रायपुर। छत्तीसगढ़ की धरती पर सुशासन तिहार 2026 इन दिनों एक अनोखा उत्सव बना हुआ है। यह त्योहार सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन के साथ ही साथ आमजन के जीवन में संवेदना, सम्मान और सुविधा पहुंचाने का सशक्त अभियान बन गया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की दूरंदेशी और जन-केंद्रित नेतृत्व में मनाया जाने वाला यह उत्सव अब गांव-गांव में बदलाव की कहानी लिख रहा है। वर्षों तक लम्बित रहने वाली समस्याओं का समाधान मौके पर तुरंत और सरल तरीके से हो रहा है। सुशासन की जीवंत मिसाल बनी है खैरागढ़ जिले के ग्राम पंचायत बढ़ईटोला में आयोजित समाधान शिविर, जहां दो बुजुर्गों की जिंदगी में उम्मीद की एक नई किरण ने दस्तक दी है।

ग्राम बढ़ईटोला के निवासी लिखन राम वर्मा और ज्ञान राम सिन्हा लंबे समय से सुनने की समस्या से जूझ रहे थे।बढ़ती उम्र के साथ बढ़ती ध्वनि शून्यता ने उनके जीवन को सीमित कर दिया था। वे परिवार की बातें भी ठीक से सुन नहीं पाते थे सामाजिक कार्यक्रमों में हिस्सा नही ले पाते थे, समाज में अलग-थलग महसूस करते थे। एक समय के बाद सामान्य बातचीत भी उनके लिए चुनौती बन गई थी। श्रवण बाधा केवल शारीरिक तकलीफ नहीं होती बल्कि इससे पीड़ित का आत्मविश्वास और उसका सामाजिक जुड़ाव भी प्रभावित होता है। सुशासन तिहार का समाधान शिविर इनके जीवन के लिए एक नया और सुखद मोड़ साबित हुआ है।

शिविर में मिले समाधान से बदली किस्मत

सुशासन तिहार के तहत आयोजित समाधान शिविर में स्वास्थ्य विभाग और समाज कल्याण विभाग की टीम पूरी सक्रियता के साथ अपना काम कर रही है। दोनों हितग्राही ग्रामीणों, लिखन राम वर्मा और ज्ञान राम सिन्हा की समस्याओं पर शिविर में उपस्थित अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई की और जांच के बाद मौके पर ही उन्हें श्रवण यंत्र (Hearing Aids) उपलब्ध करा दिए गए। यह उपकरण इन ग्रामीणों के लिए जीवन में फिर से संवाद की वापसी, आत्मसम्मान की पुनर्स्थापना और एक नई शुरुआत साबित हुई है। श्रवण यंत्र प्राप्त करते ही इनके चेहरों पर जो खुशी आई उससे इस बात का पता चलता है कि सरकार की संवेदनशीलता जब जमीन पर आकार लेती है तो उसका असर ऐसे ही दिखाई देता है।श्रवण यंत्र मिलने के बाद लिखन राम वर्मा और ज्ञान राम सिन्हा ने भावुक होकर जो भी कहा हो उसे समग्रता से इस तरह से कहा जा सकता है कि “अब हम अपने परिवार और गांव के लोगों की बातें आसानी से सुन सकेंगे। हमें ऐसा लग रहा है जैसे हमारी जिंदगी फिर से सामान्य हो गई है।”उनके चेहरे पर संतोष साफ झलक रहा था उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “अब सरकार हमारे पास आ रही है, हमें भटकना नहीं पड़ता। यह सच में सुशासन है।”

सुशासन तिहार बन रहा साय सरकार की संवेदनशीलता का प्रतीक

सुशासन तिहार 2026 का मुख्य उद्देश्य है ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचकर उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान करना, योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना, प्रशासन को सरल, सुलभ और जवाबदेह बनाना। इन शिविरों में आवेदक से आवेदन लेकर उसका तुरंत निराकरण किया जाता है और मौके पर ही लाभान्वित किया जाता है। इस तिहार में स्वास्थ्य सेवाएं, सामाजिक सुरक्षा योजनाएं, दिव्यांगजनों के लिए सहायक उपकरण, पेंशन और प्रमाण पत्र वितरण यह सब कुछ एक ही मंच पर उपलब्ध कराया जा रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की संवेदनशील पहल बनी दिव्यांगजनों के लिए संबल

दिव्यांगजनों के जीवन में सुशासन तिहार का सबसे सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहा है। ट्रायसाइकिल की सुविधा, व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र और छड़ी के वितरण के साथ पेंशन स्वीकृति जैसे प्रयास दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन जीने की नई राह दिखा रहा है। कबीरधाम जिले के झलमला गांव में ट्रायसाइकिल मिलने के बाद दूसरों पर निर्भर रहने वाले बहुत से दिव्यांगजन आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते हुए अब अपना काम खुद कर पा रहे हैं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सोच स्पष्ट है “शासन तभी सफल कहलाता है जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और उसकी जिंदगी में धनात्मक परिवर्तन आए।” सुशासन तिहार का अस्तित्व इसी सोच का परिणाम है। इस तिहार में प्रशासन गांव तक पहुंच रहा है समस्याओं का समाधान तुरंत हो रहा है लोगों में सरकार के प्रति भरोसा बढ़ रहा है।

गांव-गांव की बदलती तस्वीर

सुशासन तिहार से छत्तीसगढ़ के गांवों में एक नई ऊर्जा दिखाई दे रही है। लोगों में जागरूकता आ रही है, वे योजनाओं का लाभ उठाते हुए आत्मनिर्भर बन रहे हैं। लिखन राम वर्मा और ज्ञान राम सिन्हा जैसे बहुत से हितग्राही इस बदलाव के साक्षी बने हैं। उनका प्रसंग यह बताता है कि “जब सरकार संवेदनशील होती है तो छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव सम्भव है। “सुशासन तिहार 2026 ने यह भी साबित कर दिया है कि प्रशासन अपनी कार्यशैली से सरकार और जनता के बीच की दूरी खत्म भी कर सकता है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में होने वाले सुशासन तिहार का क्रियान्वयन, मानव जीवन को बेहतर बनाने का मिशन बन चुका है।

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