था। पांडवों के लिए केवल पांच गांव मांगना संवाद के जरिए विवाद को खत्म करने की कोशिश का उदाहरण है।

पेपर लीक पर फास्ट ट्रैक कोर्ट का जिक्र

मुख्यमंत्री ने युवाओं के भविष्य से जुड़े पेपर लीक मामलों पर सरकार के सख्त रुख का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों के जल्द निपटारे के लिए इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की पहल की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कार्रवाई में देरी नहीं होनी चाहिए और पीड़ित युवाओं को जल्द न्याय मिलना चाहिए।

UCC पर भी CM ने गिनाईं सरकार की उपलब्धियां

मुख्यमंत्री ने समान नागरिक संहिता यानी UCC का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार ने रंजना देसाई समिति की सिफारिशों के आधार पर UCC विधेयक पारित कर अपनी संवैधानिक प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाया है। उन्होंने इसे समानता और न्याय व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

फाइलों के ढेर से डिजिटल न्याय तक

मुख्यमंत्री ने न्याय व्यवस्था में तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि ई-फाइलिंग, डिजिटल रिकॉर्ड, वर्चुअल सुनवाई, जीरो FIR और ‘वन डेटा-वन केस’ जैसी व्यवस्थाएं न्याय प्रक्रिया को ज्यादा तेज, पारदर्शी और आम नागरिक के लिए सुलभ बना रही हैं।

कानून मंत्री बोले- न्याय सिर्फ अदालतों की जिम्मेदारी नहीं

केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि न्याय को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना केवल अदालतों या न्यायिक संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं है। यह सामूहिक संवैधानिक जिम्मेदारी है। उन्होंने लीगल डिफेंस काउंसिल, लॉ स्टूडेंट्स, रिसर्चर्स और पैरा-लीगल वॉलंटियर्स से जरूरतमंद लोगों को निःशुल्क कानूनी सहायता देने की अपील की। कानून मंत्री ने कहा कि प्रो-बोनो लीगल सर्विस को केवल समाज सेवा के रूप में नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी के रूप में देखा जाना चाहिए।

औपनिवेशिक कानूनों से नए भारतीय कानूनों तक

अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में पुराने औपनिवेशिक कानूनों को बदलकर नए भारतीय कानून लागू किए गए हैं। भारतीय न्याय संहिता और जन विश्वास अधिनियम जैसे कानूनों के जरिए छोटे-छोटे उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर आम नागरिकों का जीवन आसान बनाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं।

न्याय का एहसास और विश्वास हर व्यक्ति तक पहुंचे

कानून मंत्री ने NALSA के थीम सॉन्ग की पंक्तियों के साथ अपने संबोधन का समापन किया—

“एहसास न्याय का सबके लिए,
विश्वास न्याय का सबके लिए,
इस हिंदुस्तान पर हक हमारा भी तो है,
इंसाफ के इस आशियाने पर हक हमारा भी तो है…”

इंदौर में आयोजित इस हाईप्रोफाइल कॉन्फ्रेंस में देश की शीर्ष न्यायपालिका के दिग्गज एक मंच पर दिखाई दिए, जहां न्याय तक आम आदमी की पहुंच से लेकर आधुनिक तकनीक और भारतीय न्याय परंपरा तक पर मंथन हुआ।

और इसी मंच से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सम्राट विक्रमादित्य का प्रसंग सुनाकर यह संदेश देने की कोशिश की कि न्याय की असली कसौटी तब होती है, जब फैसला अपने और पराए के बीच नहीं, बल्कि सही और गलत के बीच करना हो।

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