लवकुश बैरागी, आगर-मालवा। मध्य प्रदेश के आगर से एक मानवता को शर्मसार करने और प्रशासनिक लापरवाही की खबर सामने आई है, जिसे देखकर किसी का भी कलेजा कांप उठे। आगर नगर की देसाई कॉलोनी में कुछ दिनों पूर्व प्रशासन द्वारा चलाए गए अतिक्रमण विरोधी अभियान में एक बेबस, लाचार और बुजुर्ग महिला दुर्गाबाई का आशियाना उजाड़ दिया। एक तरफ जहां सरकार गरीबों की छत देने के दावे कर रही हैं तो वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत में एक बुजुर्ग की पूरी जिंदगी की कमाई को मलबे में तब्दील कर दिया गया। इस घटना के बाद अब NSUI के राष्ट्रीय महासचिव अंकुश भटनागर ने पीड़ित बुजुर्ग महिला का हाथ थामा है और उन्हें साथ लेकर कलेक्टर प्रीति यादव के पास न्याय की गुहार लगाने पहुंचे हैं।

खून-पसीने की कमाई… मलबे में तब्दील हो गई बुजुर्ग की दुनिया!
बुजुर्ग दुर्गाबाई की बेबसी और उनके हक के जो दस्तावेज सामने आए हैं, वह इस पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा करते हैं। कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में बताया गया कि वृद्ध महिला दुर्गाबाई कोई अतिक्रमणकारी नहीं हैं। उनके पास ‘मुख्यमंत्री शहरी भू-अधिकार योजना’ के तहत 538 वर्गफीट का पूरी तरह से वैध आवासीय पट्टा मौजूद है।
इसी वैध पट्टे की जमीन पर सरकार ने खुद उनके लिए ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ के तहत मकान स्वीकृत किया था। योजना से मिली किस्तों के अलावा, इस गरीब मां ने पाई-पाई जोड़कर और दूसरों से 80 हजार रुपये उधार लेकर अपने सिर को छिपाने के लिए मकान का निर्माण शुरू कराया था। लेकिन प्रशासन की बेरहम टीम ने बिना सोचे-समझे उनके इस सपनों के घर को जमींदोज कर दिया।

नोटिस किसी और का, घर दुर्गाबाई का तोड़ा
इस पूरे मामले में प्रशासनिक लापरवाही का एक ऐसा खौफनाक ‘सस्पेंस’ सामने आया है, जिसे सुनकर किसी को भी अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गुस्सा आ जाए। एनएसयूआई नेताओं और पीड़ित महिला ने आरोप लगाया है कि तहसीलदार कार्यालय से जो बेदखली या अतिक्रमण हटाने का नोटिस जारी हुआ था, वह किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर था।
उस नोटिस वाले नाम का कोई भी व्यक्ति न तो उस मकान में रहता था और न ही उस जमीन से उसका कोई वास्ता था। लेकिन सुस्त और लापरवाह अमले ने बिना कोई जांच-पड़ताल किए, सीधे एक गरीब, पात्र और बुजुर्ग महिला के मकान पर बुलडोजर चला दिया।

कलेक्टर से लगाई न्याय की गुहार…
हाथों में पट्टा और आंखों में आंसुओं का सैलाब लिए जब बुजुर्ग महिला कलेक्टर प्रीति यादव के सामने खड़ी हुई, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। NSUI नेता अंकुश भटनागर ने कलेक्टर से मांग की है कि एक गरीब और बेसहारा महिला के साथ हुई इस घोर अन्यायपूर्ण कार्रवाई की तुरंत निष्पक्ष जांच कराई जाए और जिम्मेदार दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई हो।
बुजुर्ग महिला ने कर्ज लेकर जो मकान खड़ा किया था, उस अवैध तोड़फोड़ से हुए भारी नुकसान का शासन की ओर से उचित मुआवजा दिया जाए। पीड़ित महिला को उसी पट्टे की जमीन पर बिना किसी व्यवधान के दोबारा मकान बनाने की तुरंत प्रशासनिक अनुमति दी जाए। उन्होंने प्रशासन को नसीहत दी कि ऐसे संवेदनशील और गरीबों से जुड़े मामलों में अधिकारियों को क्रूरता छोड़कर ‘मानवीय दृष्टिकोण’ और दया भाव अपनाना चाहिए।
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