आम आदमी पार्टी के भीतर भूचाल आया हुआ है. राघव चड्ढा समेत आम आदमी पार्टी के बागी सांसदों ने बीजेपी मुख्यालय पहुंचकर पार्टी अध्यक्ष बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात कर बीजेपी की सदस्यता ले ली हैं. राघव के साथ इस दौरान संदीप पाठक और अशोक मित्तल भी मौजूद रहे. AAP के इन बागी नेताओं को नितिन नबीन ने पार्टी की सदस्यता दिलाई और मिठाई खिलाकर पार्टी में उनका स्वागत किया. गौरतलब है कि, राघव चड्डा के अलावा आम आदमी पार्टी के दो तिहाई सांसदों ने भी शुक्रवार को पाला बदल लिया. सभी दावा किया कि दसवीं अनुसूची के तहत उनका भाजपा में विलय हो गया है. लेकिन अब आप संसद संजय सिंह ने कहा है कि उनकी पार्टी अपने बागी सांसदों के खिलाफ दलबदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई करने की तैयारी कर रही है.

संजय सिंह ने कहा- सभापति को पत्र प्रस्तुत करूंगा

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि एक बार जब कोई व्यक्ति राज्यसभा के लिए चुन लिया जाता है तो उसकी सदस्यता संविधान के तहत सुरक्षित हो जाती है. कोई भी पार्टी किसी सांसद को सीधे तौर पर नहीं हटा सकती, लेकिन दलबदल विरोधी प्रावधानों के तहत उसे अयोग्य ठहराया जा सकता है. अब AAP इसी के तहत अपने बागी सांसदों के खिलाफ एक्शन लेने की तैयारी कर रही है. संजय सिंह ने पोस्ट करते हुए लिखा है कि, मैं माननीय राज्यसभा सभापति को एक पत्र प्रस्तुत करूँगा, जिसमें राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक को भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने के कारण राज्यसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित करने की मांग की जाएगी, क्योंकि यह संविधान की दसवीं अनुसूची के अंतर्गत स्वेच्छा से अपनी पार्टी की सदस्यता त्यागने के समान है.

चड्ढा के दावे पर 4 सांसदों ने नहीं लगाई अभी मुहर

चड्ढा ने दावा किया कि हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता, विक्रम साहनी और स्वाति मालीवाल के भी इस कदम में शामिल होने की संभावना है. हालांकि, बाकी बचे ज्यादातर सांसदों ने अब तक कोई घोषणा नहीं की है. आप के कुल 10 राज्यसभा सांसदों में से अपनी सदस्यता बचाने के लिए कम से कम दो-तिहाई (सात) सांसदों को किसी दूसरी पार्टी में विलय का समर्थन करना जरूरी है. इन 10 सांसदों में से तीन दिल्ली से और सात पंजाब से थे. चड्ढा ने जो सात नाम गिनाए उनमें मालीवाल दिल्ली से एकमात्र सांसद हैं और बाकी छह पंजाब से हैं.

राघव चड्ढा ने क्या दावा किया?

घोषणा करते हुए चड्ढा ने कहा कि राज्यसभा में आप के 10 सांसद हैं और उनमें से दो-तिहाई से ज्यादा हमारे साथ हैं. उन्होंने हस्ताक्षर किए हैं और आज सुबह हमने हस्ताक्षरित पत्र और दस्तावेज राज्यसभा के सभापति को सौंप दिए. यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि अंतिम निर्णय राज्यसभा के सभापति का होता है.

राघव चड्ढा ने कैसे किया दलबदल?

दसवीं अनुसूची के पैराग्राफ 2 में यह प्रावधान है कि अगर कोई सदस्य अपनी मर्जी से अपनी राजनीतिक पार्टी की सदस्यता छोड़ देता है या पार्टी व्हिप के खिलाफ वोट करता है तो उसे दलबदल के आधार पर डिसक्वालिफाई कर दिया जाएगा.

हालांकि, उसी टेक्स्ट के पैराग्राफ 4 में कहा गया है कि विलय के मामले में दल-बदल के आधार पर तब अयोग्यता लागू नहीं होगी जब संबंधित विधायी दल के कम से कम दो-तिहाई सदस्य विलय के लिए सहमत हो जाते हैं.

राघव चड्ढा ने क्या आरोप लगाकर छोड़ी आप?

जैसा कि इस महीने की शुरुआत में बताया गया था कि चड्ढा और मालीवाल दोनों ही पहले से आप के खिलाफ बोल रहे थे, लेकिन बाकी सांसदों का फैसला चौंकाने वाला था. अपनी इस बात को आगे बढ़ाते हुए चड्ढा ने शुक्रवार को कहा कि उन्होंने खुद को पार्टी की गतिविधियों से अलग कर लिया है क्योंकि वह उनके अपराधों का हिस्सा नहीं बनना चाहते थे.

पीसी के दौरान उन्होंने कहा, “मैं उनकी दोस्ती के लायक नहीं था, क्योंकि मैं उनके अपराधों में शामिल नहीं था. हमारे पास सिर्फ दो ही विकल्प थे या तो राजनीति छोड़ दें और पिछले 15-16 सालों में किए गए अपने जनहित के कामों को त्याग दें या फिर अपनी पूरी ऊर्जा और अनुभव के साथ सकारात्मक राजनीति करें. इसलिए, हमने यह फैसला किया है कि हम यानी राज्यसभा में आप के दो-तिहाई सदस्य भारत के संविधान के प्रावधानों का इस्तेमाल करते हुए खुद को भाजपा में विलय कर लेंगे.”

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