सुरेश पांडेय, सिंगरौली चितरंगी। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा आयोजित ‘हर घर तिरंगा’ यात्रा के दौरान प्रशासनिक लापरवाही का एक बड़ा मामला सामने आया है। भीषण गर्मी और तेज धूप में निकाली गई इस रैली में शासकीय विद्यालय की कई दर्जन छात्राओं की अचानक तबीयत बिगड़ गई, जिससे कार्यक्रम स्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इस कार्यक्रम में सूबे की राज्यमंत्री राधा सिंह भी शामिल थीं।

निजी स्कूलों ने बनाई दूरी, सरकारी बच्चों पर भारी पड़ी रैली

यात्रा के दौरान एक तरफ जहां क्षेत्र के निजी (प्राइवेट) विद्यालयों के एक भी छात्र नजर नहीं आए, वहीं दूसरी तरफ सरकारी स्कूलों के गरीब छात्र-छात्राओं को इस चिलचिलाती धूप में पैदल चलने पर मजबूर होना पड़ा। स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने सवाल उठाया है कि आखिर हर बार इस तरह के आयोजनों में केवल सरकारी स्कूल के गरीब बच्चों को ही क्यों झोंका जाता है और उनके स्वास्थ्य के साथ ऐसा अन्याय क्यों किया जाता है?

न पानी का इंतजाम, न स्वास्थ्य विभाग की टीम

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दोपहर के समय जब यह यात्रा निकाली गई तब तापमान बेहद अधिक था। इतनी भीषण गर्मी के बावजूद पूरे रैली मार्ग में बच्चों के लिए पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं की गई थी। हद तो तब हो गई जब इतनी बड़ी छात्र संख्या वाली रैली में स्वास्थ्य विभाग (एम्बुलेंस या मेडिकल टीम) का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी दूर-दूर तक नजर नहीं आया।

राज्यमंत्री की मौजूदगी में बिगड़े हालात

हैरानी की बात यह है कि इस पूरी यात्रा में राज्यमंत्री राधा सिंह खुद मौजूद थीं। उनके सामने ही कुप्रबंधन के चलते दर्जनों छात्राओं की हालत खराब होने लगी, जिससे रैली में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। आनन-फानन में स्थानीय लोगों और शिक्षकों की मदद से अस्वस्थ बच्चों को संभाला गया।इस घटना के बाद से स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं कि बिना पुख्ता इंतजामों और सुरक्षा उपायों के स्कूली बच्चों को इस भीषण गर्मी में रैली में क्यों शामिल होने दिया गया।

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