संजय पाटीदार, भोपाल। राजधानी भोपाल में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत बांटे जा रहे गेहूं की गुणवत्ता को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह सख्त हो गया है। राशन दुकानों में मिट्टी और कचरा युक्त गेहूं मिलने की शिकायत के बाद अब प्रशासनिक अधिकारियों को सीधे मैदान में उतार दिया गया है। कलेक्टर के कड़े रुख के बाद तय किया गया है कि अब संबंधित क्षेत्रों के एसडीएम (SDM) नियमित रूप से राशन दुकानों का औचक निरीक्षण कर गेहूं की गुणवत्ता और वितरण व्यवस्था पर नजर रखेंगे।

कलेक्टर के निरीक्षण में खुली थी पोल

दरअसल, बीते शनिवार को कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने शाहपुरा स्थित वार्ड-48 के ‘एकता उपभोक्ता भंडार’ का औचक निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान राशन दुकान में बांटे जा रहे गेहूं में भारी मात्रा में मिट्टी और कचरा पाया गया था। इस गंभीर लापरवाही के बाद समयावधि (TL) की बैठक में कलेक्टर ने कड़ा संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को क्षेत्र स्तर पर मॉनिटरिंग के निर्देश जारी किए।

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3.25 लाख परिवारों से जुड़ा है मामला

भोपाल में वर्तमान में लगभग 3.25 लाख पात्रता पर्चीधारी परिवार PDS योजना के तहत राशन प्राप्त करते हैं। खाद्य विभाग में 8 सहायक आपूर्ति अधिकारी (ASO) और कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी (JSO) की तैनाती होने के बावजूद राशन की गुणवत्ता में आई इस गिरावट ने विभाग की निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

SDM खुद परखेंगे गेहूं की गुणवत्ता

प्रशासन के नए फैसले के तहत अब सभी एसडीएम अपने-अपने क्षेत्रों की राशन दुकानों पर पहुंचकर गेहूं की भौतिक जांच करेंगे। वे यह सुनिश्चित करेंगे कि आम जनता को मानक और साफ-सुथरा खाद्यान्न ही वितरित किया जाए। लापरवाही पाए जाने पर संबंधित दुकानदारों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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