रोहित कश्यप, मुंगेली। महीनों तक प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर, जनदर्शन में शिकायत, कलेक्टर को बार-बार आवेदन, कई बार जांच और सीमांकन के बावजूद समाधान नहीं मिलने का दावा करते हुए ग्राम सेमरकोना का एक परिवार आखिरकार धरना प्रदर्शन करने को मजबूर हो गया। मामला प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत स्वीकृत आवास के निर्माण, निजी भूमि के सीमांकन, बार-बार लगाए गए स्थगन (स्टे) आदेश और प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़ा है।
7 जुलाई को जनदर्शन में दी थी धरने की पूर्व सूचना
देवेंद्र ने बताया कि 7 जुलाई को उन्होंने कलेक्टर जनदर्शन में एक विस्तृत आवेदन प्रस्तुत किया था। आवेदन में कहा गया था कि पूर्व में दिए गए आवेदन और शिकायतों पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने प्रशासन से शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन की अनुमति भी मांगी थी तथा यह भी उल्लेख किया था कि यदि पृथक अनुमति जारी नहीं की जाती है तो उसी आवेदन को धरना प्रदर्शन की पूर्व सूचना माना जाए। परिवार का कहना है कि इस आवेदन के बाद भी उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ और न ही सीमांकन एवं निर्माण संबंधी विवाद का कोई ठोस निराकरण किया गया। इसके बाद उन्होंने लोकतांत्रिक तरीके से धरना प्रदर्शन शुरू करने का निर्णय लिया।

जनदर्शन से लेकर कलेक्टर कार्यालय तक, लेकिन नहीं मिला समाधान
परिवार के अनुसार, इससे पहले भी कई बार जनदर्शन में शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। 12 जून को कलेक्टर के नाम विस्तृत आवेदन देकर जिला स्तर से निष्पक्ष सीमांकन, स्पष्ट चिन्हांकन, स्टे आदेश हटाने और प्रधानमंत्री आवास निर्माण शुरू कराने की मांग की गई थी। बावजूद इसके उनका कहना है कि लंबे समय तक कोई निर्णायक कार्रवाई नहीं हुई।
बार-बार स्टे आदेश और अधूरा पड़ा प्रधानमंत्री आवास
विवाद ग्राम बेलसरी स्थित निजी भूमि पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनाए जा रहे मकान से जुड़ा है। परिवार के अनुसार, 29 जनवरी को निर्माण पर पहला स्टे आदेश जारी हुआ, जिससे लगभग चार महीने तक काम बंद रहा। 4 जून को स्टे हटने के बाद निर्माण शुरू होने की उम्मीद जगी, लेकिन 8 जून को फिर से स्थगन आदेश जारी कर दिया गया। परिवार का आरोप है कि बार-बार स्टे लगाए जाने के कारण उनका मकान अधूरा रह गया और बरसात शुरू होने से निर्माण सामग्री खराब हो रही है। उनका कहना है कि लगभग 50 बोरी सीमेंट खराब हो चुकी है तथा अन्य सामग्री भी नुकसान की स्थिति में है।

10 बार जांच, तीन बार सीमांकन, फिर भी नहीं हुआ अंतिम निर्णय
देवेंद्र कुमार का कहना है कि इस पूरे मामले में लगभग 10 बार राजस्व द्वारा स्थल निरीक्षण किया जा चुका है तथा तीन बार सीमांकन भी कराया गया है। इसके बावजूद आज तक उनकी 13 डिसमिल निजी भूमि का अंतिम एवं स्पष्ट चिन्हांकन नहीं किया गया। परिवार का कहना है कि वर्तमान स्टे आदेश में केवल इतना लिखा गया है कि निर्माण का कुछ हिस्सा शासकीय भूमि और कुछ हिस्सा निजी भूमि पर है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि कौन-सा हिस्सा विवादित है। उनका कहना है कि स्पष्ट सीमांकन के बिना पूरे निर्माण पर रोक लगाना अनुचित है।
अधिकारी ने जिला स्तरीय टीम गठित करने का दिया आश्वासन
धरना प्रदर्शन के दौरान जिला प्रशासन की ओर से अधिकारी मौके पर पहुंचे। परिवार के अनुसार, एसडीएम अजय कुमार शतरंज ने जिला स्तरीय सीमांकन कराने संबंधी आदेश की प्रति उन्हें सौंपी और बताया कि 13 जुलाई को जिला स्तरीय टीम गठित कर मौके पर सीमांकन एवं आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन से मिले इस लिखित आश्वासन के बाद परिवार ने अपना धरना प्रदर्शन समाप्त कर दिया। परिवार ने उम्मीद जताई कि अब लंबे समय से लंबित विवाद का निष्पक्ष समाधान होगा।

कांग्रेस नेता संजीत बनर्जी ने दिया समर्थन
धरना स्थल पर कांग्रेस नेता संजीत बनर्जी भी पहुंचे और प्रदर्शनकारी परिवार से मुलाकात कर समर्थन व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है। संजीत बनर्जी ने कहा कि यदि जिला स्तरीय सीमांकन कराने जैसी सामान्य प्रशासनिक कार्रवाई के लिए भी एक परिवार को विष्णु जी के सुशासन राज में धरना प्रदर्शन करना पड़े, तो यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। वो भी तब ज़ब दो-दो कद्दावर मंत्री के गृह जिला का मामला हो तब तो और भी सोचने पर मजबूर लड़ देता है।
उन्होंने कहा कि मामला प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़ा है और एक गरीब परिवार अपने सपनों का घर बनाने का प्रयास कर रहा है, लेकिन प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण उसे कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित मामले में यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनावश्यक विलंब हुआ है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। उन्होंने परिवार को भरोसा दिलाया कि उन्हें न्याय नही मिलने पर एक सप्ताह बाद उनके साथ भूख हड़ताल पर बैठेंगे l
राजनीतिक चर्चा का विषय बना मामला
यह मामला इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि मुंगेली जिला केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू और छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव का गृह जिला है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहे हैं कि जब एक परिवार अपनी निजी भूमि के सीमांकन और प्रधानमंत्री आवास निर्माण जैसे मुद्दे के समाधान के लिए लंबे समय तक संघर्ष करता रहा, तब प्रशासनिक स्तर पर समयबद्ध समाधान क्यों नहीं हो सका।

परिवार की मांग
धरना समाप्त होने के बाद भी परिवार ने स्पष्ट किया है कि उनकी प्रमुख मांगें यह हैं कि जिला स्तरीय टीम से निष्पक्ष सीमांकन एवं चिन्हांकन,13 डिसमिल निजी भूमि का विधिवत कब्जा,विवादित हिस्से की स्पष्ट पहचान,स्टे आदेश की समीक्षा, एवं स्टे आदेश हटाने की मांग, साथ ही पांच दिवस में समस्या का समाधान नही होने पर अनिश्चित कालीन हड़ताल में जाने की चेतावनी प्रदर्शनकारी परिवार के द्वारा दी गई है। वही स्टे हटाकर प्रधानमंत्री आवास निर्माण पुनः प्रारंभ कराने की मांग भी की गई है l अब सभी की नजर 13 जुलाई को प्रस्तावित जिला स्तरीय सीमांकन कार्रवाई पर टिकी हुई है। यदि प्रशासन के आश्वासन के अनुरूप निष्पक्ष सीमांकन होता है, तो लंबे समय से चला आ रहा यह विवाद समाप्त हो सकता है। वहीं यदि समाधान नहीं निकलता है, तो मामला आगे भी प्रशासनिक और राजनीतिक चर्चा का विषय बना रह सकता है।
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