पटना। बिहार की राजनीति में एक बार फिर बयानों का दौर तेज हो गया है। किशनगंज जिले के बहादुरगंज विधानसभा क्षेत्र से ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के विधायक तौसीफ आलम ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत के खिलाफ बेहद तीखी टिप्पणी की है। इस बयान के सामने आने के बाद सूबे की राजनीति में एक नया भूचाल आ गया है और दोनों दलों के बीच सरगर्मी काफी बढ़ गई है।

​कंगना के बयान पर किया गया पलटवार

​यह पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब कंगना रनौत के एक तीखे बयान के जवाब में विधायक तौसीफ आलम मीडिया के सामने आए। कंगना के उस बयान के बाद AIMIM विधायक ने उनके पुराने फिल्मी सफर और पृष्ठभूमि पर सवाल खड़े कर दिए। विधायक ने कहा कि कंगना रनौत जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल करती हैं, वह उसे दोहराना नहीं चाहते, लेकिन उन्हें देश के सामने अपनी पुरानी पहचान और इतिहास को नहीं भूलना चाहिए।

​इतिहास गवाह है कि वह क्या थीं- विधायक तौसीफ आलम

​अपने तीखे तेवर दिखाते हुए तौसीफ आलम ने कंगना रनौत को लेकर आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि इतिहास इस बात का गवाह है कि कंगना रनौत बॉलीवुड में आने से पहले और अपने करियर के दौरान क्या करती थीं। विधायक ने उन्हें नाचने वाली, गाने वाली और अंग प्रदर्शन करने वाली तक कह डाला। उन्होंने आगे कहा कि आज वह सांसद बन गई हैं, तो इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि वह जमीन से जुड़े लोगों और लोकतांत्रिक परंपराओं का अपमान करें।

​भूख हड़ताल और प्रदर्शन के अधिकार का पुरजोर समर्थन

​इस बयानबाजी के दौरान विधायक तौसीफ आलम ने देश के संविधान और लोकतंत्र का हवाला देते हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन और भूख हड़ताल के अधिकार का पुरजोर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में अपनी मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन करना या भूख हड़ताल पर बैठना नागरिकों का मौलिक और संवैधानिक अधिकार है। यह लोकतंत्र की असली खूबसूरती को दर्शाता है।
​विधायक ने कंगना रनौत पर निशाना साधते हुए कहा कि वह अक्सर लोकतांत्रिक तरीकों से विरोध प्रदर्शन करने वालों पर उंगली उठाती हैं, जो पूरी तरह से गलत है। जनता और विपक्षी दलों को अपनी बात रखने का पूरा हक है।

​सांसद पद की गरिमा और चेतावनी

​तौसीफ आलम ने कंगना को नसीहत देते हुए कहा कि चूंकि उन्हें भारतीय जनता पार्टी ने टिकट दिया और जनता ने चुनकर संसद में भेजा है, इसलिए उन्हें अपने पद की गरिमा और मर्यादा का पूरा ख्याल रखना चाहिए। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि वह अपनी भाषा और रवैये में सुधार नहीं करती हैं, तो देश की जनता उन्हें एक जिम्मेदार जनप्रनिधि के रूप में नहीं, बल्कि उनके पुराने फिल्मी और विवादास्पद स्वरूप के रूप में ही याद रखेगी।
​इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग छिड़ गई है, और आने वाले दिनों में इसके तूल पकड़ने के पूरे आसार नजर आ रहे हैं।