रोहित कश्यप, मुंगेली। शिक्षक केवल कक्षा में ही नहीं, बल्कि अपने व्यवहार और जीवनशैली से भी समाज को सीख देते हैं। मुंगेली जिले के जरहागांव नगर निवासी एक सरकारी शिक्षक विनोद कुमार इन दिनों सड़क सुरक्षा के प्रति अपनी जागरूकता और अनुशासन को लेकर लोगों के बीच प्रेरणा का विषय बने हुए हैं। उनके लिए हेलमेट अब महज एक सुरक्षा उपकरण नहीं, बल्कि जीवन का अभिन्न साथी बन चुका है। यही कारण है कि वे बाइक पर निकलते समय दूरी चाहे कितनी भी कम क्यों न हो, बिना हेलमेट के वाहन स्टार्ट तक नहीं करते।

हादसे ने बदल दी जिंदगी

विनोद कुमार की यह आदत किसी अभियान या चालान के डर से नहीं बनी, बल्कि एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना के बाद उनके जीवन का हिस्सा बन गई। करीब पांच साल पहले वे एक भीषण बाइक दुर्घटना का शिकार हुए थे। हादसे में उनके शरीर के विभिन्न अंगों पर गंभीर चोटें आई थीं और उन्हें लंबे समय तक उपचार कराना पड़ा। हालांकि, इस दुर्घटना में सबसे बड़ी राहत यह रही कि उस समय उन्होंने हेलमेट पहन रखा था। हेलमेट ने उनके सिर को गंभीर चोट से बचा लिया। चिकित्सकों ने भी माना कि यदि सिर सुरक्षित नहीं रहता, तो हादसे के परिणाम कहीं अधिक गंभीर हो सकते थे।

इस घटना ने उनके जीवन की सोच पूरी तरह बदल दी। उन्होंने उसी दिन संकल्प लिया कि अब चाहे घर से कुछ कदम दूर ही क्यों न जाना हो, वे बिना हेलमेट के बाइक नहीं चलाएंगे। आज यह संकल्प उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। 50 मीटर की दूरी तय करनी हो या 50 किलोमीटर का सफर, हेलमेट हमेशा उनके सिर पर होता है।

अब हर सफर में हेलमेट रहता है सबसे पहले

रोजमर्रा के छोटे-छोटे कामों में भी उनका यह अनुशासन साफ दिखाई देता है। किराना दुकान जाना हो, सब्जी खरीदनी हो, किसी परिचित से मिलना हो या फिर किसी जरूरी काम से बाजार निकलना हो, हर बार हेलमेट उनके साथ रहता है। सुबह मॉर्निंग वॉक या योग-व्यायाम के लिए बाइक से जाना हो तब भी वे हेलमेट पहनना नहीं भूलते। शर्ट-पैंट पहनें या टी-शर्ट और लोवर, हर वेशभूषा में उनकी पहचान हेलमेट के साथ ही बन गई है।

पेशे से शिक्षक होने के कारण वे अपने विद्यार्थियों, अभिभावकों और समाज के लोगों को भी लगातार सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करते रहते हैं। उनका कहना है कि हेलमेट केवल कानून का पालन करने के लिए नहीं, बल्कि अपने परिवार की खुशियों और अपने जीवन की सुरक्षा के लिए पहनना चाहिए। दुर्घटना कभी बताकर नहीं आती, लेकिन हेलमेट कई बार मौत और जिंदगी के बीच सबसे मजबूत सुरक्षा कवच बन जाता है।

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विनोद कुमार का मानना है कि सड़क पर निकलने वाले हर दोपहिया वाहन चालक को हेलमेट पहनने की आदत विकसित करनी चाहिए। वे लोगों से आग्रह करते हैं कि छोटी दूरी या धीमी रफ्तार का बहाना बनाकर हेलमेट पहनने से बचना सबसे बड़ी लापरवाही है। अधिकांश सड़क हादसे अचानक होते हैं और ऐसे समय में सुरक्षा का सबसे प्रभावी साधन हेलमेट ही साबित होता है।

नियमों का पालन करने दूसरों को भी करते हैं प्रेरित

स्थानीय लोगों का कहना है कि विनोद कुमार ने जिस तरह अपने जीवन के अनुभव को समाज के लिए सीख में बदल दिया है, वह वास्तव में सराहनीय है। वे केवल स्वयं नियमों का पालन नहीं करते, बल्कि दूसरों को भी प्रेरित करते हैं। ऐसे जागरूक नागरिक सड़क सुरक्षा अभियान के लिए किसी प्रेरणा स्रोत से कम नहीं हैं।

सड़क सुरक्षा को जन-जन तक पहुंचाने के चलाये जाने वाले अभियानों में ऐसे जिम्मेदार एवं अनुशासित नागरिकों को शामिल कर हेलमेट जागरूकता अभियान चलाए, तो इसका सकारात्मक प्रभाव निश्चित रूप से समाज पर पड़ेगा। विनोद कुमार जैसे लोग यह साबित करते हैं कि जागरूकता का सबसे प्रभावी माध्यम भाषण नहीं, बल्कि स्वयं का आचरण होता है।विनोद कुमार की कहानी एक सरल लेकिन गहरा संदेश देती है,हेलमेट केवल सिर की सुरक्षा नहीं करता, बल्कि पूरे परिवार की उम्मीदों, खुशियों और भविष्य की भी रक्षा करता है।

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