आम आदमी पार्टी(AAP) को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा समेत कुल सात सांसदों AAP से अलग होना पार्टी के लिए गंभीर नुकसान के तौर पर देखा जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब पंजाब और दिल्ली में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, इन सांसदों के अलग होने से न केवल राज्यसभा में पार्टी की ताकत प्रभावित हुई है, बल्कि इसका असर जमीनी स्तर पर भी देखने को मिल सकता है। पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव और दिल्ली में नगर निगम चुनावों को देखते हुए यह घटनाक्रम आम आदमी पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है।
वर्ष 2025 में दिल्ली की सत्ता से पार्टी के बाहर होने के बाद संगठनात्मक ढांचे में बड़े बदलाव देखने को मिले, जिसके तहत कई वरिष्ठ नेताओं को पंजाब में पार्टी और सरकार की जिम्मेदारी सौंपी गई। अब विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी को एक और बड़ा झटका लगा है। सात राज्यसभा सांसदों के कथित दल-बदल और अलग होने की खबरों ने संगठन के भीतर हलचल बढ़ा दी है। इस घटनाक्रम को पार्टी की संसदीय ताकत और राजनीतिक स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती माना जा रहा है।
दिल्ली से विधायक रहे हैं राघव चड्ढा
दिल्ली से राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल का नाम भी इन सात सांसदों में शामिल हैं। खास बात यह है कि स्वाति मालीवाल लंबे समय से पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाती रही हैं, हालांकि तकनीकी रूप से वह अब तक पार्टी से औपचारिक रूप से अलग नहीं हुई थीं। इसी तरह राघव चड्ढा भी इस घटनाक्रम के केंद्र में हैं। राघव चड्ढा ने राजनीतिक करियर की शुरुआत दिल्ली की राजनीति से की थी और वे राजेंद्र नगर विधानसभा क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं। इसके अलावा वे दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष भी रहे हैं। बाद में उन्हें राज्यसभा सांसद बनाया गया और उन्होंने दिल्ली में लोकसभा चुनाव भी लड़ा था।
निगम चुनाव में होगा दबाव
आगामी वर्ष होने वाले दिल्ली नगर निगम (MCD) चुनावों को लेकर आम आदमी पार्टी ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। विधानसभा चुनाव में अपेक्षित प्रदर्शन न मिलने के बाद अब पार्टी पर निगम चुनाव में बेहतर नतीजे हासिल करने का दबाव बढ़ गया है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी नेतृत्व इस समय संगठन के भीतर किसी भी तरह की असंतोष या टूट की स्थिति पर कड़ी नजर रख रहा है। हाल ही में सांसदों के बीच राजनीतिक असहमति और संभावित दलबदल की चर्चाओं के बाद यह चिंता और बढ़ गई है कि इसका असर पार्षदों और विधायकों तक भी पहुंच सकता है।
20 दिन में बागी बने राघव
राज्यसभा सांसद राघव को लेकर 20 दिनों में तेजी से बदले हालात ने राजनीतिक हलकों में चर्चा बढ़ा दी है। जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला 2 अप्रैल को शुरू हुआ जब उन्हें राज्यसभा में पार्टी उपनेता के पद से हटा दिया गया और उनकी जगह अशोक मित्तल को नया उपनेता नियुक्त किए जाने की बात सामने आई। इसके बाद उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच तनाव की चर्चाएं और तेज हो गईं। इसी दौरान राघव चड्ढा की ओर से पार्टी के भीतर चल रहे “स्क्रिप्टेड कैंपेन” का खुलासा करने जैसे दावे भी सामने आए, जिसमें उन्होंने खुद को राजनीतिक दबाव और आंतरिक साजिश का शिकार बताया।15 अप्रैल को पंजाब सरकार द्वारा उनकी सुरक्षा घटाए जाने की जानकारी भी सामने आई, जिसके बाद केंद्र सरकार ने उन्हें जेड श्रेणी की केंद्रीय सुरक्षा प्रदान करने की बात कही गई। शुक्रवार को राजनीतिक दबाव के इस तीव्र घटनाक्रम के बाद राघव ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया।
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