Business Desk – PPF यानी पब्लिक प्रोविडेंट फंड लंबे समय के लिए सुरक्षित निवेश का एक लोकप्रिय विकल्प है। इसमें हर वित्त वर्ष अधिकतम 1.5 लाख रुपए जमा किए जा सकते हैं। लेकिन सिर्फ कितनी रकम जमा कर रहे हैं, यह ही महत्वपूर्ण नहीं है। पैसा किस तारीख को जमा कर रहे हैं, इसका भी आपके कुल रिटर्न पर असर पड़ता है।

अगर आप सालाना 1.5 लाख रुपए PPF में जमा करते हैं, तो अप्रैल की 5 तारीख से पहले पूरी रकम जमा करने और हर महीने किस्तों में पैसा डालने के बीच 15 साल में करीब 1.2 लाख रुपए का अंतर हो सकता है।

PPF में ब्याज की गणना कैसे होती है?

PPF के नियमों के मुताबिक, हर महीने के ब्याज की गणना खाते में 5 तारीख से महीने के आखिरी दिन के बीच सबसे कम बैलेंस के आधार पर होती है। इसलिए अगर आपने किसी महीने की 5 तारीख के बाद पैसा जमा किया, तो उस जमा राशि पर उस महीने का ब्याज नहीं जुड़ता। यही वजह है कि सालाना पूरी रकम निवेश करने वालों के लिए अप्रैल की शुरुआत सबसे अहम मानी जाती है।

5 अप्रैल से पहले पैसा जमा करने का फायदा

अगर आपके पास पूरे वित्त वर्ष के लिए 1.5 लाख रुपए उपलब्ध हैं, तो इसे अप्रैल की 5 तारीख से पहले PPF खाते में जमा करने पर पूरी रकम को ज्यादा समय तक ब्याज मिलता है। इसके मुकाबले अगर यही रकम हर महीने 12,500 रुपए की किस्त में जमा की जाती है, तो हर किस्त को जमा होने के बाद ही ब्याज का लाभ मिलता है। यानी दोनों मामलों में सालाना निवेश 1.5 लाख रुपए ही रहेगा, लेकिन पैसा खाते में अलग-अलग समय पर पहुंचने के कारण ब्याज की रकम अलग होगी।

15 साल में कितना अंतर पड़ सकता है?

7.1% की ब्याज दर को स्थिर मानकर किए गए अनुमान के मुताबिक, अगर हर साल 1.5 लाख रुपए अप्रैल की 5 तारीख से पहले एकमुश्त जमा किए जाएं, तो 15 साल बाद करीब 40.68 लाख रुपए का फंड बन सकता है। इसमें कुल निवेश 22.5 लाख रुपए होगा और बाकी रकम ब्याज से बनेगी। वहीं, हर महीने 12,500 रुपए जमा करने पर 15 साल बाद करीब 39.48 लाख रुपए का फंड बनने का अनुमान है। इस तरह दोनों तरीकों में करीब 1.20 लाख रुपए का अंतर हो सकता है।

अलग-अलग तरीके से निवेश का अनुमान

अगर 1.5 लाख रुपए सालाना निवेश किए जाएं, तो एकमुश्त अप्रैल निवेश में अनुमानित रकम करीब 40.7 लाख रुपए हो सकती है। छह महीने के अंतराल पर रकम जमा करने पर यह करीब 40.1 लाख रुपए, तीन महीने के अंतराल पर करीब 39.8 लाख रुपए और हर महीने 12,500 रुपए जमा करने पर करीब 39.5 लाख रुपए हो सकती है। यह सिर्फ अनुमान है। PPF की ब्याज दर सरकार हर तिमाही तय करती है, इसलिए भविष्य में ब्याज दर बदलने पर वास्तविक मैच्योरिटी राशि भी बदल जाएगी।

महीने की 5 तारीख क्यों महत्वपूर्ण है?

PPF में पैसा जमा करते समय हर महीने की 5 तारीख का ध्यान रखना जरूरी है। उदाहरण के लिए, अगर आपने 4 तारीख को 12,500 रुपए जमा कर दिए, तो वह रकम उस महीने की ब्याज गणना में शामिल हो सकती है। लेकिन 6 तारीख को जमा करने पर उस महीने उस रकम पर ब्याज का लाभ नहीं मिलेगा। इसलिए जो लोग मासिक किस्तों से PPF में निवेश करते हैं, उनके लिए भी कोशिश करनी चाहिए कि रकम 1 से 4 तारीख के बीच खाते में जमा हो जाए।

PPF के मुख्य नियम

PPF खाते में एक वित्त वर्ष में न्यूनतम 500 रुपए और अधिकतम 1.5 लाख रुपए जमा किए जा सकते हैं। इसकी सामान्य मैच्योरिटी अवधि 15 साल है। इसके बाद खाते को 5-5 साल के लिए आगे बढ़ाया जा सकता है। PPF को EEE यानी Exempt-Exempt-Exempt श्रेणी का निवेश माना जाता है। यानी नियमों के तहत इसमें जमा रकम, ब्याज और मैच्योरिटी पर मिलने वाली रकम पर टैक्स का लाभ मिलता है। PPF की ब्याज दर सरकार हर तिमाही में तय करती है।

कौन खोल सकता है PPF अकाउंट?

कोई भी व्यक्ति बैंक या पोस्ट ऑफिस में अपने नाम से PPF खाता खोल सकता है। नाबालिग के नाम पर भी अभिभावक उसके खाते का संचालन कर सकता है। हालांकि, एक वित्त वर्ष में खाते में जमा की अधिकतम सीमा 1.5 लाख रुपए ही रहती है। ध्यान रखें: PPF की ब्याज दर स्थायी नहीं है। इसलिए ऊपर दिए गए 15 साल के आंकड़े 7.1% की दर को पूरे समय समान मानकर किया गया अनुमान हैं। वास्तविक रिटर्न भविष्य में लागू ब्याज दरों के अनुसार कम या ज्यादा हो सकता है।