अमित पवार, बैतूल। मध्य प्रदेश के बैतूल से बड़ी और बेहद गंभीर खबर सामने आई है, जहां जल जीवन मिशन के तहत बन रही पानी की टंकी एक मजदूर की मौत की वजह बन गई। सवाल ये है कि क्या मजदूर की जान इतनी सस्ती है और क्या ठेकेदार कानून से ऊपर है। बैतूल जिले के बडोरा ग्राम पंचायत में निर्माणाधीन पानी की टंकी से गिरकर एक मजदूर की दर्दनाक मौत हो गई।
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मृतक मजदूर की पहचान मुकेश सिरसाम निवासी हमलापुर के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि मुकेश बिना किसी सेफ्टी बेल्ट,हेलमेट या सुरक्षा उपकरण के करीब 100 फीट ऊंची पानी की टंकी पर पुताई का काम कर रहा था। काम के दौरान अचानक संतुलन बिगड़ा और मुकेश सीधे नीचे जा गिरा। हादसे में उसके सिर में गंभीर चोटें आईं। उसे तत्काल जिला अस्पताल बैतूल में भर्ती कराया गया,लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। जब नियम कहते हैं कि ऊंचाई पर काम के दौरान पूरी सेफ्टी अनिवार्य है,तो फिर ठेकेदार ने बिना सुरक्षा मजदूर को क्यों चढ़ाया। क्या जल जीवन मिशन के नाम पर मजदूरों की जान से खिलवाड़ हो रहा है?
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जानकारी के मुताबिक यह पानी की टंकी पीएचई विभाग द्वारा ठेकेदार के माध्यम से बनाई जा रही थी। हैरानी की बात ये है कि हादसे के बाद अब तक न ठेकेदार सामने आया न विभाग की ओर से कोई जवाब और न ही मृतक के परिजनों को किसी राहत की घोषणा। मुकेश सिरसाम की मौत सिर्फ एक हादसा नहीं,ये सिस्टम की लापरवाही का नतीजा है। अब बड़ा सवाल ये क्या जिम्मेदार ठेकेदार पर कार्रवाई होगी क्या पीएचई विभाग जवाब देगा या फिर एक और गरीब मजदूर की मौत का मामला भी रफत कर दिया जाएगा।

