Tech Desk: गर्मियों में राहत पाने के लिए एयर कंडीशनर यानी AC का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन साधारण AC काफी बिजली खर्च करता है, और इसमें इस्तेमाल होने वाली रेफ्रिजरेंट गैसें पर्यावरण के लिए भी चिंता का विषय हैं। यही वजह है कि दुनियाभर के वैज्ञानिक ऐसी नई कूलिंग तकनीकों पर काम कर रहे हैं, जो कम बिजली में बेहतर ठंडक दे सकें और पर्यावरण को नुकसान भी न पहुंचाएं।

इसी दिशा में Elastocaloric Cooling Technology को भविष्य की नई कूलिंग तकनीक माना जा रहा है। जर्मनी की सारलैंड यूनिवर्सिटी (Saarland University) के शोधकर्ताओं ने इस तकनीक पर काम किया है। इसमें गैस या कंप्रेसर की जगह एक खास धातु का इस्तेमाल किया जाता है, जो दबाव पड़ने और हटने पर ठंडक पैदा करती है।

क्या है इलास्टोकैलॉरिक कूलिंग तकनीक?

Elastocaloric Cooling एक सॉलिड-स्टेट कूलिंग तकनीक है। इसका मतलब है कि इसमें ठंडक पैदा करने के लिए किसी गैस, रेफ्रिजरेंट या पारंपरिक कंप्रेसर की जरूरत नहीं होती।

इस तकनीक में निकल-टाइटेनियम (Nickel-Titanium) मिश्र धातु के बेहद पतले तार या स्ट्रिप का इस्तेमाल किया जाता है। यह धातु अपने आकार में बदलाव के दौरान तापमान में परिवर्तन करती है, जिससे ठंडक पैदा होती है।

शोधकर्ताओं के अनुसार, यह तकनीक कमरे का तापमान करीब 5 से 10 डिग्री सेल्सियस तक कम करने की क्षमता रखती है।

कैसे काम करती है यह तकनीक?

Elastocaloric Cooling का सिद्धांत सामान्य AC से पूरी तरह अलग है।

सबसे पहले निकल-टाइटेनियम धातु के तार पर दबाव डाला जाता है या उसे खींचा जाता है।

इस प्रक्रिया के दौरान धातु गर्मी छोड़ती है।

इसके बाद जब दबाव हटाया जाता है और धातु अपने पुराने आकार में लौटती है, तो वह आसपास की गर्मी को सोख लेती है।

यही प्रक्रिया ठंडक पैदा करती है।

इस पूरे सिस्टम में गैस, कंप्रेसर या जटिल रेफ्रिजरेशन सर्किट की जरूरत नहीं पड़ती।

साधारण AC से कैसे अलग है?

पारंपरिक एयर कंडीशनर में कंप्रेसर, रेफ्रिजरेंट गैस और कई मैकेनिकल पार्ट्स होते हैं। इन्हें चलाने के लिए काफी बिजली की जरूरत पड़ती है।

वहीं Elastocaloric Cooling तकनीक में गैस का इस्तेमाल नहीं होता। इससे रेफ्रिजरेंट गैस के रिसाव का खतरा भी खत्म हो जाता है। इसके अलावा इसमें कम बिजली की जरूरत पड़ती है और सिस्टम का डिजाइन भी अपेक्षाकृत सरल हो सकता है।

पर्यावरण के लिए क्यों मानी जा रही बेहतर?

आज इस्तेमाल होने वाले कई एयर कंडीशनर ऐसी गैसों का उपयोग करते हैं, जो जलवायु परिवर्तन पर असर डाल सकती हैं। Elastocaloric Cooling में ऐसी गैसों की जरूरत नहीं होती।

यूरोपीय आयोग (European Commission) भी इस तकनीक को भविष्य की साफ और सुरक्षित कूलिंग तकनीकों में शामिल मानता है। अगर यह बड़े स्तर पर सफल होती है, तो बिजली की खपत कम करने और कार्बन उत्सर्जन घटाने में मदद मिल सकती है।

अभी किस चरण में है यह तकनीक?

फिलहाल Elastocaloric Cooling Technology अभी रिसर्च और शुरुआती विकास के चरण में है। वैज्ञानिक इसकी क्षमता को बेहतर बनाने और इसे व्यावसायिक उपयोग के लिए तैयार करने पर काम कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इसे आम लोगों तक पहुंचने में अभी कुछ साल लग सकते हैं। इसके बाद यह इस बात पर निर्भर करेगा कि एयर कंडीशनर बनाने वाली कंपनियां इस तकनीक को अपने उत्पादों में कितनी तेजी से अपनाती हैं।

भविष्य में क्या बदल सकता है?

अगर यह तकनीक बड़े पैमाने पर सफल होती है, तो आने वाले वर्षों में ऐसे एयर कंडीशनर बाजार में आ सकते हैं जो बिना पारंपरिक रेफ्रिजरेंट गैस के काम करेंगे, कम बिजली खर्च करेंगे और पर्यावरण पर भी कम असर डालेंगे। इससे घरों, दफ्तरों और व्यावसायिक इमारतों में ऊर्जा की बचत के साथ अधिक टिकाऊ कूलिंग सिस्टम उपलब्ध हो सकते हैं।

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