बेगूसराय। एक ओर जहां दुनिया बच्चों को भगवान का रूप मानती है वहीं बेगूसराय के लखमिनियां रेलवे स्टेशन से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने रिश्तों की मर्यादा को तार-तार कर दिया है। पिता की असामयिक मृत्यु और मां द्वारा दूसरा घर बसाने के बाद अनाथ हुई दो मासूम बच्चियों को उनके मामा ने ही बोझ समझकर चलती ट्रेन में लावारिस छोड़ दिया।
क्या है पूरा मामला?
बुधवार की शाम लखमिनियां रेलवे स्टेशन पर महज 10 साल की प्रीति और 7 साल की श्वेता को हाथ में कपड़ों का झोला लिए बदहवास और रोते-बिलखते देखा गया। गश्त कर रही आरपीएफ (RPF) टीम की नजर इन पर पड़ी। आरपीएफ इंस्पेक्टर अरविंद कुमार सिंह ने तत्परता दिखाते हुए बच्चियों को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया।
मम्मी चली गई, मामा ने घर से निकाला
पूछताछ में बड़ी बहन प्रीति ने अपनी दर्दभरी दास्तां सुनाई। उसने बताया कि दो साल पहले पिता की मृत्यु हो गई थी। इसके कुछ समय बाद ही मां ने दूसरी शादी कर ली और उन्हें छोड़कर चली गई। ननिहाल वालों ने पहले तो उन्हें सहारा दिया, लेकिन समय के साथ उनका व्यवहार बदल गया। मामा-मामी उन्हें प्रताड़ित करने लगे और हर दिन उन्हें ताने दिए जाते थे।
जहां जाना है जाओ कह मामा ने छोड़ा
बुधवार को बच्चियों के मामा उन्हें भागलपुर रेलवे स्टेशन ले गए। वहां एक चलती ट्रेन में दोनों को जबरन बैठाकर मामा ने क्रूरता की हद पार कर दी और कहा तुम्हें जहां जाना है जाओ अब वापस मत आना। ट्रेन से बेसहारा उतरीं ये बच्चियां लखमिनियां स्टेशन पर भटक रही थीं। आरपीएफ ने जब बच्चियों की मां से संपर्क करने की कोशिश की तो उन्होंने फोन ही नहीं उठाया।
नन्हें फरिश्ते अभियान बना सहारा
रेलवे सुरक्षा बल इस समय पूरे देश में नन्हें फरिश्ते अभियान चला रहा है। इसी अभियान के तहत इन मासूमों को रेस्क्यू किया गया। वर्तमान में रेल पुलिस और चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) बच्चियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए प्रयासरत हैं। यह घटना समाज के उन लोगों के चेहरे पर एक तमाचा है जो संवेदनाओं को भूलकर रिश्तों का गला घोंटने से भी परहेज नहीं करते। अगर समय रहते आरपीएफ की नजर इन पर नहीं पड़ती तो बड़ी अनहोनी हो सकती थी। फिलहाल पुलिस कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से इन मासूमों के संरक्षण सुनिश्चित करने में जुटी है।

