Haryana Rajasthan Water Agreement: हरियाणा और राजस्थान के बीच पानी को लेकर दशकों से चला आ रहा विवाद अब सुलझ गया है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की मौजूदगी में दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इस समझौते पर सहमति जताई है।

समझौते के अनुसार हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से राजस्थान के हासियावास तक करीब 250 किलोमीटर लंबी अंडरग्राउंड पाइपलाइन बिछाई जाएगी। इस पाइपलाइन के जरिए मानसून के दौरान मिलने वाला अतिरिक्त पानी राजस्थान के उन क्षेत्रों तक पहुंचाया जाएगा, जहां लंबे समय से पानी की कमी बनी हुई है।

1994 के समझौते से जुड़ा है विवाद

इस परियोजना की संयुक्त विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) को अंतिम मंजूरी के लिए केंद्रीय जल आयोग के पास भेजा गया है। मंजूरी मिलते ही निर्माण कार्य की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। यह विवाद 1994 के अपर यमुना रिवर बोर्ड समझौते के क्रियान्वयन से जुड़ा रहा है। उस समय राजस्थान को यमुना जल का हिस्सा आवंटित किया गया था, लेकिन बुनियादी ढांचे की कमी और तकनीकी कारणों से पानी शेखावाटी क्षेत्र तक नहीं पहुंच पाया।

शेखावाटी क्षेत्र पर सबसे ज्यादा असर

चूरू, झुंझुनूं और सीकर जैसे जिलों में लंबे समय से पेयजल और सिंचाई संकट बना हुआ था। स्थानीय स्तर पर इसका असर खेती और भूजल स्तर पर साफ दिखाई देता रहा है। हाल ही में हुई त्रिपक्षीय बैठक में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सहमति दी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में इस समझौते को महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना धरातल पर आने के बाद शेखावाटी क्षेत्र में भूजल स्तर सुधारने में मदद करेगी। साथ ही पेयजल और सिंचाई की समस्या को भी काफी हद तक कम करने की उम्मीद है।

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