वरिष्ठ नेता अभय चौटाला ने हरियाणा में कपास की खेती में भारी गिरावट और किसानों के बढ़ते घाटे के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने सरकार से एमएसपी की गारंटी और मुआवजे की मांग की है।

कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। हरियाणा में कभी किसानों की पहचान मानी जाने वाली कपास की खेती अब संकट के दौर से गुजर रही है। इसे लेकर वरिष्ठ नेता Abhay Singh Chautala ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार की लापरवाही के कारण कपास की खेती दम तोड़ रही है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में कपास का रकबा घटकर केवल 2.82 लाख हेक्टेयर रह गया है, जबकि पिछले सात वर्षों में इसमें करीब 70 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2019-20 में कपास का रकबा करीब 8 लाख हेक्टेयर था, जो अब तेजी से सिमट चुका है।

अभय चौटाला ने कहा कि कपास की खेती में किसानों की लागत लगातार बढ़ रही है और एक एकड़ पर करीब 40,024 रुपये खर्च आने के बावजूद किसानों को लगभग 15,142 रुपये प्रति एकड़ का घाटा झेलना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि Haryana Agricultural University (HAU) के वैज्ञानिक लगातार चेतावनी देते रहे और किसान संगठन भी आवाज उठाते रहे, लेकिन सरकार ने न तो नकली बीज बेचने वालों पर सख्ती दिखाई और न ही कपास किसानों के लिए कोई ठोस नीति बनाई।

उन्होंने कहा कि आज किसान घाटे, कर्ज और खेती छोड़ने की मजबूरी से जूझ रहा है। अभय चौटाला ने सरकार से सवाल करते हुए कहा कि किसानों की इस बर्बादी का जिम्मेदार कौन है। उन्होंने मांग की कि किसानों को भाषण नहीं, बल्कि एमएसपी (Minimum Support Price–न्यूनतम समर्थन मूल्य) की गारंटी, फसल सुरक्षा और नुकसान का समय पर मुआवजा मिलना चाहिए।