घने पहाड़, कठिन रास्ता और आस्था से भरे कदम… कुछ ऐसा ही अनुभव मिलता है। उस दिव्य स्थान पर जहां पहुंचने के बाद भक्त खुद को एक अलग ही आध्यात्मिक दुनिया में महसूस करते हैं।
Lalluram Desk. तेलंगाना के कामारेड्डी जिले के मद्दिकुंटा गांव में स्थित श्रीबुग्गा राम लिंगेश्वर मंदिर सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि श्रद्धा, तप और चमत्कार का अनूठा संगम भी है। यहां आने वाला हर श्रद्धालु किसी खास अनुभूति के साथ लौटता है।
तेलंगाना का ये प्राचीन मंदिर, जिसके दर्शन मात्र से ही 12 ज्योतिर्लिंग के दर्शन का पुण्य मिलता है। यह मंदिर पहाड़ी पर स्थित है। यहां पहुंचने के लिए करीब 2.5 किमी की चढ़ाई यात्रा करनी पड़ती है । रास्ता भले ही थोड़ा कठिन हो, लेकिन जैसे ही भक्त मंदिर परिसर में प्रवेश करते है। उनकी सारी थकान दूर हो जाती है और मन में एक अलग ही शांति का अनुभव होता है।
श्रीराम से जुड़ी पौराणिक कथा
मान्यता है कि इस पवित्र स्थल की स्थापना भगवान श्रीराम ने की थी। रावण वध के बाद अयोध्या लौटते समय उन्होंने भगवान शिव की पूजा की थी। जल की कमी होने पर उन्होंने स्वयं एक झरना उत्पन्न किया। जिससे आज भी भगवान का जला अभिषेक किया जाता है। यही कारण है कि इस मंदिर को बुग्गा राम लिंगेश्वर के नाम से जाना जाता है।
एक साथ कई दिव्य स्वरूपों के दर्शन
मंदिर में प्रवेश करते ही भक्तों को कतार में स्थापित कई शिवलिंगों के दर्शन होते है, जिन पर लगातार जल प्रवाहित होता रहता है। यह दृश्य अपने आप में अत्यंत अलौकिक और मन को आकर्षित करने वाला होता है। गर्भगृह में भगवान शिव, माता पार्वती के साथ विराजमान हैं। जहां भक्त विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।
औषधीय जल और चमत्कारी मान्यताएं
यहां बहने वाले जल को औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस जल के स्पर्श और सेवन से कई प्रकार के रोगों में राहत मिलती है। शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है।
दर्शन की विशेष परंपरा
इस मंदिर में दर्शन से पहले इसन्नापल्ली क्षेत्र में स्थित कालभैरव स्वामी के दर्शन करना जरूरी होता है। इसके अलावा परिसर में नव ग्रह मंदिर, गणेश जी, हनुमानजी और संतान नाग मंदिर भी स्थित हैं। जहां भक्त अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं।
सौभाग्य और संतान सुख की मान्यता की जातेहैं
मंदिर के पास स्थित मंगला गौरी देवी को शृंगार अर्पित करने से अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलने की मान्यता है। वहीं, संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले भक्त यहां विशेष पूजा करते है। यह पवित्र धाम आज भी अपनी अनोखी परंपराओं, चमत्कारी मान्यताओं और दिव्य वातावरण के कारण श्रद्धालु ओं के बीच गहरी आस्था का केंद्र बना हुआ है।
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