विशेष न्यायालय (पीएमएलए) ने मेसर्स अजमेरा ग्रुप और अन्य के मामले में अपराध से प्राप्त धन (पीओसी) को उसके सही हकदारों को वापस दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए बड़ी कार्रवाई की है. विशेष PMLA अदालत ने 8.41 करोड़ रुपए मूल्य की संपत्तियां उनके वैध दावेदारों और पीड़ितों को लौटाने का आदेश दिया है. यह मामला सीधे तौर पर आम जनता के साथ की गई धोखाधड़ी से जुड़ा हुआ है.
ईडी ने मामले में कई संपत्तियां अटैच कर अदालत में अभियोजन शिकायत दाखिल की थी. निवेशकों से ठगी गई मोटी रकम का इस्तेमाल अजमेरा ग्रुप के निदेशकों और दूसरे व्यक्तियों ने कई प्रॉपर्टीज खरीदने के लिए किया है.
बेंगलुरु के अजमेरा ग्रुप मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पीड़ित निवेशकों को बड़ी राहत मिली है. न्यायालय ने धन शोधन के अपराध के पीड़ितों और सही हकदारों को 8.41 करोड़ रुपए की संपत्ति वापस करने का आदेश दिया है. ईडी की जांच में पता चला कि भारी मात्रा में धन अजमेरा ग्रुप के निदेशकों और अन्य संबंधित व्यक्तियों के बैंक खातों में स्थानांतरित किया गया था.
जांच के दौरान यह भी पता चला कि निवेशकों का पैसा कंपनी के निदेशकों और सहयोगियों के खातों में ट्रांसफर कर उससे कई चल-अचल संपत्तियां खरीदी गईं. ईडी ने मामले में कई संपत्तियां अटैच कर अदालत में अभियोजन शिकायत दाखिल की थी.
ED ने बेंगलुरु स्थित अजमेरा ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर, निदेशकों और उनके सहयोगियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की अलग-अलग धाराओं के तहत दर्ज की गई FIR के आधार पर जांच शुरू की थी. ED की जांच में पता चला कि अजमेरा ग्रुप ने आम जनता से उनके द्वारा किए गए निवेश पर ज्यादा रिटर्न का वादा करके निवेश प्राप्त किया था.
आरोपियों ने न तो निवेशकों को कोई मुनाफा दिया और न ही उनकी मूल जमा राशि वापस की. ठगी हुई रकम को अजमेरा ग्रुप के डायरेक्टर्स और उनसे जुड़े दूसरे व्यक्तियों के निजी बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर लिया गया था.
पीड़ितों और सही हकदारों को उनका हक दिलाने के उद्देश्य से ईडी ने अदालत में संपत्तियां लौटाने पर कोई आपत्ति नहीं जताई. विशेष अदालत ने 9 जून 2026 को आदेश जारी कर 8.41 करोड़ रुपए की अटैच संपत्तियां पीड़ितों और वैध दावेदारों को वापस करने की अनुमति दे दी.
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